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रिसर्च: 12 करोड़ रुपये खर्च कर इंसानी कोशिकाओं को अंतरिक्ष भेज रहे वैज्ञानिक, मेडिकल क्षेत्र के लिए क्यों अहम होगी स्टडी? जानें

Mon, 20 Dec 2021 09:57 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 20 Dec 2021 09:57 PM IST
सार

इस एक्सपेरिमेंट की तैयारी यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के वैज्ञानिकों की तरफ से की जा रही है। वहीं, इसकी लॉन्चिंग का जिम्मा माइक्रोएज नाम की कंपनी ने उठाया है, जिसे उम्मीद है कि इस स्टडी से इंसानों के स्वास्थ्य को लेकर बड़ी खोज सामने आएगी।

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Human muscle cells will be launched into space on board a SpaceX Falcon 9 rocket to help uncover the secrets of AGEING news and updates
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन - फोटो : नासा

विस्तार

पृथ्वी पर एक लैब में पैदा की गई इंसानी कोशिकाओं को अंतरिक्ष में भेजा जा रहा है। ये पहली बार है जब वैज्ञानिक 12 करोड़ रुपये (करीब 12 लाख पाउंड) के खर्च से किसी इंसान को नहीं, बल्कि इंसानी कोशिकाओं को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) भेजेंगे। कंपनी का कहना है कि वह एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के फैल्कन 9 रॉकेट के जरिए इन मानव सेल्स को अंतरिक्ष में भेजेंगे। इसकी लॉन्चिंग मंगलवार को तय की गई है। 
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इस एक्सपेरिमेंट की तैयारी यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के वैज्ञानिकों की तरफ से की जा रही है। वहीं, इसकी लॉन्चिंग का जिम्मा माइक्रोएज नाम की कंपनी ने उठाया है, जिसे उम्मीद है कि इस स्टडी से इंसानों के स्वास्थ्य को लेकर बड़ी खोज सामने आएगी। बताया गयया है कि इन कोशिकाओं को 3-डी प्रिंटेड होल्डर में रखा गया है, जिसका आकार एक पेंसिल शार्पनर जितना ही है।
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क्या है ये एक्सपेरिमेंट?
इस एक्सपेरिमेंट में शामिल वैज्ञानिक अंतरिक्ष की माइक्रोग्रैविटी में इंसानी कोशिकाओं के विकास की निगरानी रखकर इससे कई अहम जानकारियां जुटाना चाहते हैं। बताया गया है कि 24 कोशिकाओं को आईएसएस में रखने के साथ इन्हें इलेक्ट्रिक प्रवाह के जरिए सक्रिय रखा जाएगा। वहीं, बाकी कोशिकाओं को सुरक्षित कर के गर्मी से भरे प्रोटीन्स दिए जाएंगे। यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे उम्र के साथ मांसपेशियों का बढ़ना नियंत्रित रहता है। एक्सपेरिमेंट के अंत में इन कोशिकाओं को फ्रीज कर यानी बर्फ में जमा कर पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा, जहां इस पर अतिरिक्त विश्लेषण किया जाएगा। 
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क्या होता है स्पेस में इंसानी मांसपेशियों पर असर?
दरअसल, गुरुत्वाकर्षण यानी ग्रैविटी की गैरमौजूदगी वाले वातावरण में समय बिताने से अंतरिक्षयात्रियों की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती हैं। यह मांसपेशियों पर बिल्कुल वैसा ही असर है, जैसे किसी की उम्र बढ़ने के दौरान होता है। हालांकि, पृथ्वी पर लौटने के बाद यह असर पूरी तरह खत्म हो जाता है और इंसानी मांसपेशियां फिर से सख्त और मजबूत हो जाती हैं। 


इसी के आधार पर रिसर्चर यह जानना चाहते हैं कि आखिर इंसानी कोशिकाओं पर अंतरिक्ष में क्या असर होता है। बाद में इसकी तुलना प्राकृतिक रूप से उम्र बढ़ने के दौरान मांसपेशियों में होने वाले बदलाव से की जाएगी। इन दोनों नतीजों के आधार पर वैज्ञानिक बदलते गुरुत्वाकर्षण और मांसपेशियों पर पड़ने वाले उसके असर को लेकर स्टडी पेश करेंगे। माना जा रहा है कि दुनिया की एक बड़ी आबादी के स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के लिहाज से यह स्टडी काफी अहम साबित होने वाली है, क्योंकि इसके नतीजों पर ही रिसर्चर बताएंगे कि कौन सी स्थितियों में उम्र का असर ज्यादा पड़ता है और कौन सी स्थितियों में उम्र बढ़ने के बावजूद मांसपेशियों पर प्रभाव कम रहता है। 
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