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भारत के खजाने पर बढ़ेगा बोझ : कच्चा तेल महंगा होने से आयात बिल में होगी 15 फीसदी वृद्धि, एफडीआई घटा
Fri, 25 Feb 2022 07:50 AM IST
सुरेंद्र जोशी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Fri, 25 Feb 2022 07:50 AM IST
सार
रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और वह यूरोप की तेल कंपनियों को इसकी आपूर्ति करता है। वह यूरोप को अपनी करीब 35 फीसदी प्राकृतिक गैस भी निर्यात करता है। ताजा जंग के कारण यूरोप को तेल व गैस की आपूर्ति ठप हो सकती है।
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कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर के पार पहुंचा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूक्रेन व रूस के बीच जारी जंग का दुनियाभर के देशों पर असर पड़ेगा और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। कच्चा तेल 2014 के बाद पहली बार 1053 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इससे भारत का कच्चा तेल आयात बिल 15 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। उधर, अप्रैल से दिसंबर 2021 के बीच देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 10.6 फीसदी घटा है। इससे भी विदेशी मुद्रा कोष पर असर पड़ा है।
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यूक्रेन जंग के कारण तेल की आपूर्ति गड़बड़ाने का अंदेशा है। इससे भारत पर भी असर पड़ना तय है। यूक्रेन तनाव के कारण आठ साल बाद ब्रेंट क्रूड आइल के दाम पहली बार 105 डॉलर पर पहुंच गए हैं। रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और वह यूरोप की तेल कंपनियों को इसकी आपूर्ति करता है। वह यूरोप को अपनी करीब 35 फीसदी प्राकृतिक गैस भी निर्यात करता है। ताजा जंग के कारण यूरोप को तेल व गैस की आपूर्ति ठप हो सकती है।
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विश्व में कच्चे तेल की मांग बढ़ गई है और ओपेक ने उत्पादन घटा रखा है, इसलिए तेल के दाम और बढ़ने की आशंका है। रूस पर अंतरराष्ट्रीय पाबंदियां बढ़ने का भी विश्व अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर होगा। क्रिसिल रिसर्च की निदेशक हेतल गांधी के अनुसार विश्व के तेल निर्यात बाजार में रूस की 12 फीसदी हिस्सेदारी और यूक्रेन संकट के कारण कच्चे तेल के दाम आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं।
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जब तक ओपेक उत्पादन बढ़ाने का फैसला नहीं करता, तब तक कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा ही बने रहने के आसार हैं। बीते दिन माहों से ओपेक देश अपने उत्पादन लक्ष्य के अनुसार तेल नहीं निकाल रहे हैं। इसके कारण दाम पर असर पड़ा है। इसी तरह गैस के दामों पर भी असर पड़ेगा। ईंधन की आपूर्ति व उत्पादन में कमी के कारण इसके भी दाम बढ़ सकते हैं। आयातक देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
एफडीआई में आई कमी
उधर, देश में अप्रैल से दिसंबर 2021 के बीच 60.3 अरब डॉलर का एफडीआई आया है। यह पिछले साल के मुकाबले 10.6 फीसदी कम है। 2020 की इसी अवधि में यह 67.5 अरब डॉलर रहा था। इसी तरह भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश 43.1 अरब डॉलर रहा। यह 16 फीसदी कम है। 2020-21 में यह 51.4 अरब डॉलर रहा था। सरकार के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है।