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पाम ऑयल निर्यात: इंडोनेशिया का रुख बदलने से दुनिया को कुछ राहत

Wed, 27 Apr 2022 04:16 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 27 Apr 2022 04:16 PM IST
सार

कृषि मंत्रालय के दस्तावेज के मुताबिक कच्चे पाम ऑयल का निर्यात जारी रहेगा। निर्यात पर रोक सिर्फ रिफाइंड, ब्लीच्ड और डियोडेराइज्ड पाम ऑयल पर लगेगा। यानी पाम ऑयल के उस हिस्से पर प्रतिबंध लगेगा, जिसका इस्तेमाल खाना पकाने में होता है। अन्य उत्पादों में क्रूड पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है...

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Indonesia Ministry of Agriculture said, export of crude palm oil will continue, ban will be applicable only on refined, bleached and deodorized palm oil
पॉम ऑयल - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

इंडोनेशिया ने पाम ऑयल के निर्यात पर रोक लगाने के फैसले में आंशिक सुधार किया है। इससे महंगाई और चढ़ने की आशंका से दुनिया को कुछ राहत मिली है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने पहले कहा था कि पाम ऑयल के निर्यात पर रोक गुरुवार से अनिश्चित काल के लिए लागू हो जाएगी। लेकिन बाद में जब कृषि मंत्रालय ने इसका विवरण जारी किया, तो उससे जाहिर हुआ कि ये रोक आंशिक है।

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कृषि मंत्रालय के दस्तावेज के मुताबिक कच्चे पाम ऑयल का निर्यात जारी रहेगा। निर्यात पर रोक सिर्फ रिफाइंड, ब्लीच्ड और डियोडेराइज्ड पाम ऑयल पर लगेगा। यानी पाम ऑयल के उस हिस्से पर प्रतिबंध लगेगा, जिसका इस्तेमाल खाना पकाने में होता है। अन्य उत्पादों में क्रूड पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है। जानकारों के मुताबिक सामने आए विवरण का मतलब यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों के भाव तो प्रभावित होंगे, लेकिन अन्य उत्पाद इससे बचे रहेंगे।

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उत्पादन में इंडोनेशिया का हिस्सा 60 फीसदी

पाम ऑयल का इस्तेमाल कई खाद्यों और कॉस्मेटिक्स सहित अन्य उपभोक्ता पदार्थों के उत्पादन में होता है। दुनिया के पाम ऑयल के कुल उत्पादन में इंडोनेशिया का हिस्सा 60 फीसदी है। इंडोनेशिया के बाद पाम ऑयल का एक बड़ा उत्पाद यूक्रेन है। वहां चल रहे युद्ध के कारण वहां से इस उत्पाद की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसकी वजह से दुनिया भर में महंगाई बढ़ी है।

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इंडोनेशिया में खाना पकाने के तेल के उत्पादन में पाम ऑयल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। रमजान महीने में यहां खाद्य तेलों की खपत बढ़ जाती है। राष्ट्रपति विडोडो ने कहा है कि देश के अंदर खाद्य तेल पर्याप्त मात्रा में किफायती दर पर उपलब्ध रहें, इसे उनकी सरकार सुनिश्चित करेगी। वैसे बाजार विशेषज्ञ इस बात से सहमत नहीं हैं कि निर्यात रोकने से इंडोनेशिया में खाद्य तेल सस्ते हो जाएंगे।

जकार्ता स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर इकॉनमिक्स एंड लॉ स्टडीज में अर्थशास्त्री भीमा युधिष्ठिर ने कहा है- ‘अगर कच्चा माल बड़े पैमाने पर उपलब्ध रहे, तो उससे घरेलू बाजार में दाम अपने-आप नहीं घट जाएंगे। बल्कि निर्यात से होने वाली कमाई जरूर घट जाएगी।’ उन्होंने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘निर्यात रोकने के कारण हर महीने लगभग तीन बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा का नुकसान होगा। लंबे समय मे इसका असर रुपिया (इंडोनेशियाई मुद्रा) की ताकत पर पड़ सकता है।’

लहसुन के निर्यात पर लग सकती है रोक

युधिष्ठिर ने चेतावनी दी है कि इंडोनेशिया के इस फैसले से जो देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, वे जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। भारत, पाकिस्तान और चीन इंडोनेशिया के लिए लहसुन का निर्यात रोक सकते हैं। उधर मलेशिया के पौध रोपण एवं कॉमोटिडी मंत्री जुरैदा कमरुद्दीन ने कहा है कि मलेशिया विश्व बाजार को पाम आयल की आपूर्ति करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद सीमाएं खुलने के कारण अब मलेशिया में पाम ऑयल का उत्पादन बढ़ने की मजबूत संभावना है।

सॉल्वेंट एक्स्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा है कि इंडोनेशिया के निर्यात रोकने के अचानक फैसले का भारत और अन्य बड़े उपभोक्ता देशों पर बहुत खराब असर पड़ेगा। उन्होंने वेबसाइट निक्कईएशिया को बताया- ‘भारत, पाकिस्तान और चीन तीनों पाम ऑयल आयात के लिए इंडोनेशिया पर काफी निर्भर हैं।’ उन्होंने कहा कि यूक्रेन में युद्ध के कारण पहले से ही सूरजमुखी तेल का संकट था। अब मुश्किल और बढ़ जाएगी। भारत में हर साल दो करोड़ 20 लाख टन खाना पकाने के तेल की खपत होती है। इनमें पाम ऑयल का हिस्सा 80 लाख टन है।


 
संयुक्त राष्ट्र की संस्था- फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (एफएओ) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक बीते मार्च में वनस्पति तेलों के दाम 23.2 फीसदी बढ़े। इन तेलों की इतनी महंगाई इसके पहले कभी नहीं देखी गई थी।

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