Imran Khan: पाकिस्तान में नए विवाद से घिरे इमरान खान, एक ऑडियो क्लिप ने भी बढ़ाई मुश्किल
Imran Khan: पर्यवेक्षकों के मुताबिक इमरान का बाजवा के खिलाफ बयान एस्टेब्लिशमेंट को पसंद नहीं आएगा। पाकिस्तान में सेना और खुफिया तंत्र के नेतृत्व के एस्टेब्लिशमेंट के नाम से जाना जाता है। पाकिस्तान के दो प्रांतों पंजाब और खैबर पख्तूनवा में चुनाव की तारीख का एलान होने के बाद इमरान खान ने पत्रकारों से बातचीत की...
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दो प्रांतों में चुनाव के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला अपने हक में आने के बाद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अब सेना से मेलमिलाप की पहल की है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा के खिलाफ कोर्ट मार्शल की मांग उठा कर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक इमरान का बाजवा के खिलाफ बयान एस्टेब्लिशमेंट को पसंद नहीं आएगा। पाकिस्तान में सेना और खुफिया तंत्र के नेतृत्व के एस्टेब्लिशमेंट के नाम से जाना जाता है। पाकिस्तान के दो प्रांतों पंजाब और खैबर पख्तूनवा में चुनाव की तारीख का एलान होने के बाद इमरान खान ने पत्रकारों से बातचीत की। इसी दौरान एक सवाल पर उन्होंने सेनाध्यक्ष जनरल जनरल आसिम मुनीर से ‘देश की बेहतरी’ के लिए बातचीत की पेशकश की। इमरान खान ने कहा कि उनका एस्टेब्लिशमेंट से कोई झगड़ा नहीं है, और वे सेनाध्यक्ष जनरल मुनीर से बातचीत के लिए तैयार हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ‘रूस विरोधी भाषण’ देने के लिए जनरल बाजवा को कोर्ट मार्शल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन पर हमले के बाद रूस की निंदा करके जनरल बाजवा ने उनकी ‘पीठ में छुरा भोंका’ था। पिछले साल जब यूक्रेन के खिलाफ रूस ने विशेष सैनिक कार्रवाई शुरू की, तब इमरान खान प्रधानमंत्री थे। जिस रोज ये कार्रवाई शुरू की गई, इमरान मास्को में थे। इमरान पहले भी कह चुके हैं कि उनकी रूस के साथ सहमति बनी थी, जिसके तहत रूस रियायती दरों पर पाकिस्तान को कच्चा तेल देने को तैयार हुआ था। लेकिन एस्टेब्लिशमेंट रूस की खुली आलोचना कर और उनकी सरकार गिराने की कोशिश में शामिल होकर उनकी इस योजना को नाकाम कर दिया।
इमरान खान की पत्रकारों से इस बातचीत से पहले राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने दोनों प्रांतों में 30 अप्रैल को मतदान कराने का एलान किया। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में दोनों राज्यों में 90 दिन के भीतर चुनाव कराने का आदेश दिया था। इन घटनाओं को इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की जीत के रूप में देखा जा रहा है। ऐसी धारणा है कि मौजूदा शहबाज शरीफ सरकार चुनाव टलवाने में जुटी हुई थी।
इस बीच शुक्रवार को यहां एक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ, जिससे सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर विवाद पैदा हो गया है। इस ऑडियो क्लिप में पीटीआई नेता फव्वाद चौधरी अपने भाई फैसल चौधरी से फोन पर बातचीत करते सुने गए हैं। फैसल चौधरी सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते हैं। इस बातचीत में तीन जजों के नाम सुने गए, उनमें सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल भी शामिल हैं। उनके अलावा जस्टिस मजाहिर अली नकवी और लाहौर हाई कोर्ट के जज मोहम्म्द अमीर भट्टी के नाम भी इसमें सुने गए हैं।
दोनों भाइयों की बातचीत से ऐसे संकेत मिलता है कि चुनाव कार्यक्रम संबंधी कोर्ट के फैसले से पहले पीटीआई नेता की जस्टिस बंदियाल और जस्टिस महाजिर से मुलाकात का कार्यक्रम बना था। लेकिन फव्वाद चौधरी ने इस ऑडियो क्लिप को फर्जी बताया है और दावा किया है कि उनकी चीफ जस्टिस से कभी मुलाकात नहीं हुई।