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गूगल: ओपन वेब से बना साम्राज्य, एआई से उसी की घेराबंदी, डिजिटल पब्लिशर्स का ट्रैफिक 40% तक गिरा
Wed, 22 Jul 2026 06:12 AM IST
राकेश कुमार
एजेंसी,सान फ्रांसिस्को।
एजेंसी,सान फ्रांसिस्को।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 22 Jul 2026 06:12 AM IST
सार
दो दशक तक ओपन वेब और हाइपरलिंक के दम पर इंटरनेट पर राज करने वाला गूगल अब अपने एआई मोड और जेमिनी चैटबॉट के ज़रिए यूजर्स को अन्य वेबसाइटों पर जाने से रोक रहा है। एआई द्वारा सीधे जवाब तैयार करने की वजह से गूगल 'जीरो सर्च' के दौर में पहुंच रहा है, जिससे मीडिया, बैंक और खुदरा वेबसाइटों का ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
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गूगल (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : एआई जनरेटेड
विस्तार
दो दशक पहले जब गूगल ने अपना साम्राज्य स्थापित किया तो उसका आधार ओपन वेव रहा। वह उपयोगकर्ताओं को दुनिया भर की लाखों वेबसाइटों, समाचार पत्रों और विश्वविद्यालयों के हाइपरलिंक दिखाता और उन्हें वेब की विशाल दुनिया में भेजता, लेकिन एआई के मौजूदा दौर में गूगल अपनी ही पुरानी नीति से पीछे हटता दिख रहा है और इस प्रक्रिया में पूरे इंटरनेट के अस्तित्व को ही संकट में डाल रहा है।
गूगल ने अपने सर्च बॉक्स को एआई मोड और जेमिनी चैटबॉट से बदल दिया है। अब जब कोई यूजर सर्च करता है, तो गूगल उसे किसी अन्य वेबसाइट का लिंक देने के बजाय एआई द्वारा तैयार उत्तर खुद ही लिखकर दिखा दे रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों और मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि इंटरनेट गूगल जीरो के दौर में पहुंच चुका है। यानी ऐसी स्थिति जब गूगल से मीडिया, बैंकों और अन्य व्यवसायों की वेबसाइटों को मिलने वाला ट्रैफिक पूरी तरह घटकर शून्य हो जाएगा। क्लाउडफ्लेयर की रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2025 से अप्रैल 2026 के बीच वित्तीय, खुदरा व मीडिया क्षेत्रों की वेबसाइटों पर विजिट 40% तक गिरी है।
एआई मोड से बाहर नहीं गए यूजर बिकने लगे डिजिटल पब्लिशर्स
रिसर्च फर्म ग्रोथ मेमो के हालिया अध्ययन के अनुसार, लगभग 75% सर्च सत्रों में यूजर एआई मोड से बाहर अन्य वेबसाइटों पर गए ही नहीं। वे पहले से 1 से 9 मिनट अधिक समय गूगल पर ही बिता रहे हैं। इससे विकीपीडिया को भी चपत लगी है। ऑनलाइन ज्ञानकोश विकीपीडिया ने बताया कि बीते एक साल में उसकी साइट पर आने वाले ट्रैफिक में 8% की कमी आई है, जबकि एआई मॉडल को ट्रेन करने वाले बॉट्स का ट्रैफिक बढ़ गया है।
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टेक वेबसाइट द वर्ज के मुख्य संपादक निले पटेल कहते हैं, सर्च ट्रैफिक की गिरावट ने प्रकाशकों को व्यापार को ध्वस्त कर दिया है। इस कारण वॉक्स मीडिया जैसी बड़ी डिजिटल मीडिया कंपनी को अपनी कई संपत्तियां बेचनी पड़ीं। वॉक्स मीडिया के सीईओ जिम बैंकऑफ ने माना, उन्हें पॉडकास्ट जैसे मार्गों पर निर्भर होना पड़ा और अपनी आधी कंपनी पेन्स्के मीडिया को बेचनी पड़ी। ब्रिटेन कसेगा गूगल पर शिकंजा संकट देख ब्रिटेन के प्रतिस्पर्धा और बाजार प्राधिकरण (सीएमए) ने गूगल पर शिकंजा कसने का संकल्प लिया है।
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गूगल ने अपने सर्च बॉक्स को एआई मोड और जेमिनी चैटबॉट से बदल दिया है। अब जब कोई यूजर सर्च करता है, तो गूगल उसे किसी अन्य वेबसाइट का लिंक देने के बजाय एआई द्वारा तैयार उत्तर खुद ही लिखकर दिखा दे रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों और मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि इंटरनेट गूगल जीरो के दौर में पहुंच चुका है। यानी ऐसी स्थिति जब गूगल से मीडिया, बैंकों और अन्य व्यवसायों की वेबसाइटों को मिलने वाला ट्रैफिक पूरी तरह घटकर शून्य हो जाएगा। क्लाउडफ्लेयर की रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2025 से अप्रैल 2026 के बीच वित्तीय, खुदरा व मीडिया क्षेत्रों की वेबसाइटों पर विजिट 40% तक गिरी है।
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एआई मोड से बाहर नहीं गए यूजर बिकने लगे डिजिटल पब्लिशर्स
रिसर्च फर्म ग्रोथ मेमो के हालिया अध्ययन के अनुसार, लगभग 75% सर्च सत्रों में यूजर एआई मोड से बाहर अन्य वेबसाइटों पर गए ही नहीं। वे पहले से 1 से 9 मिनट अधिक समय गूगल पर ही बिता रहे हैं। इससे विकीपीडिया को भी चपत लगी है। ऑनलाइन ज्ञानकोश विकीपीडिया ने बताया कि बीते एक साल में उसकी साइट पर आने वाले ट्रैफिक में 8% की कमी आई है, जबकि एआई मॉडल को ट्रेन करने वाले बॉट्स का ट्रैफिक बढ़ गया है।
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टेक वेबसाइट द वर्ज के मुख्य संपादक निले पटेल कहते हैं, सर्च ट्रैफिक की गिरावट ने प्रकाशकों को व्यापार को ध्वस्त कर दिया है। इस कारण वॉक्स मीडिया जैसी बड़ी डिजिटल मीडिया कंपनी को अपनी कई संपत्तियां बेचनी पड़ीं। वॉक्स मीडिया के सीईओ जिम बैंकऑफ ने माना, उन्हें पॉडकास्ट जैसे मार्गों पर निर्भर होना पड़ा और अपनी आधी कंपनी पेन्स्के मीडिया को बेचनी पड़ी। ब्रिटेन कसेगा गूगल पर शिकंजा संकट देख ब्रिटेन के प्रतिस्पर्धा और बाजार प्राधिकरण (सीएमए) ने गूगल पर शिकंजा कसने का संकल्प लिया है।