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पाकिस्तान की खुली पोल, अल्पसंख्यकों पर होने वाले जुल्मों पर आई मानवाधिकार रिपोर्ट
Fri, 08 May 2020 01:26 PM IST
Sneha Baluni
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: Sneha Baluni
Updated Fri, 08 May 2020 01:26 PM IST
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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अल्पसंख्यकों को लेकर पाकिस्तान की इमरान खान सरकार की एक बार फिर पोल खुल गई है। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) के अनुसार धार्मिक अल्पसंख्यक देश के कानून के अंतर्गत धर्म या अपनी आजादी लेने में असमर्थ रहे हैं। देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों जैसे हिंदू और ईसाई को साल 2019 में जबरन धर्मांतरण और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है।
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एचआरसीपी ने 2019 में मानवाधिकार की स्थिति शीर्षक से अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी है। जिसमें कहा गया है कि सिंध और पंजाब प्रांत में हिंदू और ईसाई दोनों समुदाय जबरन धर्मांतरण के मामलों की रिपोर्ट करते रहे हैं और पंजाब में 14 साल से कम उम्र की लड़कियों का जबरन धर्मांतरण करके उन्हें शादी के लिए मजबूर किया जाता है।
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रिपोर्ट में बताया गया है कि सिंध में दो हिंदू लड़कियों के परिवार ने दावा किया है कि उनका शादी के लिए अपहरण किया गया और जबरन धर्मांतरण कराया गया। वहीं अपने फैसले में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि शादी के समय लड़कियां नाबालिग नहीं थी और उन्हें अपने पति के घर लौट जाने को कहा।
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रिपोर्ट के अनुसार जनवरी में उच्चतम न्यायालय ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों को बचाने और धार्मिक और सामाजिक सहिष्णुता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए 2014 के फैसले को लागू करने के लिए आयोग का गठन किया। 22 सदस्यीय संसदीय समिति, जिसे अल्पसंख्यकों को जबरन धर्मांतरण से बचाने के लिए बनाया गया था, उसे नवंबर में मामलों की सूचना दी गई और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने का काम सौंपा गया।