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फ्रांस में पारिवारिक व्याभिचार बना बड़ा मुद्दा, #metoo अभियान की तरह ट्रेंड हुआ #metooincest
Mon, 25 Jan 2021 04:29 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 25 Jan 2021 04:29 PM IST
सार
इस अभियान की शुरुआत हाल में एक किताब के प्रकाशन के बाद हुई। इस किताब में देश के एक जाने-माने राजनीतिक टीकाकार पर परिवार के भीतर यौन शोषण करने का आरोप लगाया गया है...
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French President Emmanuel Macron
- फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
फ्रांस में पारिवारिक व्याभिचार का मुद्दा इतना बड़ा बन गया है कि राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों को इस बारे में सामने आना पड़ा है। उन्होंने एक वीडियो बयान जारी कर आश्वासन दिया है कि परिवार के भीतर यौन उत्पीड़न का शिकार हुए व्यक्ति खुद को अकेला महसूस ना करें। उन्होंने इस मामले में कानून में जरूरी बदलाव करने का भरोसा भी दिया। फ्रांस में पिछले हफ्ते पारिवारिक व्याभिचार के शिकार लोगों ने प्रभावशाली ऑनलाइन अभियान छेड़ दिया। ये मुहिम #मीटू अभियान (#metoo) की तरह तेजी से फैल गई है।
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फ्रांस में कुछ समय पहले इस बारे में कानून में संशोधन हुआ था। उसके मुताबिक पारिवारिक व्याभिचार की शिकार कोई महिला या पुरुष घटना के 30 साल बाद तक केस दर्ज करा सकते हैं। लेकिन मैक्रों ने कहा है कि जरूरी हुआ तो इस अवधि को और बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में बाल यौन उत्पीड़न निवारक बैठकों का और अधिक आयोजन किया जाएगा। साथ ही पीड़ितों की मनोवैज्ञानिक चिकित्सा का खर्च सरकार उठाएगी। मैक्रों ने कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कदम उठाने का वक्त है। उन्होंने ऐसी घटनाओं का जिक्र किया, जिनकी वजह से बहुत से बच्चों की जिंदगियां मनोवैज्ञानिक रूप से तबाह हो जाती हैं।
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इस अभियान की शुरुआत हाल में एक किताब के प्रकाशन के बाद हुई। इस किताब में देश के एक जाने-माने राजनीतिक टीकाकार पर परिवार के भीतर यौन शोषण करने का आरोप लगाया गया है। किताब कैमिले काउचनर ने लिखी है। वे मेडिसिंस सैन्स फ्रंतियर नामक संस्था के संस्थापक बर्नार्ड काउचनर की बेटी हैं। बर्नाड काउचनर फ्रांस के विदेश मंत्री भी रह चुके हैं। कैमिले काउचनर ने आरोप लगाया कि राजनीति-शास्त्री ओलिवर दुहामेल ने 30 साल पहले अपने जुड़वा भाई का यौन उत्पीड़न किया था।
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ये किताब चर्चित होने के बाद फ्रांस के एक प्रमुख नारीवादी संगठन ने #मीटू जैसा अभियान छेड़ दिया। इस अभियान का नाम #मीटूइंसेस्ट (#metooincest) रखा गया है। ये अभियान चलते ही इंटरनेट पर सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने अपने बालपन में परिवार के भीतर हुए यौन शोषण की कहानियां दुनिया को बताईं। दुहामेल ने किताब में लगाए गए आरोप को व्यक्तिगत हमला बताया है। लेकिन ये मामला इतना गर्म हुआ कि उन्हें एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
इस अभियान की तुलना 2017 में अमेरिका में हार्वे विंसटीन पर लगे यौन उत्पीड़न के बाद शुरू हुए #मीटू अभियान से की गई है। #मीटूइंसेस्ट हैशटैग के साथ फ्रांस में किए गए ट्विट्स की संख्या हजारों में पहुंच चुकी है। समाजशास्त्रियों का कहना है कि पारिवारिक व्याभिचार पर बात करना अब तक फ्रेंच समाज में वर्जित था। लेकिन इस अभियान ने लोगों को सामने आकर अपनी पीड़ा बताने का मौका दिया है। इससे जाहिर हुआ है कि ऐसी घटनाएं आम हैं। इससे इस बात की जरूरत महसूस हुई है कि ऐसे अपराधों कानून में स्वीकार किया जाए और सजा के उचित प्रावधान किए जाएं। फ्रांस की परिवार मामलों की मंत्री एद्रिन ताके ने कहा है कि फ्रांस सरकार ने इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया है।
इस बीच #मीटूइंसेस्ट अभियान को मिली सफलता के बाद फ्रांस में #मीटूगे अभियान भी इंटरनेट पर शुरू हो गया है। इसके तहत समलैंगिक यौन उत्पीड़न की कहानियां लोग साझा कर रहे हैं। सामाजिक समता लाने की प्रभारी मंत्री इलिसाबेथ मोरेनो ने एक ट्विट में कहा कि लैंगिक यौन हिंसा एक ऐसा कलंक है, जिसका हमें सामूहिक रूप से मुकाबला करना होगा। उन्होंने कहा कि पीड़ित जो कहानियां बता रहे हैं, उस पर यकीन किया जाना चाहिए और उनकी मदद की जानी चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन मुताबिक 18 साल की उम्र होने तक लगभग 20 फीसदी महिलाएं और आठ फीसदी पुरुष यौन उत्पीड़न का शिकार हो चुके होते हैं। लेकिन जानकारों का कहना है कि ये संख्या कम है, क्योंकि असल में बहुत से लोग ऐसे मामलों की चर्चा नहीं करते। इसलिए असली सूरत सामने नहीं आती। इसीलिए इसे अच्छी बात माना जा रहा है कि फ्रांस में अब ये कंलक खुल कर सामने आ रहा है।