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रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में बोलने वालों के हो रहे हैं पोस्ट डिलीट
बीबीसी, हिंदी
Updated Sat, 23 Sep 2017 03:53 PM IST
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Rohingya
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म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के पलायन और हिंसा का दौर शुरू होने के साथ ही सोशल मीडिया पर चल रही रोहिंग्या समर्थित पोस्ट को डिलीट किया जा रहा है। सवाल उठने लगा है कि आखिर कौन है जो इन पोस्ट को डिलीट कर रहा है?
शाह हुसैन रोहिंग्या मुसलमानों के एक प्रमुख कार्यकर्ता हैं, वे सऊदी अरब में रहते हैं। वे साल 2010 से एक फेसबुक पेज चला रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वक्त से उनकी वे पोस्ट डिलीट कर दी जा रही हैं जिनमें रोहिंग्या मुसलमानों के साथ हो रही हिंसा के बारे में बताया गया हो।
डिलीट हो रही हैं फेसबुक पोस्ट
उनकी ज्यादातर पोस्ट में ग्राफिक्स के जरिए हिंसा को दर्शाया जाता है। फेसबुक की गाइडलाइन के अनुसार हिंसा की उन पोस्ट को डिलीट कर दिया जाता है जिनमें हिंसा को जश्न या सुखद आनंद के रूप में दर्शाया गया हो लेकिन अगर कोई पोस्ट सार्वजनिक हित में है तो फेसबुक उसे मान्यता देता है।
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बीबीसी से बात करते हुए हुसैन ने कहा, ''हमें रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रही हिंसा से जुड़ी बहुत तस्वीरें मिल रही हैं, वे सभी ग्राफिक्स के रूप में हैं। अगर हम दुनिया को ये ग्राफिक्स भी नहीं दिखाएंगे तो फिर क्या दिखाएंगे?''
पोस्ट के डिलीट होने का मसला सिर्फ फेसबुक तक ही सीमित नहीं है। शाह हुसैन का अराकन न्यूज एजेंसी नाम से एक यू ट्यूब चैनल भी है। हुसैन बताते हैं कि उनके यू-ट्यूब चैनल के 60 हजार सब्सक्राइबर थे, लेकिन अचानक ही यू ट्यूब ने उनके चैनल को डिलीट कर दिया।
जब बीबीसी ने यू ट्यूब से इस संबंध में बात की तो उन्होंने बताया कि इस चैनल से जुड़ी बहुत ज्यादा शिकायतें एक साथ प्राप्त होने के कारण चैनल को बंद करना पड़ा। लेकिन वे इसे दोबारा शुरू करने का फैसला ले रहे हैं।
पिछले एक महीने के भीतर लगभग 4 लाख रोहिंग्या मुसलमान रखाइन प्रांत से पलायन कर बांग्लादेश की तरफ जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस पर चिंता व्यक्त की है। मानवाधिकार समूहों के अनुसार सेना ने रोहिंग्या मुसलमानों के गांव जला दिए हैं। वहीं सेना के अनुसार वे आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
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शाह हुसैन रोहिंग्या मुसलमानों के एक प्रमुख कार्यकर्ता हैं, वे सऊदी अरब में रहते हैं। वे साल 2010 से एक फेसबुक पेज चला रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वक्त से उनकी वे पोस्ट डिलीट कर दी जा रही हैं जिनमें रोहिंग्या मुसलमानों के साथ हो रही हिंसा के बारे में बताया गया हो।
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डिलीट हो रही हैं फेसबुक पोस्ट
उनकी ज्यादातर पोस्ट में ग्राफिक्स के जरिए हिंसा को दर्शाया जाता है। फेसबुक की गाइडलाइन के अनुसार हिंसा की उन पोस्ट को डिलीट कर दिया जाता है जिनमें हिंसा को जश्न या सुखद आनंद के रूप में दर्शाया गया हो लेकिन अगर कोई पोस्ट सार्वजनिक हित में है तो फेसबुक उसे मान्यता देता है।
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बीबीसी से बात करते हुए हुसैन ने कहा, ''हमें रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रही हिंसा से जुड़ी बहुत तस्वीरें मिल रही हैं, वे सभी ग्राफिक्स के रूप में हैं। अगर हम दुनिया को ये ग्राफिक्स भी नहीं दिखाएंगे तो फिर क्या दिखाएंगे?''
पोस्ट के डिलीट होने का मसला सिर्फ फेसबुक तक ही सीमित नहीं है। शाह हुसैन का अराकन न्यूज एजेंसी नाम से एक यू ट्यूब चैनल भी है। हुसैन बताते हैं कि उनके यू-ट्यूब चैनल के 60 हजार सब्सक्राइबर थे, लेकिन अचानक ही यू ट्यूब ने उनके चैनल को डिलीट कर दिया।
जब बीबीसी ने यू ट्यूब से इस संबंध में बात की तो उन्होंने बताया कि इस चैनल से जुड़ी बहुत ज्यादा शिकायतें एक साथ प्राप्त होने के कारण चैनल को बंद करना पड़ा। लेकिन वे इसे दोबारा शुरू करने का फैसला ले रहे हैं।
पिछले एक महीने के भीतर लगभग 4 लाख रोहिंग्या मुसलमान रखाइन प्रांत से पलायन कर बांग्लादेश की तरफ जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस पर चिंता व्यक्त की है। मानवाधिकार समूहों के अनुसार सेना ने रोहिंग्या मुसलमानों के गांव जला दिए हैं। वहीं सेना के अनुसार वे आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
क्या था इन पोस्ट में?
