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क्या है हागिया सोफिया का इतिहास, आखिर तुर्की ने इसे मस्जिद के रूप में क्यों बदला, जानें सबकुछ

Sat, 11 Jul 2020 02:31 PM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्तांबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्तांबुल Published by: अनवर अंसारी Updated Sat, 11 Jul 2020 02:31 PM IST
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Hagia Sophia: Turkey turns museum into mosque, Know all about History of Hagia Sophia and dispute
Hagia Sophia - फोटो : iStock

दुनियाभर में प्रसिद्ध इस्तांबुल की हागिया सोफिया संग्रहालय को अदालत ने फिर से मस्जिद में तब्दील करने का फैसला सुनाया है। तुर्की में छठी सदी में इसे गिरजाघर के रूप में बनाया गया था। कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन ने हागिया सोफिया को मस्जिद के रूप में खोलने की घोषणा भी कर दी। 

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इस इमारत को 1500 साल पहले, एक ऑर्थोडॉक्स ईसाई गिरजाघर के रूप में तैयार किया गया था, लेकिन मई 1453 में उस्मानी शासक महमद द्वितीय द्वारा इस्तांबुल पर कब्जा करते ही इस गिरजाघर को मस्जिद में तब्दील कर दिया गया था। 
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इस संग्रहालय को मस्जिद में तब्दील करने को लेकर तुर्की को अंतरराष्ट्रीय चेतावनी भी मिली थी, जिसमें कहा गया था कि 1500 वर्ष पुराने भवन की पहचान में कोई बदलाव न किया जाए। हागिया सोफिया 900 साल तक चर्च के रूप में पहचानी गई।
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इसके बाद 500 वर्षों तक मस्जिद के रूप में और फिर संग्रहालय के रूप में इसे जाना गया। इसे सन 1934 में संग्रहालय में बदला गया और अब इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर के रूप में जाना जाता है। 

राष्ट्रपित एर्दोगन ने कहा, 24 जुलाई से होगी नमाज

Hagia Sophia: Turkey turns museum into mosque, Know all about History of Hagia Sophia and dispute
Hagia Sophia - फोटो : iStock

तुर्की में इस्लामवादियों ने लंबे समय से इसे मस्जिद में बदलने का आह्वान किया था लेकिन धर्मनिरपेक्ष विपक्षी सदस्यों ने इस कदम का लगातार विरोध किया। हालांकि, अब तुर्की सरकार के इस प्रस्ताव को लेकर दुनियाभर में धार्मिक और राजनीतिक नेताओं ने आलोचना की है।

इन आलोचनाओं को लेकर खुद का बचाव करते हुए राष्ट्रपति एर्दोगन ने जोर देते हुए कहा है कि देश ने अपने संप्रभु अधिकार का इस्तेमाल किया है और इसकी मदद से इसे वापस एक मस्जिद में परिवर्तित कर दिया है। 

राष्ट्रपति ने संवाददाता सम्मेलन करते हुए कहा कि 24 जुलाई को परिसर में पहली मुस्लिम प्रार्थना की जाएगी यानी कि इस दिन से यहां नमाज पढ़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि देश की बाकी मस्जिदों की तरह, हागिया सोफिया के दरवाजे भी स्थानीय और विदेशी मुस्लिमों और गैर-मुस्लिमों के लिए खुले हुए हैं। 

हागिया सोफिया को मस्जिद के रूप में तब्दील किए जाने को लेकर तुर्की के अधिकारियों का कहना है कि इस इमारत के अंदर लगे ईसाई प्रतीकों को नहीं हटाया जाएगा। हागिया सोफिया में बदलाव करना काफी प्रतीकात्मक है। 

यह आधुनिक तुर्की के संस्थापक कमाल अतातुर्क थे, जिन्होंने फैसला किया कि यह एक संग्रहालय होना चाहिए। हालांकि, तुर्की के वर्तमान राष्ट्रपति अतार्तुक की धर्मनिरपेक्ष विरासत को खंडित करने में लगे हुए हैं। 

एर्दोगन ने इस फैसले को लेकर कोई दुख नहीं जताया है। उनका कहना है कि जो भी इस फैसले का विरोध करता है, फिर वो चाहे देश में हो या विदेश में, वह तुर्की की संप्रभुता पर हमला कर रहा है। 

देश-दुनिया में हो रही है इस कदम की आलोचना

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Hagia Sophia - फोटो : iStock

तुर्की द्वारा हागिया सोफिया को फिर से मस्जिद में बदलने के निर्णय की देश और दुनिया दोनों ही जगह आलोचना हो रही है। राष्ट्रपति के आलोचकों का कहना है कि वह कोविड-19 से अर्थव्यवस्था को हुई क्षति पर से लोगों का ध्यान हटाना चाहते हैं, इसलिए वह ऐसा कर रहे हैं। 

अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का कहना है कि यह इमारत मानवता के अधीन है, ना कि तुर्की के। इसलिए इस इमारत में कोई परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह दो विश्वासों के बीच एक पुल की तरह काम करता है और यह दो धर्मों के साथ-साथ फलने-फूलने का प्रतीक है। 

वहीं, हागिया सोफिया का यह विवाद ऐसे समय में आया है, जब तुर्की और ग्रीस के बीच कई मुद्दों पर कूटनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। इसी साल, मई महीने में ग्रीस ने पूर्व बाइजेंटाइन साम्राज्य पर ओटोमन साम्राज्य के आक्रमण की 567वीं  वर्षगांठ पर हागिया सोफिया संग्रहालय के अंदर कुरान के अंशों को पढ़ने पर आपत्ति जताई थी।

ग्रीस के विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा था कि तुर्की का यह कदम यूनेस्को के ‘विश्व सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण संबंधी कन्वेंशन’ का उल्लंघन है। इस विषय पर ग्रीस ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि हागिया सोफिया विश्व भर के लाखों ईसाईयों के लिए आस्था का केंद्र है। इसलिए तुर्की में इसका प्रयोग राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए नहीं होना चाहिए। 

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने अपने एक बयान में कहा कि हागिया सोफिया को तुर्की की परंपराओं और उसके विविध इतिहास के एक उदाहरण के रूप में बनाए रखा जाना चाहिए।

उन्होंने चेताया था कि हागिया सोफिया संग्रहालय की स्थिति में कोई भी बदलाव करने से अलग-अलग परंपराओं और संस्कृतियों के बीच एक ‘सेतु’ के रूप में सेवा करने की उसकी क्षमता को कमजोर करेगा।

यूनेस्को ने हागिया सोफिया को मस्जिद में बदलने के फैसले को लेकर दुख जताया है। इसने कहा है कि तुर्की के अधिकारी बिना देरी किए जल्दी से इस संबंध में संस्थान से बात करें। साथ ही आग्रह किया है कि तुर्की बिना चर्चा के इस संग्रहालय की स्थिति को न बदले। 

रूस में स्थित गिरजाघर ने तुर्की सरकार के इस फैसले पर दुख जताते हुए कहा है कि हागिया सोफिया पर शासन करने के अधिकार से कोर्ट को खुद को दूर रखना चाहिए। इसने कहा है कि कोर्ट का यह फैसला समाज को विभाजित करेगा। 

क्या है हागिया सोफिया का इतिहास

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Hagia Sophia - फोटो : istock

हागिया सोफिया इस्तांबुल और तुर्की के इतिहास को बयान करने वाला स्मारक है। इसे आयासोफिया के नाम से भी जाना जाता है। इस इमारत को सबसे पहले गिरजाघर के रूप में निर्मित किया गया था, लेकिन फिर इसे मस्जिद के रूप में बदल दिया गया है और आधुनिक तुर्की के समय में इसे संग्रहालय का रूप दिया गया। 

यह इमारत गिरजाघर से मस्जिद और मस्जिद से संग्रहालय की यात्रा करते हुए तुर्की के इतिहास और विरोधाभास दोनों का ही जीवंत दस्तावेज है। इस इमारत को तुर्की के धर्म-निरपेक्ष समाज के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।

इस्तांबुल की इस प्रतिष्ठित संरचना का निर्माण तकरीबन 532 ईस्वी में बाइजेंटाइन साम्राज्य के शासक जस्टिनियन के शासनकाल के दौरान शुरू हुआ, उस समय इस शहर को कॉन्सटेनटिनोपोल या कुस्तुंतुनिया के रूप में जाना जाता था।

इस प्रतिष्ठित इमारत को बनाने के लिए काफी उत्तम किस्म की निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया था और इस कार्य में उस समय के सबसे बेहतरीन कारीगरों को लगाया गया था। इसे उस समय की अभियांत्रिकी का नायाब नमूना कहा गया था।  

गिरजाघर के रूप में इस ढांचे का निर्माण लगभग पांच वर्षों यानी 537 ईस्वी में पूरा हो गया। यह इमारत उस समय ऑर्थोडॉक्स इसाईयत के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र थी और कुछ ही समय में यह बाइजेंटाइन साम्राज्य की स्थापना का प्रतीक बन गया। 

यह इमारत लगभग 900 वर्षों तक ऑर्थोडॉक्स इसाईयत के लिए एक महत्त्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित रही, किंतु वर्ष 1453 में जब इस्लाम को मानने वाले ओटोमन साम्राज्य के सुल्तान मेहमद द्वितीय ने कुस्तुंतुनिया पर कब्जा कर लिया, तब इस शहर का नाम बदलकर इस्तांबुल कर दिया गया।

