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मॉरीशस: 'हिंद महासागर के देशों को मजबूत करना होगा सहयोग', होर्मुज संकट के बीच जयशंकर का संदेश
Sat, 11 Apr 2026 04:10 AM IST
Nirmal Kant
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पोर्ट लुईस।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पोर्ट लुईस।
Published by: Nirmal Kant
Updated Sat, 11 Apr 2026 04:10 AM IST
सार
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नौवें हिंद महासागर सम्मेलन के उद्घाटन कार्यक्रम में अपने विचार रखे और हिंद महासागर को संसाधन व संस्कृति का साझा पारिस्थितिकीतंत्र बताया। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है। पढ़िए रिपोर्ट-
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नौवें हिंद महासागर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते विदेश मंत्री एस जयशंकर
- फोटो : एक्स/एएनआई/डॉ एस जयशंकर
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विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को नौवें हिंद महासागर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग, संपर्क और वैश्विक चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम और इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष राम माधव भी मौजूद थे।
जयशंकर ने क्या मुख्य बातें कहीं?
अपने संबोधन में विदेश मंत्री ने कहा, हिंद महासागर केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि पूरा पारिस्थितिकीतंत्र है। यह संसाधन, संपर्क और साझा संस्कृति का स्रोत है। उन्होंने कहा, किी भी वैश्विक संकट का असर इसके सदस्य देशों पर गहराई से पड़ता है।
उन्होंने आगे कहा, क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना, आर्थिक संबंधों को गहरा करना, संपर्क को दोबारा स्थापित करना और परंपराओं को पुनर्जीवित करना जरूरी है। जयशंकर ने कहा, भौतिक, वित्तीय, तकनीकी, संसाधन और ज्ञान से जुड़े अवरोधों को दूर करना जरूरी है, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था बेहतर हो सके।
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ये भी पढ़ें: अमेरिकी राजदूत गोर ने विदेश सचिव मिस्री से की मुलाकात, दोनों देशों के उर्जा सहयोग के भविष्य पर चर्चा
उन्होंने यह भी कहा, वैश्विक दक्षिण के महासागर के सदस्य होने के नाते हमें संघर्ष, संकट और आपदाओं से मिलकर निपटना चाहिए। भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति और 'दृष्टिकोण महासागर' इसी विचार को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, एक बिखरी हुई दुनिया में मानसून की भावना हमें साथ मिलकर काम करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने सम्मेलन की सफलता की शुभकामनाएं दीं।
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जयशंकर ने क्या मुख्य बातें कहीं?
अपने संबोधन में विदेश मंत्री ने कहा, हिंद महासागर केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि पूरा पारिस्थितिकीतंत्र है। यह संसाधन, संपर्क और साझा संस्कृति का स्रोत है। उन्होंने कहा, किी भी वैश्विक संकट का असर इसके सदस्य देशों पर गहराई से पड़ता है।
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उन्होंने आगे कहा, क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना, आर्थिक संबंधों को गहरा करना, संपर्क को दोबारा स्थापित करना और परंपराओं को पुनर्जीवित करना जरूरी है। जयशंकर ने कहा, भौतिक, वित्तीय, तकनीकी, संसाधन और ज्ञान से जुड़े अवरोधों को दूर करना जरूरी है, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था बेहतर हो सके।
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उन्होंने यह भी कहा, वैश्विक दक्षिण के महासागर के सदस्य होने के नाते हमें संघर्ष, संकट और आपदाओं से मिलकर निपटना चाहिए। भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति और 'दृष्टिकोण महासागर' इसी विचार को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, एक बिखरी हुई दुनिया में मानसून की भावना हमें साथ मिलकर काम करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने सम्मेलन की सफलता की शुभकामनाएं दीं।