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यूएनएससी की चर्चा में भारत ने कहा: मानवीयता के राजनीतिकरण का बढ़ता चलन दुर्भाग्यपूर्ण
Sat, 13 Mar 2021 04:47 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र
एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 13 Mar 2021 04:47 AM IST
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भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति
- फोटो : ANI
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विश्व निकाय में भारत ने कहा है कि मानवीय हालात के राजनीतिकरण का बढ़ता चलन दुर्भाग्यपूर्ण है। देशों को चाहिए कि वे विकास संबंधी मदद को राजनीतिक प्रक्रिया में प्रगति से जोड़ने का विरोध करें ताकि इससे संघर्ष वाले हालात में खाद्य असुरक्षा न बढ़ पाए।
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संयुक्त राष्ट्र में तिरुमूर्ति ने कहा, इससे बढ़ सकती है खाद्य असुरक्षा
‘संघर्ष और खाद्य सुरक्षा’ विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की खुली चर्चा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि यह बेहद जरूरी है कि दानदाता समुदाय संघर्ष से प्रभावित देशों में मदद बढ़ाएं और सुनिश्चित करें कि लोगों की मूलभूत जरूरतों का राजनीतिकरण किए बिना मानवीय एजेंसियों को आवश्यक धन उपलब्ध कराएं। इससे वे अपनी योजनाओं का पूरी तरह क्रियान्वयन कर सकेंगे।
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तिरुमूर्ति ने कहा, सभी मानवीय कार्रवाई प्राथमिक तौर पर मानवता, निष्पक्षता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों से प्रेरित होनी चाहिए लेकिन दुर्भाग्य से हम मानवीय हालात के राजनीतिकरण के बढ़ते चलन को देख रहे हैं। दानदाताओं के इस रूख से संघर्ष के हालात में खाद्य असुरक्षा ही बढ़ेगी।
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द्विपक्षीय मुद्दों का विश्व मंचों उठाना वार्ता की संभावनाएं कम करता है
भारत ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था शांति और स्थिरता संबंधी कई चुनौतियों का सामना कर रही है और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मंचों पर ऐसे मामले लाए जा रहे हैं जो पूरी तरह से द्विपक्षीय हैं। इससे सीधी और आपसी बातचीत की संभावना कमजोर होती है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी उपप्रतिनिधि के नागराज नायडू ने यूएनएससी में कहा कि कुछ देशों की संकीर्ण नीतियों के चलते कई क्षेत्रों में संकट बढ़ गया है।