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Iran-Israel proxy conflict: ईरान और इस्राइल में मोर्चा खुला तो क्या होगा? जंग छिड़ी तो दूर तक जाएगी चिनगारी

Fri, 05 Apr 2024 10:33 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Fri, 05 Apr 2024 10:33 PM IST
सार

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के लिए सीरिया के दमिश्क में एक अप्रैल को हुआ इस्राइल का हमला जहर का घूंट पीने जैसा है। इस्राइल ने ईरान के वाणिज्यिक दूतावास पर हुए इस हमले में उसके इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (कुद्दस फोर्स) के ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा जाहेदी को निशाना बनाया।

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If war breaks out between Iran and Israel consequences will be fatal
इस्राइल और ईरान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

24 फरवरी को रूस की सेना यूक्रेन में घुसी थी। 07 अक्तूबर 2023 से इस्राइल ने फिलिस्तीन में तबाही मचा रखी है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि दुनिया दोनों महासंग्रामों का दंश झेल रही है। लेकिन अब इस्राइल और ईरान में जंग जैसे हालात बने हुए हैं। विदेश मंत्रालय से सेवानिवृत हुए मध्य एशिया मामलों के जानकार कहना है कि यह जंग छिड़ी तो फिर इसकी चिनगारी दूर तक जाएगी।
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हालांकि विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि ईरान को पहले से ही अमेरिका ने कमजोर नहीं कर रखा है। इसलिए ईरान अभी इस्राइल पर हमले करने की स्थिति में नहीं है। लेकिन प्रतिक्रिया में इस्राइल पर एकाध मिसाइल से हमला कर सकता है। जहां तक प्रश्न इस्राइल का है, वह हूती विद्रोहियों के खतरे से परेशान है। सात अक्तूबर से जारी सैन्य कार्रवाई ने उसकी आर्थिक स्थिति की चिंतनीय बना रखी है। इस्राइल के सामने क्षेत्र में अपना दबदबा और वजूद बनाए रखने की चुनौती खड़ी है। इसलिए वह अपनी सेनाओं को बैरक में नहीं बुला रहा है। आक्रामक बना हुआ है। रंजीत कुमार भी मानते हैं कि ईरान के जवाबी हमला करने की स्थिति में इस्राइल उससे 10 गुना ताकत से हमला बोल देगा। ताकि ईरान इसे जंग का रूप न दे पाए। वैसे भी पिछले कुछ सालों से इस्राइल लगातार ईरान के लिए सिर दर्द बना हुआ है। ईरान बस धमकियां दे रहा है।  
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रूस और चीन की मंशा क्या है?
पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह का कहना है कि रूस दुनिया का ध्यान युक्रेन से हटाना चाहता है। इस्राइल की फिलिस्तीन पर सैन्य कार्रवाई से जहां अमेरिका के थोड़े हाथ बंधे, वहीं रूस को अवसर मिल गया। इसने दुनिया का ध्यान भी इस्राइल की तरफ खींच लिया था। चीन को भी विएतनाम के मामले में थोड़ी राहत मिल गई थी। इसलिए चीन और रूस तो चाहते हैं कि इस्राइल को ईरान अपनी प्रतिक्रिया दे। इससे अमेरिका की भी कुछ परेशानी बढ़ेगी। माना जा रहा है कि ताजा हालात से अमेरिका की चिंता बढ़ी है। क्योंकि इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतेन्याहू अपनी शर्तों से कम पर झुकने को तैयार नहीं हैं। दूसरी तरफ अमेरिका के सामने मजबूरी जैसी स्थिति है कि वह इस्राइल के साथ उसके हित में खड़ा रहे। यह स्थिति अब तुर्की समेत कई देशों को कम हजम हो रही है।  
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क्या कह रहे हैं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई?
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के लिए सीरिया के दमिश्क में एक अप्रैल को हुआ इस्राइल का हमला जहर का घूंट पीने जैसा है। इस्राइल ने ईरान के वाणिज्यिक दूतावास पर हुए इस हमले में उसके इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (कुद्दस फोर्स) के ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा जाहेदी को निशाना बनाया। रजा के अलावा एक और जनरल मारे गए। हमले में 13 ईरानी और 6 सीरियाई भी मारे गए। ईरान के लिए जनरल सुलेमानी पर अमेरिकी ड्रोन हमले के बाद हुआ यह दूसरा सबसे बड़ा कहर है। इस्राइल इससे पहले उसके परमाणु संयंत्र समेत कई संवेदनशील स्थानों को निशाना बना चुका है। इससे खफा खामेनेई ने कहा है कि इस्राइल को इस हमले का ऐसा जवाब दिया जाएगा कि उसे अपने किए पर पछतावा होगा।

इस्राइल भी हर चुनौती के लिए तैयार
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतेन्याहू झुकने के लिए तैयार नहीं हैं। वह लगातार इस्राइल को हर चुनौती के लिए तैयार रहने का संकल्प दोहरा रहे हैं। इस्राइल ने अपने सैनिकों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। जीपीएस सिस्टम को ब्लॉक कर दिया है। भारतीय वायुसेना के पूर्व अधिकारी एनबी सिंह कहते हैं कि यदि आक्रमण की स्थिति हुई, तो वह हवाई हमला ही होगा। इस्राइल ने इस तरह की स्थिति को बेअसर करने के लिए अपने आयरन डोम समेत तमाम प्रतिरक्षा उपकरणों को सक्रिय कर दिया है।


इस्राइल-ईरान युद्ध का बड़ा खतरा क्या है?
युद्ध के बढ़ते हालात विश्व में आर्थिक मंदी ला सकते हैं। इसके अलावा किसी भी युद्ध में बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान होता है। इस्राइल युद्धक क्षमता के मामले में ईरान की तुलना में बहुत भारी है। इस्राइल के समर्थन में अमेरिका खुलकर खड़ा रहता है। अमेरिका ने क्षेत्र में फिलिस्तिीन पर इस्राइल का हमला शुरू होने के साथ ही अपने बेड़े को तैनात कर रखा है। ऐसे में ईरान कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं कर सकता और न ही उसमें बड़ी जंग लड़ने की क्षमता बची है। हूती विद्रोहियों आदि के सहारे ही वह छदम रूप से इस्राइल के सामने कई फ्रंट खोलकर चुनौती को बड़ा रूप दे सकता है। इसके असर से लाल सागर समेत दुनिया के एक बड़े व्यापारिक क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रह सकती है। इसके चलते विकासशील और अविकसित देशों को लगातार कीमत चुकानी पड़ सकती है।
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