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Gurdeep Randhawa: जर्मनी में भारतीय समुदाय के पहले प्रतिनिधि चुने गए गुरदीप सिंह रंधावा, उनके बारे में जानिए
Wed, 17 Aug 2022 05:17 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 17 Aug 2022 05:17 PM IST
सार
गुरदीप सिंह रंधावा का काम भारतीय समुदाय की चिंताओं को उठाना और साथ ही उन्हें राजनीतिक रूप से सक्रिय होने के लिए प्रोत्साहित करना है।
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गुरदीप सिंह रंधावा
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
गुरदीप सिंह रंधावा को बुधवार को जर्मनी में भारतीय समुदाय के पहले प्रतिनिधि के रूप में चुना गया है। रंधावा जर्मनी के क्रिश्चियन डेमोक्रटिक यूनियन (सीडीयू) थुरिंगिया के पहले भारतीय प्रतिनिधि हैं।
सीडीयू जर्मनी की सबसे मजबूत राजनीतिक पार्टी है, जिसका नेतृत्व वर्तमान में फ्रेडरिक मर्ज कर रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से यह पार्टी सबसे ज्यादा समय सत्ता में रही है।
रंधावा का काम भारतीय समुदाय की चिंताओं को उठाना और साथ ही उन्हें राजनीतिक रूप से सक्रिय होने के लिए प्रोत्साहित करना है।
62 वर्षीय उद्यमी रंधावा वाचसेनबर्ग जिले में स्थानीय सीडीयू संघ के सदस्य प्रतिनिधि हैं, जहां वे स्थानीय परिषद के सदस्य भी हैं। वह अभी भी अपने मूल देश भारत के साथ न केवल व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं बल्कि वहां मानवीय कार्यों (खासकर सिखों और पंजाब के लोगों के अधिकारों) में भी शामिल रहे हैं।
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अपनी नई भूमिका को लेकर रंधावा ने कहा, मेरे लिए यह महत्वपूर्ण है कि समाज में वास्तविक एकजुटता हो। यह विभिन्न संस्कृतियों पर भी लागू होता है जो हमारे देश को एकजुट करती हैं। जर्मनी में रहने वाली कई पीढ़ियां हैं। मैं जर्मन और भारतीय संस्कृति के साथ रहा हूं। मैं उनके समर्थन से राजनीतिक स्तर पर नए विचारों को लाना चाहता हूं।
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सीडीयू जर्मनी की सबसे मजबूत राजनीतिक पार्टी है, जिसका नेतृत्व वर्तमान में फ्रेडरिक मर्ज कर रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से यह पार्टी सबसे ज्यादा समय सत्ता में रही है।
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रंधावा का काम भारतीय समुदाय की चिंताओं को उठाना और साथ ही उन्हें राजनीतिक रूप से सक्रिय होने के लिए प्रोत्साहित करना है।
62 वर्षीय उद्यमी रंधावा वाचसेनबर्ग जिले में स्थानीय सीडीयू संघ के सदस्य प्रतिनिधि हैं, जहां वे स्थानीय परिषद के सदस्य भी हैं। वह अभी भी अपने मूल देश भारत के साथ न केवल व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं बल्कि वहां मानवीय कार्यों (खासकर सिखों और पंजाब के लोगों के अधिकारों) में भी शामिल रहे हैं।
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अपनी नई भूमिका को लेकर रंधावा ने कहा, मेरे लिए यह महत्वपूर्ण है कि समाज में वास्तविक एकजुटता हो। यह विभिन्न संस्कृतियों पर भी लागू होता है जो हमारे देश को एकजुट करती हैं। जर्मनी में रहने वाली कई पीढ़ियां हैं। मैं जर्मन और भारतीय संस्कृति के साथ रहा हूं। मैं उनके समर्थन से राजनीतिक स्तर पर नए विचारों को लाना चाहता हूं।