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Pakistan: 27 साल पुरानी PTI पर प्रतिबंध की तलवार; 9 मई के प्रदर्शन के बाद 60 नेताओं ने छोड़ा इमरान का साथ

Sun, 28 May 2023 04:16 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 28 May 2023 04:16 PM IST
सार

25 अप्रैल, 1996 को लाहौर में इमरान खान द्वारा स्थापित की गई पार्टी से कई नेताओं ने हालिया घटनाओं के बाद किनारा कर लिया है। इनमें इमरान के करीबी पूर्व मंत्री असद उमर, शिरीन मजारी, फवाद चौधरी और फिरदौस आशिक अवान का नाम भी शामिल है।

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Imran Khan party faces most difficult phase in its 27 yrs of existence after May 9 incidents
इमरान खान, इस्लामाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तान इन दिनों गंभीर आर्थिक और राजनैतिक संकटों का सामना कर रहा है। एक ओर जहां उसके दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है वहीं, दूसरी ओर इमरान खान को लेकर गहराया वर्तमान राजनैतिक संकट भी भयावह होता जा रहा है। इस बीच सामने आया है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर में है। हाल ही में संकेत मिले थे कि पाकिस्तान की गठबंधन सरकार 27 साल पुरानी पार्टी पर प्रतिबंध लगा सकती है। 

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पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी
ये तब सामने आया है कि जब इस महीने की शुरुआत में उनके समर्थकों द्वारा सैन्य प्रतिष्ठानों और संवेदनशील लोगों पर हमले किए थे। इसके बाद गठबंधन सरकार की पार्टियां पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पाकिस्तान-फजल (जेयूआई-एफ) ने  अतिवाद और हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा समर्थित पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया है। इन हमलों के बाद रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संकेत दिया था कि सत्तारूढ़ गठबंधन जल्द ही संसद में पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पेश करेगा। आसिफ ने कहा था कि संघीय सरकार के सभी गठबंधन सहयोगियों को इस मुद्दे पर साथ लिया जाएगा।
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क्या हुआ था नौ मई को?
दरअसल, 9 मई, 2023 को भ्रष्टाचार एक मामले में इमरान खान को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद देश भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। खान को अल-कादिर ट्रस्ट मामले में भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट से गिरफ्तार किया था। अधिकारियों का आरोप है कि खान और उनकी पत्नी ने एक चैरिटेबल ट्रस्ट के जरिए एक रियल एस्टेट कारोबारी से रिश्वत के रूप में लाखों डॉलर की जमीन हासिल की। 
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उनकी गिरफ्तारी के बाद लाहौर, कराची और इस्लामाबाद सहित कई शहरों में बड़े पैमाने पर और हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए। बड़ी संख्या में पीटीआई कार्यकर्ता कोर कमांडर लाहौर आवास पर घुस गए। पंजाब प्रांत में आपातकाल लागू कर दिया गया और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स को बुलाया गया। धारा 144 भी लगाई गई थी, जिसके तहत एक बिंदु पर पांच से अधिक लोग इकट्ठा नहीं हो सकते थे।

हाल ही में 60 से ज्यादा नेताओं ने छोड़ी है पार्टी
25 अप्रैल, 1996 को लाहौर में इमरान खान द्वारा स्थापित की गई पार्टी से कई नेताओं ने हालिया घटनाओं के बाद किनारा कर लिया है। इनमें इमरान के करीबी पूर्व मंत्री असद उमर, शिरीन मजारी, फवाद चौधरी और फिरदौस आशिक अवान का नाम भी शामिल है। जानकारी के मुताबिक, पीटीआई के 60 से अधिक नेताओं ने सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों का हवाला देते हुए पार्टी और खान से अलग होने की घोषणा की है। कहा ये भी जा रहा है कि आने वाले दिनों में पीटीआई के पहले, दूसरे और तीसरे स्तर के नेता भी इस्तीफा दे सकते हैं।  

