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Hindi News ›   World ›   India UK Free Trade Agreement FTA Tariff on Products and Services to be cut down PM Modi Keir Starmer deal

भारत-UK के बीच FTA हुआ: हमारे किन निर्यातों को मिलेगी टैरिफ से छूट, ब्रिटेन की कौन सी चीजें सस्ती होंगी?

Thu, 24 Jul 2025 09:37 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 24 Jul 2025 09:37 PM IST
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सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन के अपने चौथे दौरे में जिस मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं, वह आखिर होता क्या है? भारत और ब्रिटेन के बीच इस समझौते के बाद किन-किन वस्तुओं के निर्यात और आयात में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है? किन सेक्टरों को इससे सबसे ज्यादा फायदा होने की संभावना है? इसके अलावा भारत-ब्रिटेन के रिश्ते इससे किस तरह प्रभावित होंगे? आइये जानते हैं...
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India UK Free Trade Agreement FTA Tariff on Products and Services to be cut down PM Modi Keir Starmer deal
भारत-ब्रिटेन के बीच जल्द हो सकते हैं मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन दौरे पर हैं। अपने दो दिवसीय दौरे पर पीएम भारत-ब्रिटेन के रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले कुछ समझौते करेंगे। इनमें सबसे पहले जिस डील पर उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के साथ हस्ताक्षर किए हैं, वह है मुक्त व्यापार समझौता (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट)। इस अहम समझौते की बदौलत दोनों देशों के बीच व्यापार में जबरदस्त बढ़ोतरी होने की संभावना है। 


ऐसे में यह जानना अहम है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन के अपने चौथे दौरे में जिस मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं, वह आखिर होता क्या है? भारत और ब्रिटेन के बीच इस समझौते के बाद किन-किन वस्तुओं के निर्यात और आयात में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है? किन सेक्टरों को इससे सबसे ज्यादा फायदा होने की संभावना है? इसके अलावा भारत-ब्रिटेन के रिश्ते इससे किस तरह प्रभावित होंगे? आइये जानते हैं...

भारत-ब्रिटेन के बीच एफटीए मंजूर हुआ तो भारत को किस तरह होगा फायदा?
रिपोर्ट्स की मानें तो भारत को एफटीए के तहत सबसे बड़ा फायदा निर्यात क्षेत्र में मिलेगा। भारत का निर्यात आने वाले कुछ वर्षों में 10 से 12 अरब डॉलर (करीब 86 हजार करोड़ से 1.1 लाख करोड़ रुपये) तक बढ़ सकता है। 



1. ब्रिटेन को होने वाले 99% निर्यात पर शून्य होगा टैरिफ
ब्रिटिश अखबार 'द गार्डियन' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते से भारत की अधिकतर वस्तुओं-सेवाओं पर आयात शुल्क खत्म कर दिया जाएगा। इससे भारत के निर्यात सेक्टर को ब्रिटेन में सामान बेचने के जबरदस्त मौके मिलेंगे। 



भारत में अभी इन उद्योगों पर ब्रिटेन की तरफ से 4 से 16 प्रतिशत तक टैरिफ लगता है।

2. सेवा क्षेत्र को मिलेगी बढ़ोतरी
एफटीए के जरिए भारत के सेवा क्षेत्र को भी काफी फायदा मिलने की संभावना है। दरअसल, भारत वस्तुओं के साथ सेवाओं का बड़ा प्रदाता है। खासकर पेशेवर सेक्टर्स में, जैसे वित्तीय सेवाओं में, आईटी सेक्टर में और शिक्षा क्षेत्र में। भारत के सेवा क्षेत्र के लिए ब्रिटेन का लगातार बढ़ता वित्तीय और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर काफी बेहतर बाजार है। 

3. श्रम आधारित सेक्टरों को फायदा
वस्तुओं और सेवा क्षेत्र के साथ-साथ भारत के श्रम आधारित सेक्टर को भी ब्रिटेन में जबरदस्त फायदा मिलेगा। योग प्रशिक्षक, शेफ और अन्य स्वतंत्र कर्मियों को एफटीए के जरिए सेवाओं में खासी छूट और नए मौके मिलेंगे।

4. ब्रिटेन में सामाजिक सुरक्षा योगदान से मिलेगी छूट
दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते में एक अहम नियम यह रखा गया है कि इससे ब्रिटेन में काम कर रहे भारतीय कर्मियों को सामाजिक सेवा के लिए किए जाने वाले भुगतान से तीन साल की छूट मुहैया कराई जाएगी। इससे भारत के उन उद्योगों और कंपनियों को फायदा मिलेगा, जो कि ब्रिटेन में पहले से ही काम कर रहे हैं या भविष्य में ब्रिटेन में उद्योग खड़ा करना चाहते हैं। इससे ब्रिटिश बाजार में ही भारत की कंपनियों को प्रतियोगिता देने में भी मदद मिलेगी। इस छूट से भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन में हर साल अनुमानित 40 अरब रुपये तक बचाने में मदद मिलेगी।

भारत से मुक्त व्यापार समझौते से ब्रिटेन को कैसे होगा लाभ?
दूसरी तरफ भारत से एफटीए के जरिए ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर हर साल करीब 4.8 अरब पाउंड (56 हजार करोड़ रुपये) का फायदा होने का अनुमान है। माना जा रहा है कि 2040 तक ब्रिटेन की जीडीपी भी इस समझौते के जरिए तेजी से बढ़ सकती है। 

