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US: कौन हैं भाविनी पटेल? जिन्होंने तय किया फूड ट्रक से स्टार्टअप तक का सफर; अब आजमां रहीं चुनाव में किस्मत
Thu, 08 Feb 2024 01:49 PM IST
काव्या मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Thu, 08 Feb 2024 01:49 PM IST
सार
30 वर्षीय पटेल ने पिछले साल दो अक्तूबर को 12वें पेन्सिलवेनिया जिले से कांग्रेस का दामन थामने के फैसले की घोषणा की थी। वर्तमान में यहां पटेल की डेमोक्रेटिक पार्टी की साथी समर ली प्रतिनिधि हैं।
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भाविनी पटेल
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
भारतीय मूल की भाविनी पटेल का नाम आजकल काफी चर्चाओं में है। दरअसल, पटेल यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के लिए चुनावी दौड़ में शामिल हैं। उन्होंने यह सफर बेहद मुश्किल हालात में तय किया है। एक समय ऐसा था, जब वह अपनी मां की मदद करने के लिए इंडिया ऑन व्हील्स नाम से एक फूड ट्रक चलाती थीं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने अपना एक टेक स्टार्टअप शुरू किया था। अब वह अमेरिकी संसद के चुनाव में किस्मत आजमा रही हैं।
पिछले साल किया था एलान
30 वर्षीय पटेल ने पिछले साल दो अक्तूबर को 12वें पेन्सिलवेनिया जिले से कांग्रेस का दामन थामने के फैसले की घोषणा की थी। वर्तमान में यहां पटेल की डेमोक्रेटिक पार्टी की साथी समर ली प्रतिनिधि हैं। लेकिन, बीते कुछ वर्षों से इस क्षेत्र में समर ली की लोकप्रियता में खासी कमी देखने को मिली है। उल्लेखनीय है कि समर ली उन कुछ सांसदों में से एक हैं, जिन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अमेरिकी कांग्रेस के ऐतिहासिक संयुक्त संबोधन का विरोध किया था।
तीन लाख डॉलर जुटाए
23 अप्रैल को होने वाले प्राइमरी चुनाव के लिए भाविनी पटेल ने 3.10 लाख डॉलर से अधिक की राशि जुटाई है। उनका कहना है कि इसमें से मुश्किल से 70 फीसदी राज्य के अंदर से जुटाया गया है। भाविनी पटेल को लगभग 33 चयनित अधिकारियों की ओर से समर्थन भी मिला है। इनमें छोटे शहरों के मेयर्स समेत काउंसिल सदस्यों के नाम भी शामिल हैं। बता दें कि भाविनी पटेल राष्ट्रपति जो बाइडन की कट्टर समर्थक हैं। वह बाइडन को अमेरिका का सबसे प्रोग्रेसिव राष्ट्रपति मानती हैं।
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वाशिंगटन यात्रा के दौरान पटेल ने कहा था, 'हमने लोगों से उनके घर जाकर संपर्क किया है। एक-एक व्यक्ति से बात की है। क्षेत्र के लोग ऐसे कैंपेन को समर्थन देने के लिए बहुत उत्साहित हैं, जिसका उद्देश्य पेन्सिल्वेनिया को विकास के रास्ते पर लेकर जाना है। इस जिले में रहने वाले समुदायों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनका समाधान करना बहुत जरूरी है।'
यह है भाविनी पटेल की कहानी
बता दें कि भाविनी पटेल की मां मूल रूप से गुजरात की थीं। अपनी मां के संघर्ष को लेकर भाविनी पटेल ने बताया, 'वह जब इस देश में आई थीं तब उनके पास कुछ भी नहीं था। उन्होंने अकेले मुझे और मेरे भाई को पाला पोसा। हमें अलग-अलग शहरों में रहना पड़ा था। मेरी मां ने बहुत कुछ सहन किया। वह रेस्तरां में बर्तन धुलने से लेकर मोटल इंडस्ट्री तक कई तरह के काम किया करती थीं। बाद में उन्होंने वेस्टर्न पेन्सिल्वेनिया में फूड ट्रक का काम शुरू किया था।' उन्होंने कहा कि मेरा परिवार पिछले 25 साल से फूड ट्रक का संचालन कर रहा है।
