Pakistan: इमरान खान का दावा- एक खाड़ी देश ने जनरल बाजवा से किया था सतर्क, अप्रैल 2022 में गिरी थी सरकार
खान का कहना है कि जो तथ्य सामने आए, उससे पता चलता है कि मेरी सरकार को गिराने की साजिश अमेरिका ने नहीं रची थी। जनरल ने अमेरिका में पूर्व दूत हुसैन हक्कानी को नियुक्त किया था। जिससे प्रचार किया जा सके कि बाजवा अमेरिका समर्थक थे और इमरान खान अमेरिका विरोधी।
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विस्तार
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने दावा किया है कि एक खाड़ी देश के शासक ने उन्हें पिछले साल सतर्क किया था कि तत्कालीन सेना प्रमुख उन्हें पद से हटाने की साजिश रच रहे हैं। मेरी सरकार गिराने के मास्टरमाइंड बाजवा ही हैं। पिछले साल अप्रैल में खान के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। यहां अल्पमत में होने के कारण उनकी सरकार गिर गई थी।
जनरल पर साधा निशाना
पीटीआई प्रमुख ने रविवार को पीएमएल-एन के नेतृत्व वाले गठबंधन के एक साल के प्रदर्शन पर एक श्वेत पत्र जारी किया है। उन्होंने इसे देश के इतिहास में सबसे खराब प्रदर्शन करार दिया। इस दौरान खान ने कहा कि पिछले साल अप्रैल में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था। हालांकि, इससे पहले एक खाड़ी देश के शासक ने मुझे आगाह करते हुए कहा था कि मेरे सेना प्रमुख जनरल बाजवा मेरी सरकार के खिलाफ साजिश रच रहे हैं। खान ने दावा किया है कि बाजवा ही मेरी सरकार गिराने के मास्टर माइंड हैं।
बाजवा ने कहा था कि सेना राजनीति से दूर
खान का कहना है कि जो तथ्य सामने आए, उससे पता चलता है कि मेरी सरकार को गिराने की साजिश अमेरिका ने नहीं रची थी। जनरल ने अमेरिका में पूर्व दूत हुसैन हक्कानी को नियुक्त किया था। जिससे प्रचार किया जा सके कि बाजवा अमेरिका समर्थक थे और इमरान खान अमेरिका विरोधी। सरकार गिरने के बाद खान ने शुरुआत में अमेरिका पर उनकी सरकार गिराने का जिम्मेदार ठहराया था। जबकि, बाद में खान ने जनरल बाजवा को उनकी सरकार गिराने का षणयंत्रकारी माना। नवंबर में जनरल बाजवा ने कहा था कि वह एक और विस्तार की मांग नहीं कर रहे। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तानी सेना देश की राजनीति से खुद को दूर कर रही है।
पीटीआई नेताओं पर अत्याचार
खान ने शहबाज सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएमएल-एन सरकार ने अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया। मीडिया पर हमला किया। उन्होंने अपने भाषणों और मीडिया साक्षात्कारों पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही। खान ने कहा कि अपने एक साल के दौरान शरीफ सरकार ने पीटीआई नेताओं और कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किया। लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन किया।