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India-Norway: भारत-नॉर्वे ने जोड़ा पर्वतों का साथ, हिमालय-आल्पाइन क्षेत्र में सतत विकास की नई उड़ान

Tue, 10 Jun 2025 06:15 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून/ट्रॉन्डहैम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून/ट्रॉन्डहैम Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 10 Jun 2025 06:15 AM IST
सार

हेस्को और नॉर्वे के सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी ने हिमालय और आल्पाइन पर्वतीय क्षेत्रों के बीच तकनीकी नवाचार व समुदाय-आधारित सतत विकास के लिए समझौता किया। डॉ. अनिल जोशी व टीम ने इस महत्वपूर्ण सहयोग पर हस्ताक्षर किए।

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India-Norway joined hands with mountains, new flight of sustainable development in the Himalayan-Alpine region
हिमालय - फोटो : freepic

विस्तार

भारत के हिमालयी पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संगठन (हेस्को) और नॉर्वे के सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी ने दुनिया के दो महत्वपूर्ण पर्वतीय पारिस्थितिक क्षेत्रों हिमालय और आल्पाइन के बीच पारस्परिक सहयोग के लिए समझौता किया है। यह समझौता तकनीकी नवाचार और समुदाय-आधारित सतत विकास को बढ़ावा देगा।
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हेस्को की ओर से डॉ. अनिल जोशी और डॉ. शिवम जोशी ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जबकि सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी की ओर से डॉ. क्रिस्टियन म्जोएन, डॉ. समाह एलसादी, तोरुन हर्नेसे ब्जेरकेम और जोहान ईनार ब्जेरकेम ने भाग लिया। 
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समझौते में इन बिंदुओं पर होगा विशेष जोर
समझौते के तहत हेस्को के ग्रॉस एनवायरनमेंटल प्रोडक्ट (जीईपी) मॉडल को नॉर्वे के सीएसआर डिजिटल क्रेडिट्स और स्थानीय विकास ढांचे में लागू किया जाएगा। इसके अलावा समुदाय-आधारित नवाचारों में साझेदारी, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी, उत्पाद ब्रांडिंग और संसाधन प्रबंधन में सहयोग बढ़ेगा।  


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डॉ. अनिल जोशी ने कहा, अब वक्त आ गया है कि हम सब प्रकृति की रक्षा के लिए एकजुट हों। हिमालय और आल्पाइन क्षेत्र केवल वायु, जल और मिट्टी के स्रोत नहीं हैं। ये संपूर्ण मानवता के लिए जीवन-समर्थक प्रणालियां हैं।
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