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बांग्लादेश की दोहरी चाल: भारत को बताया सहयोगी, लेकिन जिहादियों के खौफ में रोक दिया श्रीराम मूर्ति का काम
Sat, 13 Jun 2026 09:32 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, ढाका।
एएनआई, ढाका।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 13 Jun 2026 09:32 PM IST
सार
बांग्लादेश सरकार एक तरफ भारत को अहम क्षेत्रीय साझेदार बताकर रिश्ते सुधारने की बात कर रही है। वहीं दूसरी तरफ गाइबांधा जिले में कट्टरपंथियों की धमकी के बाद प्रभु श्रीराम की मूर्ति के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। इस फैसले से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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हुमायूं कबीर, बांग्लादेशी पीएम के सलाहकार
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते इस समय एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर हैं। एक तरफ दोनों देशों के बीच दोस्ती बढ़ाने की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ विवाद भी सामने आ रहे हैं। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भारत को एक बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्रीय भागीदार बताया है। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि भूगोल की वास्तविकताओं को बदला नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत हमारा पड़ोसी है। न तो उन्होंने हमें चुना और न ही हमने उन्हें चुना, लेकिन हम पड़ोसी हैं। हमें एक साथ रहना होगा और मिलकर काम करना होगा।
श्रीराम मूर्ति विवाद: सरकार पर कट्टरपंथियों का दबाव
एक तरफ जहां सरकार भारत से रिश्ते सुधारने का दावा कर रही है, वहीं बांग्लादेश के भीतर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला में स्थित श्रीश्री राधा गोविंद एवं काली मंदिर परिसर में प्रभु श्रीराम की दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति का निर्माण किया जा रहा था। लेकिन तारिक रहमान सरकार ने इस निर्माण कार्य पर अचानक रोक लगा दी है। 'इंसाफ कायमकारी छात्र श्रमिक जनता संगठन' से जुड़े एक कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक ने इस मूर्ति को तोड़ने की खुली धमकी दी थी। स्थानीय जिहादी समूहों के इस भारी दबाव और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर से प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
यह भी पढ़ें: दबाव में झुका बांग्लादेश?: भगवान राम की विशाल प्रतिमा परियोजना पर लगाई रोक, धार्मिक स्वतंत्रता पर उठे सवाल
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मानवाधिकार संगठनों की बढ़ती चिंता
इस मूर्ति निर्माण को रोके जाने के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक संगठनों ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। एक बांग्लादेशी अखबार के संपादक सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने सोशल मीडिया पर इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार कट्टरपंथियों के दबाव के आगे झुक गई है। जानकारों का मानना है कि एक तरफ भारत से दोस्ती का हाथ बढ़ाना और दूसरी तरफ हिंदुओं के धार्मिक निर्माण को रोकना, नई सरकार की दोहरी नीति को दिखाता है।
व्यापार और जन-संबंध
इन विवादों के बीच हुमायूं कबीर ने व्यापार और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में निष्पक्ष साझेदारी पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बीते 15 साल में बांग्लादेश और भारत के आम लोगों के बीच सीधा संपर्क टूट गया था। तब कूटनीतिक संबंध केवल शेख हसीना तक सीमित थे। कबीर ने दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने के लिए अकादमिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और व्यापारिक स्तर पर बातचीत बढ़ाने की वकालत की।
बांग्लादेश सरकार एक तरफ भारत को अहम क्षेत्रीय साझेदार बताकर रिश्ते सुधारने की बात कर रही है। वहीं दूसरी तरफ गाइबांधा जिले में कट्टरपंथियों की धमकी के बाद प्रभु श्रीराम की मूर्ति के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। इस फैसले से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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श्रीराम मूर्ति विवाद: सरकार पर कट्टरपंथियों का दबाव
एक तरफ जहां सरकार भारत से रिश्ते सुधारने का दावा कर रही है, वहीं बांग्लादेश के भीतर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला में स्थित श्रीश्री राधा गोविंद एवं काली मंदिर परिसर में प्रभु श्रीराम की दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति का निर्माण किया जा रहा था। लेकिन तारिक रहमान सरकार ने इस निर्माण कार्य पर अचानक रोक लगा दी है। 'इंसाफ कायमकारी छात्र श्रमिक जनता संगठन' से जुड़े एक कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक ने इस मूर्ति को तोड़ने की खुली धमकी दी थी। स्थानीय जिहादी समूहों के इस भारी दबाव और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर से प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
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मानवाधिकार संगठनों की बढ़ती चिंता
इस मूर्ति निर्माण को रोके जाने के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक संगठनों ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। एक बांग्लादेशी अखबार के संपादक सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने सोशल मीडिया पर इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार कट्टरपंथियों के दबाव के आगे झुक गई है। जानकारों का मानना है कि एक तरफ भारत से दोस्ती का हाथ बढ़ाना और दूसरी तरफ हिंदुओं के धार्मिक निर्माण को रोकना, नई सरकार की दोहरी नीति को दिखाता है।
व्यापार और जन-संबंध
इन विवादों के बीच हुमायूं कबीर ने व्यापार और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में निष्पक्ष साझेदारी पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बीते 15 साल में बांग्लादेश और भारत के आम लोगों के बीच सीधा संपर्क टूट गया था। तब कूटनीतिक संबंध केवल शेख हसीना तक सीमित थे। कबीर ने दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने के लिए अकादमिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और व्यापारिक स्तर पर बातचीत बढ़ाने की वकालत की।
बांग्लादेश सरकार एक तरफ भारत को अहम क्षेत्रीय साझेदार बताकर रिश्ते सुधारने की बात कर रही है। वहीं दूसरी तरफ गाइबांधा जिले में कट्टरपंथियों की धमकी के बाद प्रभु श्रीराम की मूर्ति के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। इस फैसले से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।