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US-Iran: होर्मुज पर संकट के बीच अमेरिका-ईरान डील की चर्चा तेज; ट्रंप बोले- समझौता होगा, वरना सैन्य कार्रवाई तय

Thu, 28 May 2026 03:13 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 28 May 2026 03:13 AM IST
सार

US Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर तनाव और कूटनीति दोनों तेज हो गए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन अमेरिका अभी संतुष्ट नहीं है। व्हाइट हाउस ने ईरानी मीडिया के समझौते संबंधी दावों को फर्जी बताया है। होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल आपूर्ति, परमाणु कार्यक्रम और इस्राइल-हिजबुल्लाह विवाद के कारण पश्चिम एशिया का संकट वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि बैठक में ट्रंप ने क्या-क्या कहा, साथ ही ये भी समझेंगे कि इस डील पर रूबियो का क्या कहना है...

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Hormuz Speculation US-Iran Deal Intensifies Trump Says Agreement OR Military Action
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर दुनिया भर की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन अमेरिका अभी मौजूदा प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं है। व्हाइट हाउस में हुई अहम कैबिनेट बैठक में ट्रंप ने संकेत दिया कि बातचीत जारी है, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई का रास्ता भी अपना सकता है। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल आपूर्ति और युद्धविराम को लेकर वैश्विक चिंता और बढ़ गई है।

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आखिर ट्रंप ने ईरान को लेकर क्या बड़ा संदेश दिया?
कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान अब भारी दबाव में है और उसके पास समझौता करने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा ईरान बहुत ज्यादा डील करना चाहता है। अभी तक बात पूरी नहीं बनी है, लेकिन हम संतुष्ट होंगे। अगर नहीं हुए तो हम कार्रवाई करेंगे। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान सोच रहा था कि अमेरिका मध्यावधि चुनावों के दबाव में पीछे हट जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उनकी रणनीति चुनावों से प्रभावित नहीं होगी।
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क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई गुप्त समझौता हुआ?
ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया था कि दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक समझौते का मसौदा तैयार हो चुका है। इसमें अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और खाड़ी क्षेत्र से सैन्य मौजूदगी कम करने की बात कही गई थी। बदले में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य करने को तैयार बताया गया। लेकिन व्हाइट हाउस ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। अमेरिका ने कहा कि ईरानी मीडिया द्वारा जारी किया गया कथित समझौता पूरी तरह फर्जी है।

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मुद्दा

अमेरिका का रुख

ईरान का दावा

नौसैनिक नाकेबंदी

हटाने से इनकार

हटाने की बात

सैन्य वापसी

कोई पुष्टि नहीं

खाड़ी से हटने का दावा

होर्मुज मार्ग

निगरानी जारी

व्यापार सामान्य करने की बात

समझौता मसौदा

फर्जी बताया

प्रारंभिक सहमति का दावा


ये भी पढ़ें- US-Iran Conflict: ईरान के यूरेनियम भंडार पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- इसे रूस या चीन को सौंपना मंजूर नहीं


रूबियो ने बैठक में क्या-क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्री रूबिय ने माना कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अंतिम समझौते तक पहुंचना अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ घंटे और दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। रूबियो ने यह भी साफ किया कि अमेरिका किसी भी अधूरे या कमजोर समझौते के पक्ष में नहीं है।

रूबियो की बड़ी बातें पॉइंट्स में-

  • ईरान के साथ बातचीत में कुछ प्रगति हुई है।
  • अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
  • अगले कुछ घंटे और दिन बेहद अहम होंगे।
  • अमेरिका जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेगा।
  • ईरान को ठोस कदम उठाने होंगे।
  • होर्मुज की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
  • अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।
  • क्षेत्रीय स्थिरता के बिना प्रतिबंधों में राहत संभव नहीं।


होर्मुज जलडमरूमध्य इतना अहम क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यही कारण है कि अमेरिका और ईरान के बीच हर बयान का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर तुरंत दिखाई देता है। हाल के तनाव के बाद तेल कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर क्या फंसा है मामला?
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम का भंडार खत्म करे। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के पास 60 फीसदी तक संवर्धित करीब 440.9 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है। अमेरिका इसे बड़ी सुरक्षा चुनौती मान रहा है। हालांकि ईरान ने अभी सार्वजनिक रूप से यूरेनियम छोड़ने की पुष्टि नहीं की है। बताया जा रहा है कि संभावित समझौते में ईरान को प्रतिबंधों में राहत देने के बदले यूरेनियम भंडार कम करने का प्रस्ताव शामिल हो सकता है।

इस्राइल और हिजबुल्ला का विवाद क्यों बना चिंता?
संभावित युद्धविराम समझौते में लेबनान और हिजबुल्ला का मुद्दा भी बड़ा विवाद बना हुआ है। ईरान चाहता है कि लेबनान को भी किसी भी संघर्षविराम समझौते में शामिल किया जाए। दूसरी ओर इस्राइल ने साफ कहा है कि वह अपनी सुरक्षा के खिलाफ किसी खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा। इस्राइली प्रधानमंत्री ने लेबनान में सैन्य अभियान और तेज करने की बात कही है। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।



ट्रंप की अब्राहम अकॉर्ड योजना पर क्या चर्चा हुई?
ट्रंप ने बैठक में यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि सऊदी अरब, कतर, कुवैत और पाकिस्तान जैसे देश भी अब्राहम अकॉर्ड में शामिल हों। यह समझौता इस्राइल और अरब देशों के बीच संबंध सामान्य करने के लिए शुरू किया गया था। हालांकि कई अरब देश अब भी फलस्तीनी राज्य के मुद्दे को प्राथमिक शर्त मान रहे हैं। इसी वजह से इस योजना पर अभी सहमति बनती नहीं दिख रही।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह तनाव सिर्फ दो देशों का मामला नहीं रह गया है। इसका असर तेल बाजार, वैश्विक व्यापार, पश्चिम एशिया की स्थिरता और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ट्रंप प्रशासन जहां खुद को मजबूत स्थिति में दिखा रहा है, वहीं ईरान भी दबाव के बावजूद पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में समझौता होगा या पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ेगा।
 

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