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Singapore: सिंगापुर में 1800 साल पुराने श्री सिवन मंदिर में भव्य अभिषेक समारोह, 20,000 श्रद्धालुओं हुए शामिल
Tue, 10 Jun 2025 07:55 AM IST
शुभम कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
Published by: शुभम कुमार
Updated Tue, 10 Jun 2025 07:55 AM IST
सार
सिंगापुर के प्राचीन श्री सिवन मंदिर में भव्य अभिषेक समारोह हुआ, जिसमें 20,000 से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री के. षणमुगम ने समारोह की पट्टिका का अनावरण किया। सात दिन तक चले कुंभाभिषेकम में मंदिर की छत से पवित्र जल गिराकर ऊर्जाप्रदान किया गया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : freepik
विस्तार
सिंगापुर के सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में शामिल श्री सिवन मंदिर अभिषेक समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान 1,800 की शताब्दी से भी पुराने इस मंदिर में 20,000 से अधिक श्रद्धालु जुटे। राष्ट्रीय सुरक्षा समन्वय मंत्री व गृह मंत्री के. षणमुगम गेलांग ईस्ट मंदिर के नाम से मशहूर मंदिर में श्रद्धालुओं के साथ शामिल हुए। वह बोले, आज का अभिषेक समारोह महत्वपूर्ण है, क्योंकि सिंगापुर में हिंदू समुदाय के दिल में इस मंदिर का विशेष स्थान है।
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षणमुगन ने किया समारोह का अनावरण
षणमुगम ने समारोह की पट्टिका का अनावरण भी किया। सुबह 7 बजे से ही मंदिर के बाहर विशेष रूप से बनाए गए तंबुओं में पहुंचे श्रद्धालु महाकुंभाभिषेकम का बेसब्री से इंतजार करने लगे। यह मंदिर की छत पर बर्तनों से पवित्र जल डालने की प्रक्रिया है।
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कुंभम कहे जाने वाले पात्रों में जल भरा जाता है और लगातार सात दिन तक संस्कृत मंत्रों के जाप के माध्यम से इन्हें ऊर्जाप्रदान की जाती है। द स्ट्रेट्स टाइम्स के मुताबिक, हिंदू बंदोबस्ती बोर्ड ने कहा कि मंदिर में 26 जुलाई तक 48 दिन प्रार्थना, अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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षणमुगन ने किया समारोह का अनावरण
षणमुगम ने समारोह की पट्टिका का अनावरण भी किया। सुबह 7 बजे से ही मंदिर के बाहर विशेष रूप से बनाए गए तंबुओं में पहुंचे श्रद्धालु महाकुंभाभिषेकम का बेसब्री से इंतजार करने लगे। यह मंदिर की छत पर बर्तनों से पवित्र जल डालने की प्रक्रिया है।
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कुंभम कहे जाने वाले पात्रों में जल भरा जाता है और लगातार सात दिन तक संस्कृत मंत्रों के जाप के माध्यम से इन्हें ऊर्जाप्रदान की जाती है। द स्ट्रेट्स टाइम्स के मुताबिक, हिंदू बंदोबस्ती बोर्ड ने कहा कि मंदिर में 26 जुलाई तक 48 दिन प्रार्थना, अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।