LAC Row: आपसी मतभेद दूर करने के लिए भारत और चीन ने की कूटनीतिक वार्ता, सीमा पर शांति कायम रखने का लिया फैसला
भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) गौरांगलाल दास ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने सरकारों के बीच हुए द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त रूप से शांति बनाए रखने का फैसला किया।
विस्तार
भारत-चीन सीमा विवाद दूर करने के लिए परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) बनाया गया है। इसकी 31वीं बैठक बीजिंग में हुई। इसमें भारत-चीन सीमा के पश्चिमी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने मंथन किया। साथ ही भारत-चीन के बीच सीमा विवाद दूर करने और लंबित मुद्दों का शीघ्र समाधान खोजने के लिए स्पष्ट, रचनात्मक और दूरदर्शी' विचारों का आदान-प्रदान किया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि शांति-स्थिरता की बहाली और एलएसी के लिए सम्मान द्विपक्षीय संबंधों की सामान्य स्थिति की बहाली के लिए आवश्यक है। इस दौरान जुलाई में अस्ताना और वियनतियाने में दो विदेश मंत्रियों की बैठकों द्वारा दिए गए मार्गदर्शन के मुताबिक पिछले महीने हुई बैठक के फैसलों की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने विचारों का एक स्पष्ट, रचनात्मक और दूरदर्शी आदान-प्रदान किया। दोनों देश राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से गहन संपर्क कायम रखने के लिए सहमत हुए।
भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) गौरांगलाल दास ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीनी विदेश मंत्रालय के सीमा और महासागर मामलों के विभाग के महानिदेशक होंग लियांग ने किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने सरकारों के बीच हुए द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त रूप से शांति बनाए रखने का फैसला किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने चीनी विदेश मंत्रालय में उप मंत्री से भी मुलाकात की।
विदेश मंत्री जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 25 जुलाई को आसियान से संबंधित बैठकों के दौरान वियनतियाने में वार्ता की थी। वार्ता में दोनों मंत्रियों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गतिरोध वाले शेष वाले स्थानों से यथाशीघ्र सैनिकों की पूर्ण वापसी के लिए उद्देश्यपूर्ण और तत्परता से काम करने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की थी।
इससे पहले जयशंकर और वांग यी ने चार जुलाई को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान अस्ताना में भी द्विपक्षीय बैठक की थी। भारत और चीन की सेनाओं के बीच मई 2020 से गतिरोध जारी है तथा सीमा विवाद का पूर्ण समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। हालांकि दोनों पक्ष टकराव वाले कई स्थानों से पीछे हट गए हैं।
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