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नेपाल में राजनीतिक संकट के बीच उच्चस्तरीय चीनी प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से की मुलाकात 

Mon, 28 Dec 2020 01:41 AM IST
Kuldeep Singh पीटीआई, काठमांडो
पीटीआई, काठमांडो Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 28 Dec 2020 01:41 AM IST
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High level Chinese delegation meets President Vidya Devi Bhandari amidst political crisis in Nepal
नेपाल की राष्ट्रपति - फोटो : ANI

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के उपमंत्री के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय चीनी प्रतिनिधिमंडल ने सत्तारूढ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच मतभेद दूर करने की कोशिशों के तहत पार्टी के शीर्ष नेताओं से मिलने से पहले रविवार को यहां राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मुलाकात की।

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नेपाल में आश्चर्यजनक तरीके से प्रतिनिधि सभा (नेपाली संसद का निचला सदन) भंग किए जाने और इस कारण राजनीतिक संकट पैदा होने के एक हफ्ते बाद चीनी प्रतिनिधिमंडल नेपाल की राजनीतिक स्थिति का जायजा लेने के लिए रविवार सुबह काठमांडो पहुंचा।
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प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के अंतरराष्ट्रीय विभाग के उप मंत्री गुओ येझु ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति भंडारी से मुलाकात की। समझा जाता है कि गुओ एनसीपी को टूटने से बचाने की कोशिश करने के लिए यहां आए हैं।
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राष्ट्रपति कार्यालय के एक अधिाकरी ने बताया कि उन्होंने दोनों देशों के सदियों पुराने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक एनसीपी के सभी वरिष्ठ नेताओं को व्यक्तिगत रूप से जानने वाले गुओ का सोमवार को प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली से मिलने का कार्यक्रम है।

सूत्रों ने बताया कि वह पूर्व प्रधानमंत्री एवं एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड, वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल, जिन्होंने पार्टी के प्रचंड नीत गुट में ओली की जगह ली है और जनता समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष बाबूराम भट्टाराई से मिलेंगे। हालांकि यहां स्थित चीनी दूतावास और विदेश मंत्रालय गुओ की यात्रा के बारे में चुप्पी साधे हुए है।

माय रिपब्लिका समाचार पत्र की खबर में कहा गया है गुओ की यात्रा का उद्देश्य प्रतिनिधि सभा भंग किए जाने और पार्टी में पहले से गहराई अंदरूनी कलह के बीच नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में विभाजन होने के बाद उभरी देश की राजनीतिक स्थिति का जायजा लेना है। सूत्रों के मुताबिक चीन, नेपाल की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी में विभाजन होने से खुश नहीं है।

काठमांडो पोस्ट की खबर के मुताबिक एनसीपी के सभी नेताओं को व्यक्तिगत तौर पर जानने वाले गुओ नेपाल में चार दिनों तक ठहरने के दौरान सत्तारूढ दल के दोनों गुटों के बीच मतभेद दूर करने की कोशिश करेंगे। इनमें एक गुट का नेतृत्व ओली कर रहे हैं जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व प्रचंड कर रहे हैं।

खबर में कहा गया है कि इससे पहले गुओ ने फरवरी 2018 में काठमांडो की यात्रा की थी, जब ओली नीत सीपीएन-यूएमएल और प्रचंड नीत एनसीपी (माओइस्ट सेंटर) का विलय होने वाला था और 2017 के आम चुनाव में उनके गठबंधन को मिली जीत के बाद एक एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी का गठन होने वाला था। मई 2018 में दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों का आपस में विलय हो गया और उन्होंने नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी नाम से एक नया राजनीतिक दल बनाया ।

पोस्ट की खबर में कहा गया है कि सत्तारूढ़ दल के एक नेता ने बताया कि गुओ एनसीपी के अंदर की स्थिति का जायजा लेंगे और दोनों गुटों को पार्टी की एकजुटता के लिए साझा आधार तलाशने की कोशिश करेंगे। वह चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग सहित चीनी नेतृत्व का संदेश भी नेपाली नेतृत्व को देंगे। पोस्ट ने सत्तारूढ़ दल के नेता के हवाले से कहा इसके अलावा चीनी पक्ष ने अपनी यात्रा के बारे में हमसे कुछ नहीं कहा है।

स्थायी समिति के एक सदस्य ने कहा कि चीन ने गुओ को ऐसे वक्त भेजा है जब एनसीपी संकट में है। उल्लेखनीय है कि नेपाल में पिछले रविवार को उस वक्त राजनीतिक संकट शुरू हो गया जब चीन के प्रति झुकाव रखने वाले ओली ने अचानक से एक कदम उठाते हुए 275 सदस्यीय सदन को भंग करने की सिफारिश कर दी। यह घटनाक्रम उनकी प्रचंड के साथ सत्ता की रस्साकशी के बीच हुआ।

प्रधानमंत्री की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति ने उसी दिन प्रतिनिधि सभा भंग कर दी और अगले साल अप्रैल एवं मई में नये चुनाव कराए जाने की घोषणा कर दी। इस पर एनसीपी के प्रचंड नीत गुट ने विरोध किया। प्रचंड एनसीपी के सह अध्यक्ष भी हैं।

काठमांडो पोस्ट की खबर के मुताबिक इस बीच भंडारी ने संसद के उच्च सदन नेशनल असेंबली का शीतकालीन सत्र एक जनवरी से बुलाने की घोषणा की है। राष्ट्रपति कार्यालय के सहायक प्रवक्ता केशव प्रसाद घिमिरे ने रविवार को एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति ने एक जनवरी शाम चार बजे नेशनल असेंबली का सत्र बुलाया है।

ओली नीत मंत्रिमंडल ने उच्च सदन का शीतकालीन सत्र बुलाने की शुक्रवार को सिफारिश की थी। इस हफ्ते की शुरुआत में नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यांकी ने प्रचंड और ओली धड़े के एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में गुओ के दौरे के बारे में जानकारी दी थी।

यह पहला मौका नहीं है जब चीन ने नेपाल के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप किया है। मई और जुलाई में होऊ ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और प्रचंड सहित एनसीपी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें की थी। उस वक्त ओली पर इस्तीफे के लिए दबाव बढ़ रहा था।

नेपाल के विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेताओं ने चीनी राजदूत की सत्तारूढ़ दल के नेताओं के साथ सिलसिलेवार बैठकों को नेपाल के अंदरूनी राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप बताया था। चीन के ‘ट्रांस-हिमालयन मल्टी डाइमेंशनल कनेक्टीविटी नेटवर्क’ सहित ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ के तहत अरबों डॉलर का निवेश किए जाने के साथ हाल के वर्षों में नेपाल में चीन का राजनीतिक दखल बढ़ा है।

चीनी राजदूत ने निवेश के अलावा ओली के लिए समर्थन जुटाने की भी कोशिशें की। काठमांडो पोस्ट के मुताबिक सीपीसी और एनसीपी नियमित रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल रहे हैं। पिछले साल सितंबर में एनसीपी ने एक संगोष्ठी का आयोजन कर नेपाली नेताओं को शी के विचारों के बारे में जानकारी देने के लिए सीपीसी नेताओं को काठमांडो आने का न्योता दिया था। चीनी राष्ट्रपति की प्रथम नेपाल यात्रा से पहले यह आयोजन किया गया था।


भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने नेपाल में तेजी से घटित हो रहे राजनीतिक घटनाक्रमों पर सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए बृहस्पतिवार को कहा था कि यह पड़ोसी देश (नेपाल) का अंदरूनी मामला है और इस बारे में उसी देश को अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के मुताबिक फैसला करना है।

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