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कोविड ऋण योजना: ब्रिटेन में भारतीय मूल के दंपती ने गलत जानकारी देकर लिया कर्ज, धोखाधड़ी के दोषी करार 

Thu, 23 Dec 2021 04:12 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, लंदन
पीटीआई, लंदन Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 23 Dec 2021 04:12 PM IST
सार

bounce back loan frauds uk : 40 वर्षीय हरमन बांगड और उनकी पत्नी नीना कुमारी 38 को वोल्वरहम्पटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पिछले सप्ताह दोषी ठहराया। उन्हें इसी कोर्ट द्वारा 14 जनवरी 2022 को सजा सुनाई जाएगी। 

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Indian-origin couple convicted for COVID loan scheme fraud in UK
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

भारतीय मूल के एक पूर्व ब्रिटिश राजनेता व उनकी पत्नी को कोविड-19 ऋण योजना (bounce back loan) से मदद लेने के लिए गलत जानकारी देने का दोषी ठहराया गया है। ब्रिटिश सरकार ने यह योजना शुरू की थी। 
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40 वर्षीय हरमन बांगड और उनकी पत्नी नीना कुमारी 38 को वोल्वरहम्पटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पिछले सप्ताह दोषी ठहराया। उन्हें इसी कोर्ट द्वारा 14 जनवरी 2022 को सजा सुनाई जाएगी। कोर्ट ने पाया कि पूर्व स्थानीय पार्षद बांगड ने वोल्वरहम्पटन सिटी काउंसिल की कोविड-19 ऋण योजना के क्रियान्वयन में धोखाधड़ी की। क्रॉउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (CPS) ने कहा कि एक भरोसेमंद चुनाव अधिकारी हरमन बांगड ने पत्नी नीना कुमारी के साथ मिलकर अपने पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने यह धोखाधड़ी ऐसे वक्त की जब देश राष्ट्रीय संकट से जूझ रहा था। 

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सीपीएस के धोखाधड़ी मामलों की विशेषज्ञ वेंडी स्टीवंस ने कहा कि बांगड़ को कोविड-19 बिजनेस सपोर्ट स्कीम्स की पात्रता की अच्छी समझ थी। इसके आधार पर उन्होंने एक बिजनेस का दावा करते हुए सिस्टम को धोखा देने की कोशिश की, जबकि इस दंपती को इस योजना का लाभ लेने की पात्रता नहीं थी। 
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पिज्जा प्लस के लिए मांगा 10 हजार पाउंड की लोन सहायता
बांगड़ दंपती ने कोविड-19 बाउंस बैक लोन स्कीम के तहत 10 हजार पाउंड का बिजनेस लोन लेने का आवेदन दिया। दंपती ने यह आवेदन पिज्जा प्लस नामक एक कारोबार के लिए दिया था। दंपती 24 अप्रैल 2020 से इसके मालिक थे, जबकि उन्होंने दावा किया था कि वे अक्तूबर 2019 से यह कारोबार कर रहे हैं। 

हालांकि काउंसिल की धोखाधड़ी विरोधी टीम व वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस ने जांच में पाया कि 16 मई 2020 के पूर्व बांगड़ दंपती द्वारा बताए गए पते पर बिजली कनेक्शन का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। यह संपत्ति जर्जर अवस्था में थी, इसलिए वहां किसी तरह के कारोबार किए जाने के कोई सबूत नहीं थे। 

इस तरह जांच में साबित हुआ कि दंपती ने सरकार की वित्तीय सहायता योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन करते समय धोखाधड़ीपूर्वक दावा किया था। जांच में झूठ पकड़े जाने के कारण योजना के तहत भुगतान नहीं किया गया। 


मार्च 2020 में, ब्रिटेन के वित्त मंत्री ऋषि सुनक ने उन व्यवसायों के लिए वित्तीय मदद के उपायों की शुरुआत की थी, जिनका व्यापार COVID-19 महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन से प्रभावित हुआ था। तब से, धोखाधड़ी-रोधी जांच टीम को इस योजना के दुरुपयोग की कई रिपोर्टें मिली हैं। 

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