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अमेरिका में हेल्थ केयर की पोल खुली, कोरोना महामारी से जीवन प्रत्याशा में भारी गिरावट

Thu, 24 Jun 2021 03:12 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 24 Jun 2021 03:12 PM IST
सार

दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका में जीवन प्रत्याशा लगातार बढ़ रही थी। हालांकि 1990 के दशक में आकर वृद्धि दर बहुत कम रह गई। जबकि दूसरे विकसित देशों में यह अधिक तेज गति से बढ़ती रही। 2010 के बाद से इन दोनों के बीच फर्क काफी बढ़ गया...

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In 2020 the average life expectancy in the US declined drastically due to coronavirus
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन - फोटो : ANI (File)

विस्तार

साल 2020 में अमेरिका में औसत जीवन प्रत्याशा में भारी गिरावट आई। इससे दूसरे विकसित देशों और अमेरिका की औसत जीवन प्रत्याशा दर में अंतर और चौड़ा हो गया है। जीवन प्रत्याशा (लाइफ एक्सपेटेंसी) का मतलब किसी समाज में लोगों के जीने की औसत उम्र से होता है। अमेरिका में ब्लैक और हिस्पैनिक (स्पेनी भाषी) समुदायों की औसत जीवन प्रत्याशा में श्वेत समुदाय के लोगों की तुलना में ज्यादा गिरावट आई है।

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टीवी चैनल एनबीसी की वेबसाइट पर छपी एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक ये अंदेशा तो था कि कोरोना महामारी के कारण जीवन प्रत्याशा में गिरावट आएगी, लेकिन ये गिरावट इतनी ज्यादा होगी, इसका अनुमान नहीं था। ये अध्ययन वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑन सोसायटी हेल्थ ने किया है। इस सेंटर के निदेशक स्टीवन वूल्फ ने एनबीसी से कहा- ‘मैंने अपने भोलेपन में सोचा था कि महामारी से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। मेरी समझ यह थी कि महामारी पूरी दुनिया में आई है, इसलिए सब जगह जीवन प्रत्याशा प्रभावित होगी। तब मैं यह अनुमान नहीं लगा पाया कि अमेरिका में महामारी से कितने खराब ढंग से निपटा गया है।’
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नए अध्ययन में अमेरिका सरकार के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन और ह्यमून मोर्टालिटी डेटाबेस (मानव मृत्यु आंकड़ाकोष) के आंकड़ों को आधार बनाया गया। इसमें 2018 से 2020 के बीच जीवन प्रत्याशा दर में आए बदलावों का अध्ययन किया गया। ब्लैक, हिस्पैनिक और श्वेत समुदायों के आंकड़ों पर अलग-अलग गौर किया गया। लेकिन सेंटर को एशियाई, प्रशांत क्षेत्र से आकर अमेरिका में बसे समुदाय, भारतीय मूल के समुदाय और अलास्का राज्य के मूलवासी समुदायों के आंकड़े अलग से हासिल नहीं हो सके। अध्ययन के नतीजे बुधवार को जारी किए गए।
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अध्ययन से सामने आया कि 2018 की तुलना में 2020 में जन्म के समय औसत जीवन प्रत्याशा 1.9 वर्ष कम थी। 16 विकसित देशों के साथ अमेरिका में आए बदलाव की तुलना की गई, तो जाहिर हुआ कि अमेरिका में गिरावट साढ़े आठ गुना ज्यादा आई है। इससे अमेरिका के समान प्रति व्यक्ति औसत आमदनी वाले देशों से अमेरिका की औसत जीवन प्रत्याशा पांच साल कम हो गई है।

अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक श्वेत अमेरिकियों की जीवन प्रत्याशा में 1.4 वर्ष की गिरावट आई है। जबकि हिस्पैनिक समुदाय में ये गिरावट 3.9 वर्ष और ब्लैक समुदाय में 3.25 वर्ष है। वूल्फ ने कहा- ‘ये संख्याएं भयानक हैं। दूसरे विश्व युद्ध के बाद से हमने ऐसी गिरावट कभी नहीं देखी थी।’ गौरतलब है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका में जीवन प्रत्याशा लगातार बढ़ रही थी। हालांकि 1990 के दशक में आकर वृद्धि दर बहुत कम रह गई। जबकि दूसरे विकसित देशों में यह अधिक तेज गति से बढ़ती रही। 2010 के बाद से इन दोनों के बीच फर्क काफी बढ़ गया।


स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि जीवन प्रत्याशा दीर्घकालिक रूप से किसी देश में स्वास्थ्य की स्थिति को समझने का बेहतर पैमाना है। वूल्फ ने कहा कि ताजा गिरावट सिर्फ यह नहीं बताती कि अब जन्म के समय किसी बच्चे के कितने साल तक जीवित रहने की उम्मीद होगी। बल्कि यह बताती है कि अमेरिका में 2020 में मृत्यु दर कितनी ऊंची रही। कैलिफॉर्निया स्थित गैर-सरकारी संस्था सेंटर फॉर हेल्थ इक्विटी की निदेशक पाउला ब्रेवमैन के अनुसार ये आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में स्वास्थ्य देखभाल की खराब व्यवस्था कितनी बड़ी समस्या है।

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