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ICC: पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने वाला ICC क्या है? इसकी शक्तियां क्या हैं और यह कैसे काम करता है?
Sat, 18 Mar 2023 05:22 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Sat, 18 Mar 2023 05:22 PM IST
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अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) ने यूक्रेन में युद्ध अपराधों के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ शुक्रवार को गिरफ्तारी वारंट जारी किया। कोर्ट ने कहा कि पुतिन ने यूक्रेन में युद्ध अपराध किए हैं। वो यूक्रेनी बच्चों के अपहरण और डिपोर्टेशन के अपराध के लिए जिम्मेदार हैं। हालांकि, रूस ने इन आरोपों को खारिज किया है। वारंट पर यूक्रेन की भी प्रतिक्रिया आई है। यूक्रेन ने कहा कि यह तो महज शुरुआत है। वारंट के बाद अब पुतिन के सामने और भी मुश्किल चुनौतियां आने वाली हैं।आइये जानते हैं गिरफ्तारी वारंट जारी करने वाली संस्थ्या क्या है? इसे जारी करने वाली संस्था आईसीसी का क्या काम है? इसकी अदालत कैसे काम करती है? रूस इसका सदस्य है या नहीं? इसकी शक्तियां और क्षेत्राधिकार क्या हैं?
आईसीसी
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
गिरफ्तारी वारंट जारी किसने किया?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) ने जारी किया है। आईसीसी दुनिया का पहला स्थायी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय है। यह नीदरलैंड के एक शहर द हेग में स्थित है और कई देशों में इसके क्षेत्रीय कार्यालय हैं। न्यायालय की स्थापना 2002 में रोम संधि के तहत हुई थी। संधि को 17 जुलाई 1998 को इटली की राजधानी रोम में एक राजनयिक सम्मेलन में अपनाया गया था और यह एक जुलाई 2002 को लागू हुई। इस तरह से दुनियाभर में अपराध को रोकने और सबसे पहले कार्रवाई करने की कोशिश करने वाली संस्था का उदय हुआ।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) ने जारी किया है। आईसीसी दुनिया का पहला स्थायी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय है। यह नीदरलैंड के एक शहर द हेग में स्थित है और कई देशों में इसके क्षेत्रीय कार्यालय हैं। न्यायालय की स्थापना 2002 में रोम संधि के तहत हुई थी। संधि को 17 जुलाई 1998 को इटली की राजधानी रोम में एक राजनयिक सम्मेलन में अपनाया गया था और यह एक जुलाई 2002 को लागू हुई। इस तरह से दुनियाभर में अपराध को रोकने और सबसे पहले कार्रवाई करने की कोशिश करने वाली संस्था का उदय हुआ।
इसे जारी करने वाली संस्था आईसीसी का क्या काम है?
आईसीसी, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता के सबसे गंभीर अपराधों के आरोपों की जांच करता है और जरूरत पड़ने पर वारंट जारी करता है। नरसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और हमले के अपराध के आरोप में व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा भी चलाया जाता है।
आईसीसी, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता के सबसे गंभीर अपराधों के आरोपों की जांच करता है और जरूरत पड़ने पर वारंट जारी करता है। नरसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और हमले के अपराध के आरोप में व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा भी चलाया जाता है।
आईसीसी
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SOCIAL MEDIA
यह अदालत कैसे काम करती है?
अदालत अभियोजक कार्यालय के माध्यम से जांच करती है। इसका नेतृत्व 2021 से ब्रिटिश वकील करीम ए.ए. खान कर रहे हैं जो पहले संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव के रूप में कार्यरत थे। अदालत में अठारह न्यायाधीश होते हैं जो अलग सदस्य देश से होते हैं और सदस्य देशों द्वारा चुने जाते हैं। न्यायाधीशों और अभियोजकों को सिर्फ एक बार के लिए नौ साल की अवधि के लिए चुना जाता है। न्यायालय के अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष न्यायाधीशों में से ही चुने जाते हैं।
जांच शुरू करने के लिए, अभियोजक को प्रारंभिक जांच के बाद यह निष्कर्ष निकालना चाहिए कि कथित अपराध पर्याप्त गंभीरता वाले हैं। एक बार जांच शुरू हो जाने के बाद, अभियोजक कार्यालय सबूत जुटाने के लिए जांचकर्ताओं और अन्य कर्मचारियों को भेजता है। अभियोजक द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर किसी भी गिरफ्तारी वारंट या समन को न्यायपालिका द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए। जजों का एक समूह निर्णय लेता है कि किसी मामले में मुकदमा चलाया जाना चाहिए या नहीं। दोषसिद्धि और सजा के लिए ट्रायल बेंच के तीन न्यायाधीशों में से कम से कम दो के वोट की आवश्यकता होती है। सजायाफ्ता प्रतिवादी आईसीसी की अपीलीय पीठ में अपील कर सकते हैं, जो पांच न्यायाधीशों से बनी होती है।
अदालत अभियोजक कार्यालय के माध्यम से जांच करती है। इसका नेतृत्व 2021 से ब्रिटिश वकील करीम ए.ए. खान कर रहे हैं जो पहले संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव के रूप में कार्यरत थे। अदालत में अठारह न्यायाधीश होते हैं जो अलग सदस्य देश से होते हैं और सदस्य देशों द्वारा चुने जाते हैं। न्यायाधीशों और अभियोजकों को सिर्फ एक बार के लिए नौ साल की अवधि के लिए चुना जाता है। न्यायालय के अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष न्यायाधीशों में से ही चुने जाते हैं।
जांच शुरू करने के लिए, अभियोजक को प्रारंभिक जांच के बाद यह निष्कर्ष निकालना चाहिए कि कथित अपराध पर्याप्त गंभीरता वाले हैं। एक बार जांच शुरू हो जाने के बाद, अभियोजक कार्यालय सबूत जुटाने के लिए जांचकर्ताओं और अन्य कर्मचारियों को भेजता है। अभियोजक द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर किसी भी गिरफ्तारी वारंट या समन को न्यायपालिका द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए। जजों का एक समूह निर्णय लेता है कि किसी मामले में मुकदमा चलाया जाना चाहिए या नहीं। दोषसिद्धि और सजा के लिए ट्रायल बेंच के तीन न्यायाधीशों में से कम से कम दो के वोट की आवश्यकता होती है। सजायाफ्ता प्रतिवादी आईसीसी की अपीलीय पीठ में अपील कर सकते हैं, जो पांच न्यायाधीशों से बनी होती है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन।
- फोटो :
ANI
रूस इसका सदस्य है या नहीं?