शाह हुसैन
- फोटो : Shah hussain
शाह हुसैन की जिन पोस्ट को फेसबुक से डिलीट किया गया है वे काफी हद तक ग्राफिक्स थी। एक पोस्ट में कुछ पुरुषों को गड्ढा खोदते हुए दिखाया जा रहा था, वे एक महिला की लाश के लिए कब्र खोद रहे थे।
एक वीडियो में एक युवक नग्न अवस्था में था, उसके सिर पर गहरा घाव था। इस वीडियो में एक आदमी बता रहा था कि जब इस युवक के गांव को आग लगाई गई तब यह लड़का भी जल गया।
बीबीसी स्वतंत्र तरीके से इन वीडियो की प्रामाणिकता की जांच नहीं कर पाया है। शाह हुसैन अकेले नहीं है जिनके फेसबुक पेज से ऐसी पोस्ट डिलीट की जा रही हैं, जर्मनी में रहने वाले रोहिंग्या कार्यकर्ता नेय सेन ल्विन की फेसबुक पोस्ट भी डिलीट की गई हैं।
कविताएं भी कर दी गई डिलीट
यहां तक की उनकी पोस्ट में सिर्फ टेक्स्ट ही था वे किसी ग्राफिक्स का भी प्रयोग नहीं कर रहे थे। उन्होंने अपनी पोस्ट में म्यांमार की सेना से कुछ सवाल पूछे गए थे और कुछ कविताएं लिखी गई थी।
नेय सेन ल्विन बताते हैं कि कुआलांम्पुर में रहने वाले उनके एक साथी ने अंग्रेजी में रोहिंग्या हिंसा से जुड़ी साधारण जानकारियां ही पोस्ट की थी, लेकिन फेसबुक ने ये पोस्ट डिलीट कर दीं और उनके अकाउंट को 72 घंटे के लिए फ्रीज कर दिया गया।
फेसबुक पर ल्विन के हजारों फॉलोअर हैं। ल्विन को उनकी फेसबुक पोस्ट पर कई लोगों ने जान से मारने की धमकियां भी दी हैं।
एक वीडियो में एक युवक नग्न अवस्था में था, उसके सिर पर गहरा घाव था। इस वीडियो में एक आदमी बता रहा था कि जब इस युवक के गांव को आग लगाई गई तब यह लड़का भी जल गया।
बीबीसी स्वतंत्र तरीके से इन वीडियो की प्रामाणिकता की जांच नहीं कर पाया है। शाह हुसैन अकेले नहीं है जिनके फेसबुक पेज से ऐसी पोस्ट डिलीट की जा रही हैं, जर्मनी में रहने वाले रोहिंग्या कार्यकर्ता नेय सेन ल्विन की फेसबुक पोस्ट भी डिलीट की गई हैं।
कविताएं भी कर दी गई डिलीट
यहां तक की उनकी पोस्ट में सिर्फ टेक्स्ट ही था वे किसी ग्राफिक्स का भी प्रयोग नहीं कर रहे थे। उन्होंने अपनी पोस्ट में म्यांमार की सेना से कुछ सवाल पूछे गए थे और कुछ कविताएं लिखी गई थी।
नेय सेन ल्विन बताते हैं कि कुआलांम्पुर में रहने वाले उनके एक साथी ने अंग्रेजी में रोहिंग्या हिंसा से जुड़ी साधारण जानकारियां ही पोस्ट की थी, लेकिन फेसबुक ने ये पोस्ट डिलीट कर दीं और उनके अकाउंट को 72 घंटे के लिए फ्रीज कर दिया गया।
फेसबुक पर ल्विन के हजारों फॉलोअर हैं। ल्विन को उनकी फेसबुक पोस्ट पर कई लोगों ने जान से मारने की धमकियां भी दी हैं।
सरकार का हाथ होने का शक
रोहिंग्या
- फोटो : File Photo
ल्विन को लगता है कि उनकी फेसबुक पोस्ट डिलीट होने के पीछे म्यांमार सरकार का हाथ हो सकता है, म्यांमार की सरकार किसी खास अभियान के तहत सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट फैलने से रोकना चाहती है।
हालांकि इन आरोपों को साबित करना मुश्किल है लेकिन मानवाधिकार समूहों का भी यही मानना है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की बर्मा में शोधार्थी लॉरा हैग ने बताया, ''हमें बहुत से रोहिंग्या कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनके फेसबुक और ट्विटर अकाउंट से कई पोस्ट डिलीट कर दी गई हैं।''
वे कहती हैं, ''ये पोस्ट किसके जरिए डिलीट की जा रही हैं, यह पता लगा पाना मुश्किल है, ऐसा हो सकता है कि शायद फेसबुक और ट्विटर को इन पोस्ट से जुड़ी कई शिकायतें प्राप्त होती होंगी, इसलिए ये डिलीट की जाती हैं। लॉरा कहती हैं, ''ये एक तरह के प्रोपेगेंडा वॉर का हिस्सा है जो पर्दे के पीछे चल रहा है।''
हालांकि इन आरोपों को साबित करना मुश्किल है लेकिन मानवाधिकार समूहों का भी यही मानना है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की बर्मा में शोधार्थी लॉरा हैग ने बताया, ''हमें बहुत से रोहिंग्या कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनके फेसबुक और ट्विटर अकाउंट से कई पोस्ट डिलीट कर दी गई हैं।''
वे कहती हैं, ''ये पोस्ट किसके जरिए डिलीट की जा रही हैं, यह पता लगा पाना मुश्किल है, ऐसा हो सकता है कि शायद फेसबुक और ट्विटर को इन पोस्ट से जुड़ी कई शिकायतें प्राप्त होती होंगी, इसलिए ये डिलीट की जाती हैं। लॉरा कहती हैं, ''ये एक तरह के प्रोपेगेंडा वॉर का हिस्सा है जो पर्दे के पीछे चल रहा है।''