येरुशलम में अमेरिकी दूतावास का विरोध जारी, ट्रंप ने भी सेना को गोलीबारी से नहीं रोका

न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस Updated Wed, 16 May 2018 10:04 AM IST
Protest Continuous in Jerusalem against American Ambassador
ख़बर सुनें
इस्राइल में अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से येरुशलम स्थानांतरित करने के दौरान भड़के खूनी संघर्ष में 59 फलस्तीन नागरिकों के मारे जाने के बाद भी गाजा पट्टी इलाके में विरोध के सुर कम नहीं हुए हैं। यहां एक तरफ फलस्तीनी लोग नकबा की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं जिसके तहत 1948 में इस्राइल निर्माण के वक्त आज ही के दिन सात लाख फलस्तीनी अपना घर बार यहां से छोड़कर भागे थे और दूसरी तरफ सोमवार को खूनी संघर्ष में मारे गए 59 लोगों का अंतिम संस्कार भी यहां होना है। दोनों ही परिस्थितियों में इलाके के भीतर कभी भी हिंसा भड़क सकती है।  
फलस्तीन के लोगों ने अमेरिकी कदम को एक आपदा के रूप में लिया है और अमेरिका द्वारा येरुशलम को इस्राइल की राजधानी के बतौर मान्यता देने की कोशिशों की व्यापक स्तर पर निंदा करते हुए मंगलवर को आम हड़ताल की घोषणा की गई है। यहां सोमवार को मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार के वक्त भीड़ जुटना तय है। ऐसे में नकबा की वर्षगांठ आग में घी का काम करेगी। अमेरिका को भी आशंका है कि गाजा पट्टी में खूनी संघर्ष बढ़ सकता है। गाजा में हमास के उप प्रमुख खलील अल-हैय ने अमेरिका पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए नतीजा भुगतने की धमकी दी है।
 
फलस्तीन क्षेत्र पर शासन करने वाले इस्लामी गुट हमास ने सोमवार की घटना को नरसंहार बताया है जबकि वेस्ट बैंक में फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने भी इसे नरसंहार करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इसे मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करार दिया है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि खूनी संघर्ष में मारे गए 59 लोगों में से अधिकांश लोग इस्राइली स्नाइपर्स की गोली की भेंट चढ़े हैं जिनमें 16 साल से कम उम्र के आठ बच्चे भी शामिल हैं। 

ट्रंप ने कुछ नहीं किया

वाशिंगटन के ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन थिंक टैंक में फलस्तीन नेतृत्व के पूर्व सलाहकार खालिद एल्गींडी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले को शांत करने के लिए कुछ भी नहीं किया, उन्हें कम से कम इस्राइली सेना को फलस्तीन प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी करने से रोकना चाहिए था। 

Recommended

Spotlight

Most Read

Gulf Countries

अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरानी अर्थव्यवस्था धड़ाम, 16 पैसे के बराबर हुआ एक रियाल

अमेरिका की तरफ से 2015 में किया गया परमाणु समझौता इस साल मई में तोड़ने के बाद ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों का असर दिखने लगा है।

29 जुलाई 2018

Related Videos

शिक्षक ठग गिरफ्तार सहित यूपी/उत्तराखंड की सारी खबरें

शिक्षक ठग गिरफ्तार सहित यूपी/उत्तराखंड की सारी खबरें

15 अगस्त 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree