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भारत की बढ़ती समुद्री ताकत: US-इस्राइल और यूरोप के रुख क्या, वैश्विक व्यापार की सुरक्षा में भूमिका कितनी अहम?

Tue, 21 Jul 2026 04:36 AM IST
ज्योति भास्कर एजेंसी, यरूशलम।
एजेंसी, यरूशलम। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 21 Jul 2026 04:36 AM IST
सार

  • बढ़ रही भारत की समुद्री ताकत को अमेरिका, इस्राइल और यूरोप भी स्वीकार करते हैं।
  • यरूशलम पोस्ट में दावा- भारत अब वैश्विक व्यापार की सुरक्षा में बड़ी ताकत बन रहा है।

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Growing Maritime Power of India know US Israel and Europe stances role in securing global trade crucial report
भारत-अमेरिका के बीच सबसे ज्यादा व्यापार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और लाल सागर में कारोबारी जहाजों पर हूती विद्रोहियों की ओर से किए जा रहे लगातार हमलों के बीच भारत की समुद्री ताकत तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही है। भारत की बढ़ती नौसैनिक क्षमता सिर्फ इस्राइल ही नहीं, बल्कि अमेरिका और यूरोप के रणनीतिक हितों के लिए भी बेहद अहम बन गई है। इस्राइली अखबार द येरूशलम पोस्ट में प्रकाशित एक लेख में इस बदलाव को भारत का मैरीटाइम मोमेंट यानी समुद्री शक्ति का नया दौर बताया गया है।

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समुद्री व्यापार मार्गों की निगरानी अहम
लेख के अनुसार, आज सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि समुद्री रास्तों पर किसका नियंत्रण है, बल्कि यह है कि उन्हें सुरक्षित रखने की क्षमता किसके पास है। भारत हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित है। इसकी पश्चिमी सीमा फारस की खाड़ी और लाल सागर को जोड़ने वाले समुद्री मार्गों के पास है। जबकि अंडमान-निकोबार द्वीप समूह मलक्का जलडमरूमध्य की निगरानी करता है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
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ईरान-अमेरिका जंग के बीच होर्मुज की चर्चा क्यों?
होर्मुज जलडमरूमध्य, बाब-अल-मंदेब और मलक्का जलडमरूमध्य आज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हैं। अगर इनमें से किसी एक में भी रुकावट आती है तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, माल ढुलाई महंगी हो सकती है और पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। बीते कुछ महीनों में यमन के हूती विद्रोहियों के जहाजों पर हमलों और ईरान से जुड़े तनाव ने यह खतरा साफ दिखाया है।
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समुद्री सुरक्षा देने वाला देश बना भारत
लेख में कहा गया कि भारत अब केवल ऊर्जा आयात करने वाला बड़ा देश नहीं है, बल्कि समुद्री सुरक्षा देने वाला देश भी बन रहा है। 2008 से भारतीय नौसेना अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती के खिलाफ अभियान चला रही है। साल 2024 में बढ़ते समुद्री खतरों के दौरान भारत ने 30 से अधिक युद्धपोत तैनात किए, कई व्यापारी जहाजों को सुरक्षा दी और सैकड़ों नाविकों को बचाया। यह मदद किसी एक देश तक सीमित नहीं थी।

मिलकर काम कर रहे भारत-इस्राइल
पौशाली लास ने अपने लेख में कहा, भारत और इस्राइल के संबंध अब केवल रक्षा खरीद तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश रक्षा उत्पादन और नई तकनीक के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर इस्राइल की रक्षा कंपनी राफेल अब भारत में आयरन डोम इंटरसेप्टर बनाने की तैयारी कर रही है। इससे दोनों देशों की रक्षा आपूर्ति शृंखला और मजबूत होगी।


खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध कैसे?
संतुलित विदेश नीति भारत की ताकत लेख में कहा गया कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी संतुलित विदेश नीति है। भारत एक साथ इस्राइल, अमेरिका, खाड़ी देशों, यूरोप और अफ्रीका के साथ अच्छे संबंध बनाए हुए है। यही वजह है कि बदलते वैश्विक माहौल में भारत को एक भरोसेमंद और जिम्मेदार समुद्री सुरक्षा साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।

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