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WMO: गर्मी, सूखा और जंगली आग के साथ, इस साल की जुलाई अभी तक की सबसे गर्म जुलाई
Thu, 11 Aug 2022 04:47 PM IST
शैलजा श्रीवास्तव
यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार
Published by: शैलजा श्रीवास्तव
Updated Thu, 11 Aug 2022 04:47 PM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने मंगलवार को कहा कि हाल ही में बीता जुलाई महीना, अत्यधिक गर्मी, सूखा और जंगली आग के साथ, दुनिया के अनेक हिस्सों में, सर्वाधिक गर्म जुलाई महीनों में से एक रहा है।
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जुलाई 2022 का महीना, दुनिया भर में रिकॉर्ड पर अभी तक का सबसे गर्म जुलाई महीना रहा है.
- फोटो : Social Media
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विस्तार
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार पूरे यूरोपीय क्षेत्र में तापमान, 1991-2020 की तुलना में औसतन 0.4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा, जबकि दक्षिण-पूर्वी और पश्चिमी यूरोप औसत से ज्यादा गर्म रहा, क्योंकि वहां मध्य जुलाई में सघन गर्मी-लू देखी गई। विश्व मौसम विज्ञान संगठन की प्रवक्ता क्लेयर न्यूलिस का कहना है, “ये गर्मी ला नीना प्रभाव के बावजूद पड़ी, जिससे कुछ ठण्डा प्रभाव होने की संभावना थी।”
“हमने ऐसा कुछ ही स्थानों पर देखा, वैश्विक स्तर पर नहीं।”
प्रवक्ता ने बताया कि गत जुलाई का महीना अभी तक का सबसे गर्म जुलाई महीना रहा है, जो कि जुलाई 2019 की तुलना में कुछ कम गर्म तो रहा, मगर जुलाई 2016 की तुलना में ज्यादा गर्म रहा, मगर अन्तर बहुत ही मामूली रहा।
रिकॉर्ड तापमान
पुर्तगाल, फ्रांस के पश्चिमी हिस्से और आयरलैंड में रिकॉर्ड गर्मी रही, जबकि इंग्लैंड में तापमान पहली बार 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। वेल्स और स्कॉटलैंड में भी, राष्ट्रीय स्तर पर अभी तक के दैनिक तापमान का सबसे ज्यादा रहने का रिकॉर्ड टूटा। स्पेन में भी जुलाई महीना अभी तक का सबसे गर्म जुलाई महीना रहा जहां औसत राष्ट्रीय तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस रहा। यहां 8 से 26 जुलाई को चली लू बहुत गर्म व सघन रही जो कि रिकॉर्ड सबसे लंबा समय था।
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विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने यूरोपीय आयोग की कॉपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा के आंकड़ों के हवाले से पुष्टि की है कि यूरोप में ये जुलाई महीना, अभी तक का छठा सबसे गर्म जुलाई महीना रहा है।
तापमान अनियमितताएं
इसी बीच, हॉर्न ऑफ अफ्रीका से भारत के दक्षिणी हिस्सों तक, और मध्य एशिया से लेकर ऑस्ट्रेलिया के अधिकतर भागों तक, तापमान औसत से कम रहा। कुछ ऐसा ही वातावरण आइसलैंड से लेकर पूरे स्कैंडिनीविया से होकर बाल्टिक देशों और कैस्पियन सागर तक देखा गया। उससे भी ज्यादा जॉर्जिया और तुर्की के अधिकतर हिस्सों में तापमान आमतौर पर औसत से कम रहा।
पोलर हिम का संकुचन
जुलाई महीने में अंटार्कटिक सागर में भी अभी तक की सबसे कम बर्फ देखी गई, जो कि औसत से 7 प्रतिशत कम थी। आर्कटिक सागर में बर्फ औसत से चार प्रतिशत कम थी, जो कि सैटेलाइट रिकॉर्ड के अनुसार, जुलाई महीने में लगातार 12वीं बार सबसे कम थी। विश्व मौसम विज्ञान संगठन की प्रवक्ता क्लेयर न्यूलिस ने बताया कि हिमनदों (Glaciers) ने बहुत ही बुरी गर्मी देखी है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के महासचिव पैटेरी टालस ने गर्मी की चरम स्थिति के दौरान, 18 जुलाई को कहा था, “इस तरह की गर्मी और लू, अब नई सामान्य स्थिति बन चुकी है।”
नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।
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“हमने ऐसा कुछ ही स्थानों पर देखा, वैश्विक स्तर पर नहीं।”
प्रवक्ता ने बताया कि गत जुलाई का महीना अभी तक का सबसे गर्म जुलाई महीना रहा है, जो कि जुलाई 2019 की तुलना में कुछ कम गर्म तो रहा, मगर जुलाई 2016 की तुलना में ज्यादा गर्म रहा, मगर अन्तर बहुत ही मामूली रहा।
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रिकॉर्ड तापमान
पुर्तगाल, फ्रांस के पश्चिमी हिस्से और आयरलैंड में रिकॉर्ड गर्मी रही, जबकि इंग्लैंड में तापमान पहली बार 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। वेल्स और स्कॉटलैंड में भी, राष्ट्रीय स्तर पर अभी तक के दैनिक तापमान का सबसे ज्यादा रहने का रिकॉर्ड टूटा। स्पेन में भी जुलाई महीना अभी तक का सबसे गर्म जुलाई महीना रहा जहां औसत राष्ट्रीय तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस रहा। यहां 8 से 26 जुलाई को चली लू बहुत गर्म व सघन रही जो कि रिकॉर्ड सबसे लंबा समय था।
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विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने यूरोपीय आयोग की कॉपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा के आंकड़ों के हवाले से पुष्टि की है कि यूरोप में ये जुलाई महीना, अभी तक का छठा सबसे गर्म जुलाई महीना रहा है।
तापमान अनियमितताएं
इसी बीच, हॉर्न ऑफ अफ्रीका से भारत के दक्षिणी हिस्सों तक, और मध्य एशिया से लेकर ऑस्ट्रेलिया के अधिकतर भागों तक, तापमान औसत से कम रहा। कुछ ऐसा ही वातावरण आइसलैंड से लेकर पूरे स्कैंडिनीविया से होकर बाल्टिक देशों और कैस्पियन सागर तक देखा गया। उससे भी ज्यादा जॉर्जिया और तुर्की के अधिकतर हिस्सों में तापमान आमतौर पर औसत से कम रहा।
पोलर हिम का संकुचन
जुलाई महीने में अंटार्कटिक सागर में भी अभी तक की सबसे कम बर्फ देखी गई, जो कि औसत से 7 प्रतिशत कम थी। आर्कटिक सागर में बर्फ औसत से चार प्रतिशत कम थी, जो कि सैटेलाइट रिकॉर्ड के अनुसार, जुलाई महीने में लगातार 12वीं बार सबसे कम थी। विश्व मौसम विज्ञान संगठन की प्रवक्ता क्लेयर न्यूलिस ने बताया कि हिमनदों (Glaciers) ने बहुत ही बुरी गर्मी देखी है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के महासचिव पैटेरी टालस ने गर्मी की चरम स्थिति के दौरान, 18 जुलाई को कहा था, “इस तरह की गर्मी और लू, अब नई सामान्य स्थिति बन चुकी है।”
नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।