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कतर गए भारतीय प्रवासी मजदूरों से अमानवीय ढंग से कराया जा रहा काम, बदले में मिल रही गुमनाम मौत

Fri, 26 Feb 2021 08:52 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर अजाला, दोहा
न्यूज डेस्क, अमर अजाला, दोहा Published by: प्रियंका तिवारी Updated Fri, 26 Feb 2021 08:52 PM IST
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Qatar Indian Migrant Workers Death News Indian migrant laborers are being worked inhumanly in Qatar receiving anonymous death in return
कतर में पिछले 10 सालों में कई देशों के 6500 से ज्यादा प्रवासी मजदूरों की हुई मौत - फोटो : सोशल मीडिया

भारत से काम की तलाश में खाड़ी देशों में गए लाखों मजदूरों को आए दिन गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई रिपोर्टस में यह बात सामने आई है कि इन देशों में प्रवासी कामगारों से बेहद अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया जा रहा है। इस बात को लेकर कई मानवाधिकार संगठनों ने चिंता भी जताई है।

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खाड़ी देशों में से एक कतर में वर्ष 2022 में फीफा वर्ल्ड कप आयोजित होने वाला है। ऐसे में यहां स्टेडियम बनाने से लेकर तमाम अन्य काम भारत समेत पड़ोसी देशों के मजदूरों से कराए जा रहे हैं। इस बीच एक रिपोर्ट से पता चला है कि यहां तमाम प्रवासी मजदूर मजबूरियों से भरी जिंदगी जी रहे हैं और गुमनाम मौत मर रहे हैं।
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साल 2022 में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप के मद्देनजर कतर में सात नए स्टेडियम बनाए जाने के साथ ही कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें एक नया एयरपोर्ट, कई होटल और एक नए शहर का निर्माण जैसे काम भी शामिल हैं।
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हाल ही में सार्वजनिक हुई एक रिपोर्ट का मानें तो पिछले 10 सालों में भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के 6500 से ज्यादा प्रवासी मजदूरों की कतर में मौत हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिसंबर 2010 में फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी हासिल करने के बाद से भारत समेत पांचों एशियाई देशों से हर सप्ताह 12 प्रवासी मजदूरों की मौत हुई।

भारत, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के डाटा से पता चलता है कि साल 2011 से 2020 के बीच करीब 5927 प्रवासी मजदूरों की मौत हुईं। वहीं, कतर में पाकिस्तान के दूतावास की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 सालों में 824 पाकिस्तानी मजदूरों की मौत हुई है। ऐसे में गंभीर बात यह है कि कतर की सरकार इन मजदूरों की मौतों की पड़ताल करने में भी नाकाम रही है।

खाड़ी देशों में मजदूरों के अधिकारों की वकालत करने वाले संगठन फेयरस्क्वेयर प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर निक मैकगीहनका कहना है कि कतर में मजदूरों की मौत को उनके पेशे के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया जाता है, लेकिन इनमें से ज्यादातर मजदूर वर्ल्ड कप की परियोजनाओं में ही काम कर रहे थे।

गौरतलब है कि कतर की आबादी करीब 30 लाख है जबकि यहां 20 लाख प्रवासी मजदूर काम करते हैं। यहां साढ़े छह लाख से ज्यादा भारतीय कामगार भी हैं। यहां के श्रम कानूनों की वजह से कामगारों पर मालिक का पूरा नियंत्रण रहता है। दुर्घटना में मजदूरों की मौत होने पर उन्हें पर्याप्त मुआवजा तक नहीं मिलता।


रिपोर्ट के अनुसार, वर्ल्ड कप स्टेडियम के निर्माण कार्य से जुड़े 37 मजदूरों की मौत हुई, जिसमें से 34 लोगों की मौत को आयोजन समिति ने काम से इतर श्रेणी में रखा है। एक्सपर्ट्स ने इस टर्म के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए हैं क्योंकि इनमें उन लोगों की मौत को भी शामिल किया जाता है जिनकी मौत कंस्ट्रक्शन साइट पर हुई।

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