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Sri Lanka Crisis: आर्थिक संकट से घिरे श्रीलंका की संसद में उठा अदाणी का नाम, जानें क्या है वजह

Thu, 09 Jun 2022 10:37 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 09 Jun 2022 10:37 PM IST
सार

श्रीलंका की संसद में गुरुवार को विद्युत संशोधन विधेयक को लेकर चर्चा हो रही थी। इसी पर बहस के दौरान विपक्ष ने अदाणी ग्रुप का नाम लेते हुए बिल का विरोध किया। 

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श्रीलंका की संसद। - फोटो : Social Media

विस्तार

श्रीलंका की संसद में गुरुवार को भारत के उद्योगपति गौतम अदाणी का नाम चर्चा में रहा। दरअसल, यहां सांसद विद्युत संशोधन विधेयक को लेकर चर्चा कर रहे थे। इसे लेकर ही विपक्षी दल लगातार सरकार का विरोध कर रहे थे। विपक्ष ने आरोप लगाया कि अदाणी समूह के सहयोग के साथ उत्तरी तट पर 500 मेगावॉट का पवन बिजली संयंत्र लगाने के लिए सरकार के स्तर पर करार 1989 के कानून में संशोधन की प्रमुख वजह है।
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श्रीलंका की संसद में कुल 225 सदस्य हैं। हालांकि, बिजली विधेयक पर संशोधन के पक्ष में 120 वोट पड़े। और विरोध में महज 36 वोट पड़े। 13 सांसदों ने वोटिंग में भाग नहीं लिया। इस विधेयक का सार्वजनिक क्षेत्र की सिलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (सीईबी) के व्यापार संगठनों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है। सीईबी के इंजीनियरों ने चेतावनी दी है कि अगर ये संशोधन कानून में बदलते हैं तो वे हड़ताल पर चले जाएंगे।
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इस बीच श्रीलंका के चुनाव आयोग के अध्यक्ष निमल जी पुंचिहेवा ने कहा है कि जब तक देश में आर्थिक संकट खत्म नहीं होता तब तक चुनाव नहीं किया जा सकता। श्रीलंका के मौजूदा हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर अभी चुनाव रख लिए गए तो यह उसी सूरत में स्वतंत्र और निष्पक्ष हो सकते हैं अगर इसका समर्थन करने के लिए माहौल उस तरह का हो। 
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पुंचिहेवा ने कहा कि आयोग के पास अभी केवल पांच अरब रुपये हैं, लेकिन यह राशि दो से तीन गुना बढ़ने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि धन कोई मुद्दा नहीं है, लेकिन सवाल है कि क्या गैस और केरोसीन के लिए कतार में खड़े लोग अपने विवेक के अनुसार निर्णय ले सकते हैं। पुंचिहेवा ने कहा कि इसलिए आर्थिक संकट दूर होने के बाद श्रीलंका में चुनाव कराया जा सकता है।


गौरतलब है कि आर्थिक संकट के कारण श्रीलंका में भोजन, दवा, रसोई गैस, ईंधन, टॉयलेट पेपर और माचिस जैसी आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी हो गई है। श्रीलंका के लोगों को ईंधन और रसोई गैस खरीदने के लिए दुकानों के बाहर घंटों इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
 
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