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चीन का बड़ा बयान: 'हमारे साझा हित मतभेदों से ज्यादा अहम, भारत के साथ संबंध सुधार-विकास के सही रास्ते पर
Fri, 27 Mar 2026 08:53 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 27 Mar 2026 08:53 AM IST
सार
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि भारत और चीन के संबंध अब सुधार और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि दोनों देशों के साझा हित मतभेदों से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं और दोनों को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि साझेदार के रूप में काम करना चाहिए।
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चीन के विदेश मंत्री वांग यी।
- फोटो : ANI
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विस्तार
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि भारत और चीन के संबंध अब सुधार और विकास के सही रास्ते पर हैं। उन्होंने जोर दिया कि दोनों देशों के बीच आपसी मतभेदों से ज्यादा उनके साझा हित महत्वपूर्ण हैं। वांग यी ने यह बात भारत के निवर्तमान भारतीय राजदूत प्रदीप रावत से विदाई मुलाकात के दौरान कही।
उन्होंने आगे कहा, दोनों देशों के नेताओं के मार्गदर्शन में रिश्ते बेहतर हो रहे हैं। चीन भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। वांग यी के अनुसार, दोनों देशों को एक-दूसरे को खतरे के बजाय विकास के अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें एक-दूसरे का प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि साझेदार बनना चाहिए।
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चीनी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि जब तक भारत और चीन के रिश्तों में नई ताजगी नहीं आएगी, तब तक दुनिया का आधुनिकीकरण पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने राजदूत प्रदीप रावत के काम और उनके योगदान की सराहना भी की।
बता दें कि साल 2020 में लद्दाख की गलवां घाटी में हुए सैन्य तनाव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई थी। करीब पांच साल तक संबंध खराब रहने के बाद, साल 2024 में रूस के कजान में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई। पिछले कुछ महीनों से दोनों देश अपने रिश्तों को फिर से सामान्य और स्थिर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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उन्होंने आगे कहा, दोनों देशों के नेताओं के मार्गदर्शन में रिश्ते बेहतर हो रहे हैं। चीन भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। वांग यी के अनुसार, दोनों देशों को एक-दूसरे को खतरे के बजाय विकास के अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें एक-दूसरे का प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि साझेदार बनना चाहिए।
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चीनी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि जब तक भारत और चीन के रिश्तों में नई ताजगी नहीं आएगी, तब तक दुनिया का आधुनिकीकरण पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने राजदूत प्रदीप रावत के काम और उनके योगदान की सराहना भी की।
बता दें कि साल 2020 में लद्दाख की गलवां घाटी में हुए सैन्य तनाव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई थी। करीब पांच साल तक संबंध खराब रहने के बाद, साल 2024 में रूस के कजान में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई। पिछले कुछ महीनों से दोनों देश अपने रिश्तों को फिर से सामान्य और स्थिर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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