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South Korea: महाभियोग झेल रहे राष्ट्रपति पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, आज कोर्ट में सुनवाई; समर्थकों का प्रदर्शन

Sat, 18 Jan 2025 08:48 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल Published by: काव्या मिश्रा Updated Sat, 18 Jan 2025 08:48 AM IST
सार

सुक येओल की ओर से तीन दिसंबर को मार्शल लॉ के एलान ने दक्षिण कोरियाई लोगों आश्चर्य में डाल दिया था। हालांकि, मार्शल लॉ केवल कुछ घंटे तक ही लागू रहा, लेकिन इसने देश की राजनीति, कूटनीति और वित्तीय बाजार में हलचल मचा दी थी।
 

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Impeached South Korean president to appear in court hearing to plead against his arrest news in hindi
यून सुक योल - फोटो : एएनआई

विस्तार

दक्षिण कोरिया के महाभियोग का सामना कर रहे राष्ट्रपति यून सुक येओल की लगातार मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने येओल को औपचारिक रूप से गिरफ्तार करने के लिए अदालत से वारंट का अनुरोध किया है। इसी पर आज अदालत में सुनवाई होगी।

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यून को बुधवार को उनके निवास से हिरासत में लिया गया था। तबसे वह अधिकारियों की हिरासत में हैं। उन पर पिछले साल तीन दिसंबर को मार्शल लॉ लागू करने के लिए देश में विद्रोह कराने का आरोप है, जो 1980 के दशक के अंत में दक्षिण कोरिया के लोकतंत्रीकरण के बाद का सबसे गंभीर राजनीतिक संकट था।
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रविवार तक फैसला आने की उम्मीद
इस मामले की भ्रष्टाचार जांच एजेंसी (सीआईओ) और पुलिस तथा सेना द्वारा संयुक्त रूप से जांच की जा रही है। उन्होंने सियोल के पश्चिमी जिला अदालत से यून की गिरफ्तारी का वारंट मांगा है। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि यून यह तर्क देंगे कि जांच के दौरान उन्हें हिरासत में रखने की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत का फैसला शनिवार शाम या रविवार सुबह तक आ सकता है।
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यून के सैकड़ों समर्थकों ने कोर्ट के बाहर प्रदर्शन किया और उनकी रिहाई की मांग की।

20 दिन बढ़ सकती है हिरासत
यून पर तीन दिसंबर को मार्शल लॉ लागू करने के कारण बगावत का आरोप लग सकता है, जिससे देश में गंभीर राजनीतिक संकट पैदा हुआ था। अगर यून को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया जाता है, तो जांचकर्ताओं को उनकी हिरासत 20 दिनों तक बढ़ाने का अधिकार होगा। इस दौरान मामले को अभियोजन के लिए भेजा जाएगा। अगर कोर्ट ने गिरफ्तारी का आदेश नहीं दिया, तो यून को रिहा कर दिया जाएगा और वे अपने घर वापस लौट सकते हैं।

तीन दिसंबर को लगाया था मार्शल लॉ
सुक येओल की ओर से तीन दिसंबर को मार्शल लॉ के एलान ने दक्षिण कोरियाई लोगों आश्चर्य में डाल दिया था। इस घोषणा के बाद देशभर में आक्रोश देखने को मिला। हालांकि, मार्शल लॉ केवल कुछ घंटे तक ही लागू रहा, लेकिन इसने देश की राजनीति, कूटनीति और वित्तीय बाजार में हलचल मचा दी थी। इसके बाद एशिया के सबसे जीवंत लोकतंत्रों में से एक दक्षिण कोरिया ने अचानक से अभूतपूर्व राजनीतिक उथल-पुथल का दौर देखा। इसके बाद 14 दिसंबर को सांसदों ने उन पर महाभियोग चलाने और उन्हें पद से हटाने के लिए मतदान किया।

इसके बाद सियोल पश्चिमी जिला न्यायालय ने 31 दिसंबर को यून सुक येओल को हिरासत में लेने का वारंट जारी किया था, क्योंकि वह पूछताछ के लिए जांच अधिकारियों के समक्ष पेश नहीं हो रहे थे। जब जांच एजेंसी और पुलिस यून को गिरफ्तार करने पहुंची तो उनके समर्थक और राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा ने विरोध किया था। इस दौरान यून के वकीलों ने एक कानून का हवाला देते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी के पास विद्रोह के आरोपों की जांच करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।


सियोल केंद्रीय जिला अदालत ने खारिज की थी रिहाई की याचिका
वकीलों ने सियोल केंद्रीय जिला अदालत से आग्रह किया था कि वह सुक येओल की रिहाई पर विचार पर करे। इसके अलावा, सुक येओल के खिलफ जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट की वैधता को भी चुनौती दी गई थी। लेकिन अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद से वह हिरासत में हैं।

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