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आधी आबादी: UN में बोला भारत- दुनिया में स्थायी शांति के लिए राजनीति, कानून और आर्थिक क्षेत्र में महिलाएं अहम

Sat, 26 Oct 2024 01:28 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 26 Oct 2024 01:28 AM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र में वैश्विक शांति में महिलाओं की भूमिका पर हुई चर्चा में भारत ने अहम बयान दिया। भारतीय राजदूत हरीश ने कहा कि सामाजिक के साथ-साथ सरकारी विभागों में भी महिलाओं की भूमिका उल्लेखनीय रही है।

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India says in UN Women are important in politics law and economic fields for permanent peace in world
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पार्वथनेनी हरीश - फोटो : वीडियो ग्रैब/एएनआई

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र में स्विट्जरलैंड ने महिलाओं की भूमिका पर चर्चा की शुरुआत की। वैश्विक शांति में महिलाओं की भूमिका पर इस बहस में भारत ने भी लिया। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पार्वथनेनी हरीश ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने स्विट्जरलैंड को महिलाओं द्वारा शांति निर्माण पर इस महत्वपूर्ण बहस के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र महिला कार्यकारी निदेशक और नागरिक समाज के प्रतिनिधि की व्यावहारिक ब्रीफिंग की सराहना करते हैं। 

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भारतीय राजदूत हरीश ने कहा कि जैसे ही हम परिषद के प्रस्ताव 1325 की 25वीं वर्षगांठ के करीब पहुंच रहे हैं, भारत महिला शांति और सुरक्षा एजेंडे के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। 
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 उन्होंने कहा, हम मानते हैं कि स्थायी शांति के लिए महिलाओं की पूर्ण, समान, अर्थपूर्ण और सुरक्षित भागीदारी आवश्यक है, जिसमें राजनीति, शासन, संस्था निर्माण, कानून का शासन, सुरक्षा क्षेत्र और आर्थिक सुधार सहित निर्णय लेने के सभी स्तर शामिल हैं। सामान्य रूप से आबादी और विशेष रूप से महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भलाई स्थायी शांति का अभिन्न अंग है।
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महिला सशक्तिकरण में भारत ने की महत्वपूर्ण प्रगति
राजदूत हरीश ने आगे कहा कि भारत ने महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण प्रगति की है, विशेष रूप से शांति स्थापना और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि भारत ने महिला, शांति और सुरक्षा (डब्ल्यूपीएस) एजेंडे को लागू करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में पांचवें सबसे बड़े सैन्य योगदानकर्ता के रूप में, भारत ने पहली बार सभी महिला सैनिकों को तैनात किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने 2007 में लाइबेरिया में पहली महिला पुलिस इकाई तैनात की, जो संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में एक मिसाल है। उनके काम को लाइबेरिया और संयुक्त राष्ट्र में बहुत सराहना मिली। वर्तमान में हमने अपने शांति मिशन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई है, जिसमें 100 से अधिक भारतीय महिला शांति रक्षक विश्वभर में सेवा कर रही हैं, जिनमें तीन पूरी तरह से महिला सहभागिता टीमें शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि 2023 में, भारत ने राष्ट्रीय और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने वाला एक ऐतिहासिक विधेयक पारित किया, जिससे उन्हें राजनीतिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशक्त बनाया गया। हमने सामुदायिक स्तर के साथ-साथ सरकारी औहदों पर भी महिलाओं की भूमिका को प्रोत्साहित किया है।


हर साल एक हजार महिलाएं होती हैं अपराध का शिकार
राजदूत हरीश ने आगे कहा, 'यह निंदनीय है लेकिन पूरी तरह से अनुमान लगाने योग्य है कि एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी आजमाई हुई और परखी हुई रणनीति के आधार पर शरारती उकसावे में शामिल होने का विकल्प चुना है। इस महत्वपूर्ण वार्षिक बहस में राजनीतिक प्रचार में शामिल होना पूरी तरह से गलत है। हम जानते हैं कि उस देश में अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं, विशेष रूप से हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों की स्थिति दयनीय है। उस देश के मानवाधिकार आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इन अल्पसंख्यक समुदायों की लगभग 1000 महिलाएं हर साल अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन विवाह का शिकार होती हैं।'

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