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Hindi News ›   World ›   In Pakistan Opposition will come on a platform against Imran Khans government after Eid al Adha

बकरीद के बाद पाकिस्तान में इमरान सरकार के खिलाफ एक मंच पर आएगा विपक्ष

Wed, 22 Jul 2020 02:54 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 22 Jul 2020 02:54 AM IST
सार

  • सर्वदलीय सम्मेलन में बनेगी इमरान सरकार के खिलाफ मजबूत गोलबंदी की रणनीति
  • लाहौर में हुई पीपीपी और पीएमएल (एन) की अहम बैठक, कई और दल भी साथ आए 

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In Pakistan Opposition will come on a platform against Imran Khans government after Eid al Adha
इमरान खान (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

पाकिस्तान में इमरान खान सरकार के खिलाफ सियासी गोलबंदी तेज हो रही है। तमाम विपक्षी पार्टियों ने तय किया है कि ईद-उल-अजहा (बकरीद) के बाद वो एक बड़ा सम्मेलन करेंगी और मिलकर सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ जंग तेज करने की रणनीति बनाएंगी। फिलहाल इसकी पहल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) ने मिलकर की है।

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सोमवार को लाहौर में पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी और उनकी पार्टी के कुछ नेताओं के साथ नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल (एन) के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मिला और आगे की रणनीति तय की।
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बैठक में बिलावल भुट्टो के अलावा पीपीपी की तरफ से कमर जमान कायरा, राजा परवेज अशरफ, चौधरी मंजूर और सैयद हसन मुर्तजा भी मौजूद थे। पीएमएल (एन) की तरफ से बैठक में शामिल होने वाले नेताओं में अहसान इकबाल, ख्वाजा साद रफीक और अयाज सादिक थे।
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बैठक में दोनों पार्टियों ने एक ज्वाइंट एक्शन कमेटी बनाने का फैसला किया है। इन दोनों बड़ी विपक्षी पार्टियों के अलावा इस कमेटी में एएनपी और बलूचिस्तान की नेशनल पार्टी के नेताओं को भी शामिल किया गया है।

बकरीद के बाद होने वाली इस सर्वदलीय बैठक में कोरोना वायरस को रोकने और इसके खिलाफ जंग में इमरान सरकार की नाकामी, देश के आर्थिक हालत, बेतहाशा महंगाई और चीनी, आटा और दवाइयों की कालाबाजारी और घोटाले जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाएंगे और इमरान सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जाएगी।


बैठक के बाद पीएमएल (एन) और पीपीपी के नेताओं ने बताया कि इस सरकार के रहते पाकिस्तान को भीतरी और बाहरी ताकतों से जबरदस्त खतरा है और देश की अर्थव्यवस्था को इस सरकार ने जिस तरह डुबाया है, उससे 21वीं सदी में किसी भी सरकार के लिए संभालना मुश्किल है। ऐसे में देश में सत्ता परिवर्तन की सख्त जरूरत है और देशहित में इसके लिए सभी विपक्षी पार्टियों को एक होना ही पड़ेगा।

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