Imran Khan vs Pak Army: ...तो अब इमरान के खिलाफ पाकिस्तान के एस्टेब्लिशमेंट ने संभाला मोर्चा?
Imran Khan vs Pak Army: एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में इमरान खान ने स्वीकार किया कि उन्होंने जनरल बाजवा को सेवा विस्तार देने की पेशकश उस समय की थी, जब विपक्ष उनकी सरकार को गिराने की ‘साजिश’ रच रहा था। लेकिन खान ने कहा कि वे देश हित मे अपनी सरकार बचाना चाहते थे...
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पाकिस्तान में उथल-पुथल की बढ़ती गहराती आशंकाओं के बीच कुछ अजीबो-गरीब घटनाएं हो रही हैं। ऐसी एक घटना गुरुवार को हुई, जब पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के महानिदेशक ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर निशाना साधने के लिए प्रेस कांफ्रेंस की। विशेषज्ञों ने कहा है कि पाकिस्तान के इतिहास में ये पहला मौका है, जब आईएसआई किसी राजनीतिक मसले को लेकर पत्रकारों के सामने आई हो।
अखबारी टिप्पणियों में ध्यान दिलाया गया है कि अपनी नियुक्ति के बाद से आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम प्रचार से दूर रहे हैं। यहां तक कि इस पद पर आने के बाद कभी उनका कोई फोटो या वीडियो सार्वजनिक नहीं हुआ। लेकिन गुरुवार को एक असाधारण घटनाक्रम में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करने वाले वे आईएसआई के पहले महानिदेशक बन गए।
विश्लेषकों के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल नदीम के सामने आकर अपनी बात कहने की पृष्ठभूमि पत्रकार अरशद शरीफ की हत्या और इमरान खान के लाहौर से इस्लामाबाद तक आयोजित लॉन्ग मार्च से बनी। अरशद शरीफ की हत्या के मामले में देश में कयासों का बाजार गर्म है और यह संदेह भी जताया गया है कि उनकी केन्या में हुई हत्या के पीछे पाकिस्तान की एजेंसियों का हाथ है। इन मुद्दों पर अपनी बात कहने के अलावा लगे हाथ ले.ज. नदीम ने बीते अप्रैल में इमरान खान की सरकार गिराने के लिए अमेरिका से आए कथित संदेश के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी।
विश्लेषकों के मुताबिक आईएसआई प्रमुख की प्रेस वार्ता में मुख्य निशाना इमरान खान रहे। उन्होंने ऐसी बातें कहीं, जिनसे खान की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने खुलासा किया कि प्रधानमंत्री रहते हुए इमरान खान ने सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा का कार्यकाल अनिश्चित काल समय तक बढ़ाने की पेशकश रखी थी, जिसे जनरल बाजवा ने ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि इमरान खान दिन के उजाले में सेना नेतृत्व के खिलाफ बोलते हैं, जबकि रात के अंधेरे में सेनाध्यक्ष से मिलने की कोशिश करते हैँ। ले.ज. नदीम ने कहा कि इमरान खान की नाराजगी कुल मिला कर यह है कि जनरल बाजवा ने उनकी सरकार बचाने के लिए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
इस प्रेस कांफ्रेंस के बाद एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में इमरान खान ने स्वीकार किया कि उन्होंने जनरल बाजवा को सेवा विस्तार देने की पेशकश उस समय की थी, जब विपक्ष उनकी सरकार को गिराने की ‘साजिश’ रच रहा था। लेकिन खान ने कहा कि वे देश हित मे अपनी सरकार बचाना चाहते थे। उन्होंने कहा- ‘मैंने बार-बार जनरल बाजवा से कहा कि अगर मेरी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया, तो उसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर होगा और फिर कोई इसे रसातल में जाने से रोक नहीं पाएगा।’
पर्यवेक्षकों के मुताबिक इमरान खान के समर्थकों की तरफ से लगातार हो रही आलोचना से ‘एस्टेब्लिशमेंट’ यानी सेना और खुफिया तंत्र का नेतृत्व काफी समय से परेशान है। इसीलिए अब उसने खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के खिलाफ सीधे मोर्चा संभालने का फैसला किया है। सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन इसलिए किया गया, ताकि ‘तथ्य, कहानी और विचार’ का फर्क सबके सामने रखा जा सके।
विश्लेषकों ने कहा है कि ये पूरा घटनाक्रम पाकिस्तान में अफरा-तफरी की लगातार संगीन हो रही हालत का संकेत है। देश का संकट रोज अधिक गहरा होता जा रहा है।