1. ब्रिटेन के 90 फीसदी उत्पादों-सेवाओं को टैरिफ से मिलेगी छूट
भारत ने ब्रिटेन से आयात होने वाले करीब 90 फीसदी उत्पादों और सेवाओं पर टैरिफ में बड़ी कमी करने का फैसला किया है। हालांकि, यह कटौती चरणबद्ध तरीके से होगी। इनमें सबसे बड़ी छूट ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की को मिलेगी, जिसे एफटीए लागू होने के ठीक बाद भारत में 150 फीसदी टैरिफ से सीधे 75 फीसदी टैरिफ के वर्ग में पहुंचा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, अगले एक दशक में यह टैरिफ घटाते हुए 40 फीसदी पर पहुंचा दिया जाएगा। यानी ब्रिटिश स्कॉच-व्हिस्की भारत में काफी सस्ती हो जाएंगी।

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दूसरी तरफ ब्रिटेन की कारें भी भारत में सस्ती होने का अनुमान है। दरअसल, अभी भारत की तरफ से ब्रिटिश कारों पर 100 फीसदी से ज्यादा टैरिफ लगाया जाता है। हालांकि, एफटीए के बाद यह टैरिफ 10 फीसदी तक आ जाएगा। इसके अलावा ब्रिटेन से आने वाले मेडिकल उपकरण, कॉस्मेटिक्स,  फार्मा उत्पादन, एयरक्राफ्ट के पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को टैरिफ में छूट मिलेगी और ब्रिटिश कंपनियां भारत में नया बाजार तलाशने में सफल होंगी। ब्रिटेन से निर्यात वाले कुछ खाद्य पदार्थ, जैसे- भेड़, सैल्मन, चॉकलेट और बिस्किट पर भी भारत टैरिफ को कम करेगा। ब्रिटिश सरकार का अनुमान है कि इन चीजों पर कम टैरिफ के जरिए ब्रिटेन के निर्यात से हर साल 40 करोड़ पाउंड (4500 करोड़ रुपये) तक बचा लेंगे, जो कि बाद में 90 करोड़ पाउंड (10,500 करोड़) तक पहुंच जाएगा।

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2. भारत के गैर-संवेदनशील सेक्टर्स में निवेश कर सकेगा ब्रिटेन
भारत की तरफ से ब्रिटेन के निर्यातकों को असंवेदनशील क्षेत्रों में एंट्री का मौका दिया जाएगा। यानी ब्रिटिश कंपनियां अब भारत के केंद्रीय और राज्य आधारित संस्थानों में टेंडर भर सकेंगी। 

3. ब्रिटिश कंपनियों को भारत में मिलेगी आसान एंट्री
इसके अलावा ब्रिटेन के वित्तीय, निर्माण, टेलीकॉम और पेशेवर सेवाओं को भी भारत में गारंटी के साथ पहुंच का प्रावधान एफटीए में किया गया है। माना जा रहा है कि सबसे बड़ा फायदा ब्रिटेन के बैंकिंग और बीमा सेक्टर को होगा, जो कि अपने कार्यक्रमों से भारत की बड़ी आबादी को लुभा सकेंगी। इसके अलावा ब्रिटेन की वकीलों की फर्म्स और अकाउंटिंग फर्म भी भारत के बाजार में एंट्री ले सकती हैं। 

4. भू-राजनीतिक और कूटनीतिक फायदे
एफटीए के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच भू-राजनीतिक और कूटनीतिक संबंध बढ़ने की संभावनाएं हैं। दोनों ही देश आगे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा ब्रिटेन को चीन की तरह ही भारत का बड़ा बाजार मिल रहा है, जो कि चीन पर उसकी निर्भरता को कम करेगा। 

क्या संवेदनशील सेक्टर्स को बचाने में सफल रहेगा भारत?
भारत और ब्रिटेन के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते की सबसे खास बात यही है कि इसमें भारत ने अपने कृषि क्षेत्र को ब्रिटेन की पहुंच से दूर रखा है। यानी ब्रिटेन की कंपनियां फिलहाल भारत के बाजार में अपने उत्पाद नहीं उतार पाएंगी। खासकर डेयरी उत्पाद, सेब, चीज, ओट्स, खाद्य तेल से जुड़े सेक्टर्स को एफटीए से बाहर रखा गया है।

इसके अलावा भारत ने अपने प्लास्टिक, हीरे, चांदी, स्मार्टफोन, टेलीविजन कैमरा ट्यूब्स, ऑप्टिकल फाइबर और केबल्स के क्षेत्र को समझौते में शामिल नहीं किया है। 

कुछ और संवेदनशील क्षेत्रों को भारत ने सीधे तौर पर एफटीए से बाहर तो नहीं रखा, लेकिन इन क्षेत्रों में टैरिफ हटाने या कम करने की अवधि को काफी ज्यादा रखा है। इनमें पेट्रोलियम उत्पाद, सेरेमेकि्स, कई तरह के केमिकल, एयरक्राफ्ट इंजन और इंजीनियरिंग से जुड़े उपकरणों पर टैरिफ शामिल हैं। 

दोनों देशों को इस एफटीए से कितने फायदे का अनुमान?
भारत और ब्रिटेन के बीच 2024 तक द्विपक्षीय व्यापा करीब 42.6 अरब पाउंड (करीब पांच लाख करोड़ रुपये) का रहा। इस एफटीए के लागू होने के बाद दोनों देश अब व्यापार को 2040 तक हर साल 25.5 अरब पाउंड बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। 2030 तक दोनों के बीच का व्यापार करीब 120 अरब पाउंड तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। 
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