537 ईस्वी में अपने निर्माण से लेकर सन् 1453 तक हागिया सोफिया अपनी वास्तुकला के साथ ही एक गिरिजाघर के रूप में ही कायम रही। लेकिन महमद द्वितीय द्वारा इस्तांबुल पर कब्जा करते ही इस गिरजाघर को मस्जिद में तब्दील कर दिया गया।

हमलावर ताकतों ने हागिया सोफिया में काफी तोड़फोड़ की और कुछ समय बाद इसे मस्जिद में बदल दिया गया, मस्जिद के रूप में परिवर्तन होने के पश्चात् स्मारक की संरचना में कई आंतरिक और बाह्य परिवर्तन किए गए और वहां से सभी रूढ़िवादी प्रतीकों को हटा दिया गया था, साथ ही इस संरचना के बाहरी हिस्सों में मीनारों का निर्माण किया गया।

1453 से 1931 तक ये इमारत मस्जिद ही रही। फिर 1931 में जब तुर्की गणराज्य बन गया था, तब मुस्तफा कमाल पाशा, यानी कमाल अतातुर्क ने इसे संग्रहालय में बदल कर आमजन के लिए खोलने का आदेश दिया। 

1935 से ये इमारत एक संग्रहालय के रूप में अब तुर्की आने वाले सर्वाधिक पर्यटकों को आकर्षित करने वाला केंद्र है। ये एक अनूठी इमारत है जिसमें ईसा-मसीह और मदर मैरी भी दीवारों पर दिख जाते हैं और कुरान की आयतें और मिहराब भी। अतार्तुक की तरफ से यह कदम इसलिए उठाया गया था, ताकि वह तुर्की को अधिक धर्मनिरपेक्ष देश बना सके। 

इस फैसले से अपना खोया हुआ राजनीतिक समर्थन हासिल करना चाहते हैं एर्दोगन

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Hagia Sophia - फोटो : iStock

तुर्की के वर्तमान राष्ट्रपति एर्दोगन ने जब राजनीति में अपना पहला कदम रखा, तभी से उनका प्रमुख एजेंडा यही था कि हागिया सोफिया को फिर से मस्जिद में तब्दील करना है। हालांकि, तुर्की के आधुनिक इतिहासकारों ने बताया कि एर्दोगन ने अपनी राजनीति की शुरुआत में पहले हागिया सोफिया को मस्जिद के रूप में बदलने की मांग पर आपत्ति जताई, लेकिन उन्हें इस्तांबुल नगरपालिका चुनावों में हार मिली, इसके बाद उन्होंने अपना पक्ष बदल दिया। 

वहीं, तुर्की के हागिया सोफिया के मस्जिद में बदलने के पीछे अमेरिका के एक कदम का भी हाथ है। दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब इस्राइल की राजधानी के रूप में येरुशलम को मान्यता दी तो, एर्दोगन भी हागिया सोफिया को मस्जिद के रूप में बदलने को लेकर मुखर हो गए। 

गौरतलब है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले से अरब जगत में खलबली मच गई थी। हालांकि, जानकारों का कहना है कि हागिया सोफिया को संग्रहालय से मस्जिद के रूप में बदलना एर्दोगन के राजनीतिक प्रतिष्ठा प्राप्त करने की इच्छा से काफी हद तक जुड़ा हुआ है। 

एर्दोगन ऐसा करके अपने खोए हुए राजनीतिक समर्थन को फिर से प्राप्त करना चाहते हैं, जो इस्तांबुल के नगरपालिका चुनावों के बाद से लगातार कम हो रहा है। साथ ही वह तुर्की के युवाओं के बीच फिर से लोकप्रिय होना चाहते हैं। 

हागिया सोफिया की वर्तमान में क्या है भूमिका

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Hagia Sophia - फोटो : iStock

ओटोमन साम्राज्य के पतन के लगभग 100 साल बाद भी हागिया सोफिया की भूमिका राजनीति और धर्म में विवादास्पद बनी हुई है। 1935 में सरकार द्वारा इसे संग्रहालय के रूप में नामित किए जाने के बाद से यहां हर साल 30 लाख लोग पहुंचते हैं। 

हालांकि, 2013 से, देश में कुछ इस्लामी नेताओं की मांग थी कि हागिया सोफिया को फिर से मस्जिद के रूप में खोला जाए। ऐसा नहीं है कि केवल धर्म को लेकर ही यह विवाद था। 21वीं सदी की शुरुआत के बाद से ही तुर्की के समाज में राष्ट्रीयता की भावना जागृत हुई है, जिसमें ओटोमन साम्राज्य के इतिहास को प्रमुखता दी जा रही है। 

इसका उदाहरण यह है कि कुछ लोगों का मानना है कि ओटोमन साम्राज्य द्वारा इस्तांबुल और हागिया सोफिया पर कब्जा करने को याद करने के लिए इस संग्रहालय को मस्जिद के रूप में बदलना चाहिए। 
 

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