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OECD की रिपोर्ट: वैश्विक मंदी के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने पकड़ी तेजी, चीन सहित कई बड़े देश छूटे पीछे
Tue, 22 Nov 2022 10:37 PM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 22 Nov 2022 10:37 PM IST
सार
वित्त वर्ष 2023-24 में देश में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि धीमी होकर 5.7 प्रतिशत हो जाएगी, इसके बावजूद चीन और सऊदी अरब सहित कई अन्य जी20 अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक रहेगी।
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भारतीय अर्थव्यवस्था
- फोटो : pixabay
विस्तार
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) ने कहा है कि इस वित्तीय वर्ष में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ भारत एशिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण बड़े पैमाने पर ऊर्जा के झटके से उत्पन्न वैश्विक मंदी के बीच भारत का प्रदर्शन बेहतर है। ओईसीडी पेरिस स्थित अंतरसरकारी निकाय है जो अपने नवीनतम आर्थिक आउटलुक में आर्थिक नीति रिपोर्टों पर ध्यान केंद्रित करता है। इसने कहा कि वैश्विक मांग में गिरावट और मुद्रास्फीति के दबावों को प्रबंधित करने के लिए मौद्रिक नीति को कड़ा करने के बावजूद भारत वित्त वर्ष 2022-23 में जी20 में सऊदी अरब के बाद दूसरी सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है।
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2023-24 में देश में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि 5.7 प्रतिशत रहेगी
वित्त वर्ष 2023-24 में देश में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि धीमी होकर 5.7 प्रतिशत हो जाएगी क्योंकि निर्यात और घरेलू मांग में वृद्धि मध्यम है, लेकिन इसका मतलब यह होगा कि यह अभी भी चीन और सऊदी अरब सहित कई अन्य जी20 अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक होगी। रिपोर्ट में कहा गया है, वित्त वर्ष 2022-23 में 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने के बाद आने वाली तिमाहियों में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 7 प्रतिशत पर वापस आने से पहले वित्त वर्ष 2023-24 में 5.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। 2023 में विकास प्रमुख एशियाई उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं पर मजबूती से निर्भर होगा, जो अगले साल वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि के करीब तीन-चौथाई के लिए जिम्मेदार होगा, जबकि अमेरिका और यूरोप में तेजी से गिरावट आई है।
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2023 में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में केवल 2.2 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान
सीपीआई मुद्रास्फीति 2023 की शुरुआत तक कम से कम 6 प्रतिशत की केंद्रीय बैंक की ऊपरी सीमा लक्ष्य से ऊपर रहेगी और फिर धीरे-धीरे कम हो जाएगी क्योंकि उच्च ब्याज दरें प्रभावी होंगी। इसमें कहा गया है कि सार्वजनिक खर्च की दक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता में सुधार, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए अधिक संसाधनों को समर्पित करने और लचीलेपन को बढ़ाने के लिए राजकोषीय स्थिति का निर्माण करने के लिए अभी भी काफी मार्जिन बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर ओईसीडी कहता है कि यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी से बचती है, तो यह एशिया की कुछ सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं जैसे भारत के लिए बेहद फायदेमंद होगा। इस वर्ष वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 3.1 प्रतिशत और 2023 में केवल 2.2 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
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