पहलगाम हमले की पहली बरसी: कैपिटल हिल में भारत लगाएगा प्रदर्शनी, उजागर होगा पाकिस्तान प्रायोजित आतंक का काला सच
वाशिंगटन में भारतीय दूतावास कैपिटल हिल में एक प्रदर्शनी का आयोजन कर रहा है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद के भयावह चेहरे को उजागर करना है। यह पहल पहलगाम आतंकवादी हमले की पहली बरसी पर हो रही है।
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भारत एक बार फिर वैश्विक मंच पर आतंकवाद के मुद्दे को मजबूती से उठाने जा रहा है। अमेरिका की संसद भवन कैपिटल हिल में भारतीय दूतावास मंगलवार को 'द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ टेररिज्म' शीर्षक से एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन करेगा। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की सच्चाई को दुनिया के सामने लाना है।
पहलगाम हमले की पहली बरसी पर विशेष आयोजन
इस कार्यक्रम का उद्घाटन अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा करेंगे। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान खुद को अमेरिका-ईरान संघर्ष में शांति दूत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। यह प्रदर्शनी विशेष रूप से पहलगाम आतंकवादी हमले की पहली बरसी के अवसर पर आयोजित की जा रही है, जो ऑपरेशन सिंदूर के रूप में समाप्त हुआ था।
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संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने उठाया था मुद्दा
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठाया है। पिछले साल जुलाई में, जब पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष था, भारत ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भी इसी तरह की एक प्रदर्शनी आयोजित की थी। इसका उद्देश्य वैश्विक समुदाय का ध्यान इस गंभीर मुद्दे पर केंद्रित करना था।
डिजिटल प्रदर्शनी में शामिल होंगे महत्वपूर्ण हमले
यह डिजिटल प्रदर्शनी दुनिया भर में हुए भयावह आतंकवादी हमलों की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रदर्शित करेगी। इसमें 1993 के मुंबई बम धमाके, 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले और हाल ही में हुए पहलगाम आतंकवादी हमला जैसे दिल दहला देने वाले कृत्य शामिल होंगे। प्रदर्शनी में प्रत्येक हमले को अंजाम देने वाले आतंकवादी संगठनों के नामों का भी उल्लेख किया जाएगा, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा जैसे कई पाकिस्तान-आधारित व्यक्ति और संगठन शामिल हैं।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की पहली बरसी है। इस हमले में पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों ने बैसरन घाटी में पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की मौत हो गई थी। यह हमला भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद की एक और भयावह मिसाल बनकर सामने आया था।
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