नहीं, रूस इसका सदस्य है या नहीं है। रोम संधि में 123 देश पक्षकार हैं। चीन, भारत, उत्तर कोरिया, सऊदी अरब और तुर्की सहित कुछ चालीस देशों ने कभी संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए। कई दर्जन अन्य देशों ने कानून पर हस्ताक्षर तो किए, लेकिन उनकी विधायिकाओं ने कभी इसकी मंजूरी नहीं दी। इनमें अमेरिका, रूस, इजराइल, ईरान, सीरिया, मिस्र और सूडान शामिल हैं।
दो देश आईसीसी से हट चुके हैं। 2017 में बुरुंडी तो 2019 में फिलीपीन बाहर हुआ। गाम्बिया और दक्षिण अफ्रीका ने 2016 में संयुक्त राष्ट्र को सूचित किया था कि वो संधि से बाहर निकलना चाहते हैं, लेकिन बाद में उन्होंने इरादा बदल दिया।
नहीं, रूस इसका सदस्य है या नहीं है। रोम संधि में 123 देश पक्षकार हैं। चीन, भारत, उत्तर कोरिया, सऊदी अरब और तुर्की सहित कुछ चालीस देशों ने कभी संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए। कई दर्जन अन्य देशों ने कानून पर हस्ताक्षर तो किए, लेकिन उनकी विधायिकाओं ने कभी इसकी मंजूरी नहीं दी। इनमें अमेरिका, रूस, इजराइल, ईरान, सीरिया, मिस्र और सूडान शामिल हैं।
दो देश आईसीसी से हट चुके हैं। 2017 में बुरुंडी तो 2019 में फिलीपीन बाहर हुआ। गाम्बिया और दक्षिण अफ्रीका ने 2016 में संयुक्त राष्ट्र को सूचित किया था कि वो संधि से बाहर निकलना चाहते हैं, लेकिन बाद में उन्होंने इरादा बदल दिया।
इसके क्या अधिकार हैं?
जब कोई देश रोम संधि का पक्षकार बन जाता है, तो वह स्वयं को इसके अधीन होने के लिए सहमत हो जाता है। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, आईसीसी किसी भी देश के नेता को दोषी तो ठहरा सकता है, उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकता है लेकिन उनकी गिरफ्तारी के लिए वह दुनियाभर के देशों पर निर्भर रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके पास खुद का कोई पुलिस बल नहीं है।
जब कोई देश रोम संधि का पक्षकार बन जाता है, तो वह स्वयं को इसके अधीन होने के लिए सहमत हो जाता है। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, आईसीसी किसी भी देश के नेता को दोषी तो ठहरा सकता है, उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकता है लेकिन उनकी गिरफ्तारी के लिए वह दुनियाभर के देशों पर निर्भर रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके पास खुद का कोई पुलिस बल नहीं है।
आईसीसी का क्षेत्राधिकार क्या है?
न्यायालय ऐसी स्थिति में क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर सकता है जहां एक जुलाई 2002 को या उसके बाद नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध या युद्ध अपराध किए गए हों और:
- अपराध किसी राष्ट्र (सदस्य) के नेता द्वारा, या किसी राष्ट्र के क्षेत्र में, या किसी ऐसे राष्ट्र में किए गए थे, जिसने न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार कर लिया है; या
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) द्वारा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत अपनाए गए एक प्रस्ताव के अनुसार अपराधों को आईसीसी अभियोजक के पास भेजा गया था।
न्यायालय ऐसी स्थिति में क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर सकता है जहां एक जुलाई 2002 को या उसके बाद नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध या युद्ध अपराध किए गए हों और:
- अपराध किसी राष्ट्र (सदस्य) के नेता द्वारा, या किसी राष्ट्र के क्षेत्र में, या किसी ऐसे राष्ट्र में किए गए थे, जिसने न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार कर लिया है; या
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) द्वारा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत अपनाए गए एक प्रस्ताव के अनुसार अपराधों को आईसीसी अभियोजक के पास भेजा गया था।