भाविनी ने कहा, 'हमारे फूड ट्रक का नाम इंडिया ऑन व्हील्स है। मैं इसी में काम करते हुए बड़ी हुई हूं। हमारा एक फूड ट्रक पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के कैंपस में था और दूसरा कॉर्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी कैंपस में। इनमें उत्तर भारतीय खाना परोसा जाता है।'
बता दें कि कॉलेज से ग्रेजुएट होने वाली भाविनी पटेल अपने परिवार की पहली शख्स हैं। भाविनी को ऑक्सफोर्ड से मास्टर्स डिग्री पूरी करने के लिए स्कॉलरशिप मिली थी।
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पिछले साल किया था एलान
30 वर्षीय पटेल ने पिछले साल दो अक्तूबर को 12वें पेन्सिलवेनिया जिले से कांग्रेस का दामन थामने के फैसले की घोषणा की थी। वर्तमान में यहां पटेल की डेमोक्रेटिक पार्टी की साथी समर ली प्रतिनिधि हैं। लेकिन, बीते कुछ वर्षों से इस क्षेत्र में समर ली की लोकप्रियता में खासी कमी देखने को मिली है। उल्लेखनीय है कि समर ली उन कुछ सांसदों में से एक हैं, जिन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अमेरिकी कांग्रेस के ऐतिहासिक संयुक्त संबोधन का विरोध किया था।
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तीन लाख डॉलर जुटाए
23 अप्रैल को होने वाले प्राइमरी चुनाव के लिए भाविनी पटेल ने 3.10 लाख डॉलर से अधिक की राशि जुटाई है। उनका कहना है कि इसमें से मुश्किल से 70 फीसदी राज्य के अंदर से जुटाया गया है। भाविनी पटेल को लगभग 33 चयनित अधिकारियों की ओर से समर्थन भी मिला है। इनमें छोटे शहरों के मेयर्स समेत काउंसिल सदस्यों के नाम भी शामिल हैं। बता दें कि भाविनी पटेल राष्ट्रपति जो बाइडन की कट्टर समर्थक हैं। वह बाइडन को अमेरिका का सबसे प्रोग्रेसिव राष्ट्रपति मानती हैं।
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वाशिंगटन यात्रा के दौरान पटेल ने कहा था, 'हमने लोगों से उनके घर जाकर संपर्क किया है। एक-एक व्यक्ति से बात की है। क्षेत्र के लोग ऐसे कैंपेन को समर्थन देने के लिए बहुत उत्साहित हैं, जिसका उद्देश्य पेन्सिल्वेनिया को विकास के रास्ते पर लेकर जाना है। इस जिले में रहने वाले समुदायों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनका समाधान करना बहुत जरूरी है।'
यह है भाविनी पटेल की कहानी
बता दें कि भाविनी पटेल की मां मूल रूप से गुजरात की थीं। अपनी मां के संघर्ष को लेकर भाविनी पटेल ने बताया, 'वह जब इस देश में आई थीं तब उनके पास कुछ भी नहीं था। उन्होंने अकेले मुझे और मेरे भाई को पाला पोसा। हमें अलग-अलग शहरों में रहना पड़ा था। मेरी मां ने बहुत कुछ सहन किया। वह रेस्तरां में बर्तन धुलने से लेकर मोटल इंडस्ट्री तक कई तरह के काम किया करती थीं। बाद में उन्होंने वेस्टर्न पेन्सिल्वेनिया में फूड ट्रक का काम शुरू किया था।' उन्होंने कहा कि मेरा परिवार पिछले 25 साल से फूड ट्रक का संचालन कर रहा है।
भाविनी ने कहा, 'हमारे फूड ट्रक का नाम इंडिया ऑन व्हील्स है। मैं इसी में काम करते हुए बड़ी हुई हूं। हमारा एक फूड ट्रक पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के कैंपस में था और दूसरा कॉर्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी कैंपस में। इनमें उत्तर भारतीय खाना परोसा जाता है।'
बता दें कि कॉलेज से ग्रेजुएट होने वाली भाविनी पटेल अपने परिवार की पहली शख्स हैं। भाविनी को ऑक्सफोर्ड से मास्टर्स डिग्री पूरी करने के लिए स्कॉलरशिप मिली थी।