UNGA: 'वार्षिक रिपोर्ट पर बहस में ठोस तथ्यों का अभाव, अब यह रस्मअदायगी आम'; यूएन के मंच पर भारत की टिप्पणी
भारतीय राजनयिक माथुर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर इस रिपोर्ट को बहुत गंभीरता से लेता है। हम सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट पर चर्चा में भाग लेने का अवसर दिए जाने का स्वागत करते हैं।
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी, प्रकाश और विश्लेषण होना चाहिए, मगर आज रिपोर्ट पर बिना किसी तथ्य के बहस करना एक प्रथा बन गई है।
यूएनजीए में बोले प्रतीक माथुर
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के मंत्री प्रतीक माथुर ने वार्षिक रिपोर्ट पर यूएनजीए की चर्चा में यह बयान दिया। उन्होंने स्थायी और अस्थायी सदस्यों के विस्तार के साथ सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया।
इन लोगों को दी बधाई
माथुर ने कहा, 'हम सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट पर चर्चा में भाग लेने का अवसर दिए जाने का स्वागत करते हैं। हम सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने के लिए सुरक्षा परिषद और सचिवालय के सदस्यों को धन्यवाद देते हैं। भारत 2025-2026 की अवधि के लिए परिषद में चुने गए नए सदस्यों को भी बधाई देता है। हम उनके साथ रचनात्मक और सकारात्मक तरीके से काम करने के लिए तत्पर हैं।'
New York: Pratik Mathur, Minister, India's Permanent Mission to the UN, delivers India's statement at the UNGA Debate on the Annual Report of the UNSC today.
Source: Permanent Mission of India to the United Nations pic.twitter.com/eD1vlYpgw2 — ANI (@ANI) June 25, 2024
भारतीय राजनयिक ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर इस रिपोर्ट को बहुत गंभीरता से लेता है। जैसा कि इस तथ्य से स्पष्ट है कि इस तरह की रिपोर्ट को अनिवार्य बनाने के लिए एक अलग प्रावधान मौजूद है, न कि इसे अन्य संयुक्त राष्ट्र निकायों की रिपोर्टों के प्रावधान के साथ जोड़ दिया गया है।
बिना तथ्य के बहस करना एक प्रथा...
उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट में उन उपायों की जानकारी और विश्लेषण होना चाहिए, जो इसने समीक्षाधीन अवधि के दौरान अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए उठाए हैं। प्रतीक माथुर ने आगे कहा, 'हालांकि वार्षिक रिपोर्ट पर बहस करना एक प्रथा बन गई है, जिसमें कोई खास तथ्य नहीं होता है। वार्षिक रिपोर्ट में बैठकें, उनमें हुईं चर्चाएं और चर्चाओं से जुड़े दस्तावेजों का विवरण शामिल है। पिछले साल केवल छह मासिक रिपोर्ट तैयार की गई थीं, जो इस प्रथा के बारे में सदस्यों के बीच रुचि की कमी को दर्शाती हैं।'
बहस के लिए एक निश्चित समय-सीमा हो
उन्होंने यह भी कहा कि वार्षिक रिपोर्ट का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों का विश्लेषण करना भी है, लेकिन वास्तव में शांति अभियानों के बारे में बहुत कम जानकारी है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट को पूरा करने, उसे व्यापक महासभा सदस्यों तक पहुंचाने तथा उस पर बहस आयोजित करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वार्षिक रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों पर एक विश्लेषण भी है, जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए प्रमुख दस्तावेज है। हालांकि, वास्तव में हम पाते हैं कि शांति अभियानों को कैसे चलाया जाता है, उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, कुछ निश्चित जनादेश क्यों निर्धारित या बदले जाते हैं या उन्हें कब और क्यों मजबूत किया जाता है इस बारे में बहुत कम जानकारी है।
सुरक्षा परिषद और टीसीसी के बीच साझेदारी की जरूरत
माथुर ने कहा कि चूंकि अधिकतर शांतिरक्षकों का योगदान गैर-परिषद सदस्यों द्वारा किया जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए अपने सैनिकों के जीवन को जोखिम में डालते हैं, इसलिए सुरक्षा परिषद के सभी सदस्य और शांति की रक्षा करने वाले सैनिकों (टीसीसी) के बीच बेहतर साझेदारी की जरूरत है।
भारतीय राजनयिक ने परिषद को सभी सदस्य की ओर से कार्य करने की अपनी चार्टर जिम्मेदारी के अनुरूप लाने की आवश्यकता पर जोर दिया तथा कहा कि इसका एकमात्र उपाय सुरक्षा परिषद का व्यापक सुधार है, जिसमें इसकी स्थायी और गैर-स्थायी श्रेणियों में विस्तार शामिल है। उन्होंने कहा, 'समय आ गया है कि परिषद को सभी सदस्यता की ओर से कार्य करने के लिए उसके चार्टर उत्तरदायित्व के अनुरूप लाया जाए। स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के सदस्यों की संख्या बढ़ाए बिना यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकेगा।'