फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   India’s expectations from COP29: focus on equity, finance, and adaptation News in hindi

COP 29: COP 29 को लेकर भारत ने व्यक्त की अपनी अपेक्षाएं, जलवायु वित्त में पुनर्संतुलन की मांग की

Tue, 12 Nov 2024 08:46 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 12 Nov 2024 08:46 PM IST
सार

COP 29, जो संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) के अंतर्गत होता है, इस वर्ष अजरबैजान की राजधानी में आयोजित हो रहा है, जिसमें भारत समेत 190 से अधिक देशों ने भाग लिया है। 

विज्ञापन
India’s expectations from COP29: focus on equity, finance, and adaptation News in hindi
अजरबैजान की राजधानी बाकू में कॉप 29 के लिए लोगो - फोटो : ANI

विस्तार

COP 29 सम्मेलन में भारत ने विकासशील देशों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी मुख्य अपेक्षाएं व्यक्त की हैं। भारत ने कार्बन बाजार तंत्र (कार्बन मार्केट मैकेनिज्म) में व्यापार के अवरोध के बिना सहयोग और जलवायु वित्त में पुनर्संतुलन की मांग की है। 
विज्ञापन


प्रदूषण रोकने के प्रयासों और जलवायु वित्त में आगे आएं विकसित देश
भारत के सूत्रों ने बताया कि यह समान लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों (सीबीडीआर) के सिद्धांत पर कायम है, जिसमें विकसित देशों को प्रदूषण रोकने के प्रयासों और जलवायु वित्त में आगे आना चाहिए क्योंकि उन्होंने ऐतिहासिक रूप से अधिक प्रदूषण किया है।  COP 29 में भारत की प्राथमिकताएं हैं कि विकासशील देशों के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता मिले, विशेष रूप से अनुकूलन के लिए, और सभी जलवायु वार्ताओं में एक निष्पक्ष और समान दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जाए। 
विज्ञापन


जलवायु वित्त सहायता अनुकूलन के लिए होनी चाहिए
भारत का मुख्य फोकस नई सामूहिक निर्धारित लक्ष्य (एनसीक्यूजी) के अंतर्गत जलवायु वित्त का पुनर्निर्धारण है। एनसीक्यूजी के अंतर्गत अमीर देशों को गरीब देशों में जलवायु परिवर्तन परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग करना अपेक्षित है। भारत लंबे समय से इस बात का समर्थन करता रहा है कि जलवायु वित्त सहायता अनुकूलन के लिए होनी चाहिए, जो गरीब देशों के लिए आसानी से उपलब्ध हो। COP 29 में भारत इस दिशा में संतुलन लाने की उम्मीद रखता है। भारत का मानना है कि COP 29 एक ऐसा अवसर है जहां स्थिर विकास, संतुलित जलवायु कार्रवाई और स्थायित्व निर्माण के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा सके। 
विज्ञापन
विज्ञापन


ऊर्जा परिवर्तन पर भी भारत का फोकस
भारत ने कहा कि कार्बन बाजारों पर चर्चा में व्यापार के अवरोधों को कम करने पर ज़ोर होना चाहिए और कार्बन क्रेडिट प्रणाली को ऐसा होना चाहिए जिससे कम-कार्बन विकास को प्रोत्साहन मिले। COP 29 के पहले दिन, सम्मेलन ने पेरिस समझौते के अंतर्गत अनुच्छेद 6 के नए मानकों को अपनाया, जो वैश्विक कार्बन बाजार का मार्ग प्रशस्त करता है। ऊर्जा परिवर्तन पर भी भारत का फोकस है, और COP 29 से उम्मीद है कि यह ऊर्जा बदलाव को न्यायपूर्ण और विकासशील देशों के लिए उपयुक्त बनाए। भारत चाहता है कि ऊर्जा परिवर्तन में किसी प्रकार का अत्यधिक बोझ न हो और विकासशील देशों के लिए पर्याप्त सहयोग दिया जाए। 


हानि और क्षति वित्तपोषण पर भी भारत ने दिया ध्यान
भारत ने इस सम्मेलन में हानि और क्षति वित्तपोषण पर भी ध्यान दिया है। भारत चाहता है कि विकसित देशों से ठोस वित्तीय प्रतिबद्धता मिले ताकि जलवायु घटनाओं से प्रभावित समुदायों को मदद दी जा सके। COP 29 को भारत एक ऐसा अवसर मानता है जिसमें समानता के सिद्धांतों को बनाए रखते हुए सभी देशों के लिए एक न्यायसंगत और समावेशी समाधान मिल सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed