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BTA: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत में तेजी, अमेरिकी वित्त मंत्री बोले- भारत के साथ समझौता करना आसान
Tue, 29 Apr 2025 07:47 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क / वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क / वाशिंगटन
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 29 Apr 2025 07:47 PM IST
सार
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट भारत के साथ द्विपक्षीय समझौते पर कहा कि, 'भारत के साथ बातचीत अच्छी चल रही है। मुझे लगता है हम बहुत करीब हैं। भारत के पास पहले से ही ऊंचे टैरिफ हैं, इसलिए उनके साथ बातचीत करना आसान है। जिन देशों के पास छिपे हुए या गैर-टैरिफ बाधाएं हैं, उनके साथ समझौता करना कठिन होता है।'
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स्कॉट बेसेंट, अमेरिका के वित्त मंत्री
- फोटो : ANI
विस्तार
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि भारत के साथ व्यापार समझौता लगभग पूरा होने वाला है। उन्होंने बताया कि भारत के साथ बातचीत अच्छी चल रही है और अन्य देशों की तुलना में भारत से समझौता करना आसान है क्योंकि यहां टैरिफ (शुल्क) साफ-साफ और स्पष्ट हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री ने यह बात व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कही। सोमवार को एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि भारत उन शुरुआती देशों में से एक हो सकता है, जिनके साथ अमेरिका व्यापार समझौता कर सकता है, ताकि आपसी टैरिफ से बचा जा सके।
यह भी पढ़ें - India US BTA: द्विपक्षीय व्यापार को लेकर अमेरिकी वित्त मंत्री का एलान, कहा- पहला समझौता भारत के साथ होगा
हाल ही में भारत दौरे पर थे अमेरिकी उपराष्ट्रपति
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस पिछले हफ्ते भारत दौरे पर थे और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच 'द्विपक्षीय व्यापार समझौता' पर अच्छी प्रगति हुई। उपराष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि अब दोनों देशों ने बातचीत के लिए एक रोडमैप भी तय कर लिया है। बयान के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों में रोजगार और कारोबार बढ़ाने में मदद करेगा। अमेरिका और भारत दोनों इसे अपने-अपने विकासकाल - अमृत काल और गोल्डन एज - से जोड़कर देख रहे हैं।
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क्या है भारत-अमेरिका व्यापार समझौता?
यह एक नया और आधुनिक व्यापार समझौता होगा, जिसका मकसद दोनों देशों के लोगों की भलाई, नौकरियों में बढ़ोतरी, और सप्लाई चेन को मजबूत करना है। भारत की तरफ से इस बातचीत का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव राजेश अग्रवाल कर रहे हैं। पिछले हफ्ते वॉशिंगटन में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच आमने-सामने की बातचीत शुरू हुई है।
यह भी पढ़ें - Trade: वाणिज्य सचिव का हेग दौरा, भारत और नीदरलैंड ने व्यापार और निवेश बढ़ाने के तरीके पर की चर्चा
अमेरिका क्यों चाहता है समझौता?
अमेरिका का कहना है कि इस समझौते से अमेरिकी सामानों को भारत में नए बाजार मिलेंगे और दोनों देशों के किसानों, कामगारों और उद्यमियों को फायदा होगा। अमेरिका ने पहले से ही 2 अप्रैल को कई देशों पर टैरिफ लगाए थे, लेकिन 9 अप्रैल को 90 दिन के लिए इन टैरिफों को सस्पेंड कर दिया (चीन और हांगकांग को छोड़कर)। हालांकि, 10% का आधार शुल्क और स्टील, एल्युमिनियम व ऑटो पार्ट्स पर 25% शुल्क अभी भी लागू है।
क्या है भारत की प्रतिक्रिया?
भारत के वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने 15 अप्रैल को कहा था कि भारत इस बातचीत को जल्द से जल्द खत्म करना चाहता है ताकि व्यापारिक रिश्तों में मजबूती आ सके।
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हाल ही में भारत दौरे पर थे अमेरिकी उपराष्ट्रपति
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस पिछले हफ्ते भारत दौरे पर थे और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच 'द्विपक्षीय व्यापार समझौता' पर अच्छी प्रगति हुई। उपराष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि अब दोनों देशों ने बातचीत के लिए एक रोडमैप भी तय कर लिया है। बयान के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों में रोजगार और कारोबार बढ़ाने में मदद करेगा। अमेरिका और भारत दोनों इसे अपने-अपने विकासकाल - अमृत काल और गोल्डन एज - से जोड़कर देख रहे हैं।
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क्या है भारत-अमेरिका व्यापार समझौता?
यह एक नया और आधुनिक व्यापार समझौता होगा, जिसका मकसद दोनों देशों के लोगों की भलाई, नौकरियों में बढ़ोतरी, और सप्लाई चेन को मजबूत करना है। भारत की तरफ से इस बातचीत का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव राजेश अग्रवाल कर रहे हैं। पिछले हफ्ते वॉशिंगटन में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच आमने-सामने की बातचीत शुरू हुई है।
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अमेरिका क्यों चाहता है समझौता?
अमेरिका का कहना है कि इस समझौते से अमेरिकी सामानों को भारत में नए बाजार मिलेंगे और दोनों देशों के किसानों, कामगारों और उद्यमियों को फायदा होगा। अमेरिका ने पहले से ही 2 अप्रैल को कई देशों पर टैरिफ लगाए थे, लेकिन 9 अप्रैल को 90 दिन के लिए इन टैरिफों को सस्पेंड कर दिया (चीन और हांगकांग को छोड़कर)। हालांकि, 10% का आधार शुल्क और स्टील, एल्युमिनियम व ऑटो पार्ट्स पर 25% शुल्क अभी भी लागू है।
क्या है भारत की प्रतिक्रिया?
भारत के वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने 15 अप्रैल को कहा था कि भारत इस बातचीत को जल्द से जल्द खत्म करना चाहता है ताकि व्यापारिक रिश्तों में मजबूती आ सके।
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