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खुशखबरी और चेतावनी: यूएन बोला- 2022 में 6.5 फीसदी की दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था, आर्थिक गतिविधियों पर दो बड़े खतरे भी
Thu, 13 Jan 2022 10:22 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 13 Jan 2022 10:22 PM IST
सार
यूएन ने कहा कि भारत में टीकाकरण अभियान में तेजी का ही असर है कि देश की अर्थव्यवस्था अब मजबूत पथ पर दिख रही है।
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संयुक्त राष्ट्र
- फोटो : Social Media
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने भारत के कोरोना टीकाकरण कार्यक्रम की तारीफ की है। यूएन ने कहा कि भारत में टीकाकरण अभियान में तेजी का ही असर है कि देश की अर्थव्यवस्था अब मजबूत पथ पर दिख रही है। इसी के साथ वित्त वर्ष 2022 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 6.5 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान जताया गया है।
हालांकि, यूएन ने भारत के आर्थिक विकास पर अचानक रुकावट पैदा होने की चेतावनी भी दी है। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से कहा गया कि आने वाले कुछ समय में ही कोयले की कमी और तेल के ऊंचे दामों की वजह से भारत की आर्थिक गतिविधियों पर ब्रेक लग सकता है।
गौरतलब है कि वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2020-21 में यूएन ने भारत के जीडीपी विकास दर के 8.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया था। यानी नया अनुमान पहले के मुकाबले गिरावट को दर्शाता है। यूएन की इस रिपोर्ट में भारत की वृद्धि को आने वाले वित्त वर्ष 2022-23 में और भी गिरकर 5.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है।
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अगर कैलेंडर ईयर के हिसाब से देखा जाए तो 2022 में भारत की जीडीपी के 6.7 फीसदी दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि साल 2021 में यह नौ फीसदी की दर से बढ़ी थी। इसकी वजह यह है कि कोरोना की पहली लहर के दौरान, जीडीपी में जो गिरावट आई थी, उसका प्रभाव अब खत्म हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया, "टीकाकरण की तेज रफ्तार और अनुकूल राजकोषीय और मौद्रिक रुख के बीच भारत की आर्थिक रिकवरी मजबूर राह पर है।’
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में तेल के ऊंचे दाम और कोयले की किल्लत से भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पर विराम लगने की आशंका भी जताई गई है। निजी निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए यह काफी अहम होगा।
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हालांकि, यूएन ने भारत के आर्थिक विकास पर अचानक रुकावट पैदा होने की चेतावनी भी दी है। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से कहा गया कि आने वाले कुछ समय में ही कोयले की कमी और तेल के ऊंचे दामों की वजह से भारत की आर्थिक गतिविधियों पर ब्रेक लग सकता है।
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गौरतलब है कि वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2020-21 में यूएन ने भारत के जीडीपी विकास दर के 8.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया था। यानी नया अनुमान पहले के मुकाबले गिरावट को दर्शाता है। यूएन की इस रिपोर्ट में भारत की वृद्धि को आने वाले वित्त वर्ष 2022-23 में और भी गिरकर 5.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है।
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अगर कैलेंडर ईयर के हिसाब से देखा जाए तो 2022 में भारत की जीडीपी के 6.7 फीसदी दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि साल 2021 में यह नौ फीसदी की दर से बढ़ी थी। इसकी वजह यह है कि कोरोना की पहली लहर के दौरान, जीडीपी में जो गिरावट आई थी, उसका प्रभाव अब खत्म हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया, "टीकाकरण की तेज रफ्तार और अनुकूल राजकोषीय और मौद्रिक रुख के बीच भारत की आर्थिक रिकवरी मजबूर राह पर है।’
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में तेल के ऊंचे दाम और कोयले की किल्लत से भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पर विराम लगने की आशंका भी जताई गई है। निजी निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए यह काफी अहम होगा।