 इमरान का एलान-अकेले भी होंगे तो भी लड़ाई जारी रहेगी
इन सबके बीच, क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान ने ऐलान किया है कि अगर सभी नेता पार्टी छोड़ देते हैं और वे अकेले रह जाते हैं तो भी उनकी लड़ाई जारी रहेगी। बता दें कि अपनी स्थापना के शुरुआत के 15 सालों तक इमरान की पार्टी केवल एक सीट वाली पार्टी थी। खान ने 2002 के आम चुनावों में अपने गृहनगर मियांवाली से नेशनल असेंबली सीट जीती। यह एकमात्र सीट थी जिसे पीटीआई ने जीता था। खान ने अपने आंदोलन की तुलना पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के 'पाकिस्तान आंदोलन' से की। उन्होंने कहा था कि वे नए पाकिस्तान के लिए संघर्ष कहेंगे। 2013 के चुनावों में पीटीआई को 7.5 मिलियन वोट मिले थे, जिसके बाद इमरान की पार्टी दूसरी ऐसी पार्टी थी जिसे सबसे ज्यादा वोट मिले थे और पीटीआई ने खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) प्रांत में अपनी सरकार बनाई थी।  

इसके बाद 2018 के चुनाव में पीटीआई पहली बार केंद्र की सत्ता में आई थी। चुनाव से पहले, 60 से अधिक शीर्ष प्रमुख पाकिस्तानी नेता पीटीआई में शामिल हो गए थे। इसके बाद पीएमएल-एन ने पीटीआई और सेना का विरोध किया था।  पीएमएल-नवाज पार्टी ने आरोप लगाया था कि सेना ने इन नेताओं को पीटीआई में शामिल होने के लिए कहा था।  तब पीटीआई ने पंजाब और केपीके प्रांतों में भी जीत हासिल की थी और सरकारें बनाईं थीं। इसके बाद पीएमएल-एन, पीपीपी, जेयूआई-एफ ने सेना पर चुनावों में धांधली का आरोप लगाया था।  

सेना से इस कारण बिगड़े पीटीआई के संबंध
शुरुआत में तो इमरान खान के सेना के साथ संबंध बेहतर थे। इन संबंधों में दरार आनी तब शुरू हुई जब इमरान खान ने आईएसआई प्रमुख के रूप में नदीम अंजुम की नियुक्ति की। इसके बाद अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए इमरान खान को प्रधानमंत्री के पद से हटा दिया गया था। पद से हटाए जाने के बाद इमरान खान ने सेना पर आरोप लगाना शुरू किया। इमरान के इन आरोपों को नौ मई को हुई इन घटनाओं के पीछे का मुख्य कारण बताया गया था। 

राजनीति जानकारों ने सेना को बताया प्रमुख कारक
नौ मई को रावलपिंडी में पाकिस्तान सेना के जनरल मुख्यालय (जीएचक्यू) और लाहौर में कोर कमांडर हाउस सहित सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों के बाद इमरान खान के लिए बदले राजनीतिक परिदृश्य को लेकर पाकिस्तान के राजनीतिक जानकारों ने अपनी राय दी है। उनका कहना है कि सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले के बाद पीटीआई को लेकर बदले सेना का  रुख बदल गया है। सेना ने इमरान खान और उनकी पार्टी को राजनीति से बाहर करने का फैसला किया है।  राजनीतिक विश्लेषक ज़ाहिद हुसैन कहते हैं कि नौ मई की घटनाओं ने देश के राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। पीटीआई और सुरक्षा प्रतिष्ठान के बीच गतिरोध को चरम पर ला दिया है।


वहीं, रक्षा विश्लेषक डॉ हसन अस्करी का कहना है कि भले ही अभी तक पीटीआई पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया हो, लेकिन इतने सारे नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद इमरान खान का भविष्य अनिश्चित है। गौरतलब है कि मौजूदा नेशनल असेंबली का कार्यकाल इस साल अगस्त में समाप्त होगा और संविधान के तहत 90 दिनों के भीतर नए चुनाव होने चाहिए।

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