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Pakistan: कर्ज में रियायत पाना अब पाकिस्तान की प्राथमिकता, लेकिन क्या चीन राजी होगा?

Mon, 12 Jun 2023 02:12 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 12 Jun 2023 02:12 PM IST
सार

पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशहाक डार ने पिछले हफ्ते अगले वित्त वर्ष के लिए देश का आम बजट पेश किया था। आलोचकों ने बजट को पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था का इकबालिया दस्तावेज कहा है। खास कर आईएमएफ का ऋण हासिल करने में मिली नाकामी को लेकर वित्त मंत्री और शहबाज सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है...

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Getting debt relief is now Pakistan priority, but will China agree?
पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

देश की डूबती अर्थव्यवस्था के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से कर्ज हासिल करने में नाकामी के कारण शहबाज शरीफ सरकार की हो रही आलोचना के बीच अब पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने विदेशी द्विपक्षीय कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग को अपना खास एजेंडा बनाने का आश्वासन दिया है। द्विपक्षीय कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग (चुकाने में रियायत) के मामले में सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू चीन से लिया गया कर्ज है। आईएमएफ ने कहा था कि पाकिस्तान द्विपक्षीय कर्जों की रिस्ट्रक्चरिंग का कर्जदाता देशों के साथ समझौता करे। समझा जाता है कि इस सिलसिले में आईएमएफ के भी निशाने पर मुख्य रूप से चीनी कर्ज है।

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पर्यवेक्षकों के मुताबिक मौजूदा आर्थिक संकट के बीच चीन ने पाकिस्तान की वित्तीय मदद की है। लेकिन वह अपने कर्जों के भुगतान के मामले में कोई रियायत देने को तैयार नहीं है। समझा जाता है कि अगर पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर चीन के सामने अधिक जोर डाला, तो दोनों देशों के रिश्तों में पेच पड़ सकते हैं।

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पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशहाक डार ने पिछले हफ्ते अगले वित्त वर्ष के लिए देश का आम बजट पेश किया था। आलोचकों ने बजट को पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था का इकबालिया दस्तावेज कहा है। खास कर आईएमएफ का ऋण हासिल करने में मिली नाकामी को लेकर वित्त मंत्री और शहबाज सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है।

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इसी बीच डार ने यहां एक प्रेस कांफ्रेंस में भरोसा दिलाने की कोशिश की कि सरकार जल्द ही आईएमएफ से कर्ज पाने का रास्ता तैयार करेगी। इस सिलसिले में द्विपक्षीय कर्ज रिस्ट्रक्चरिंग को प्राथमिकता बनाया जाएगा। लेकिन डार ने घरेलू कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग की संभावना को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कहा- ‘एक संप्रभु देश को अगर अपने घरेलू ऋण की रिस्ट्रक्चरिंग भी करनी पड़े, अगर वह ऋण भुगतान संबंधी अपनी करेंसी से संबंधित जरूरतों को भी पूरा ना कर पाए, तो उसे एक बेहद गंभीर स्थिति माना जाएगा।’

विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि पिछली 27 मई को जब वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से कर्ज रिस्ट्रक्चरिंग के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने उस पर बहुत कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। लेकिन अब साफ है कि दो हफ्तों के अंदर ही मंत्रालय की राय बदल गई है। ऐसा संभवतः कर्ज डिफॉल्ट के मंडराते खतरे के कारण हुआ है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान और इन्वेस्टमेंट बैंक काफी समय से पाकिस्तान सरकार पर कर्ज रिस्ट्रक्चरिंग के लिए बातचीत शुरू करने का दबाव बनाए हुए हैं। लेकिन सरकार ने अब तक ऐसा नहीं किया है।

बजट से पहले पेश 2023 के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक पाकिस्तान पर 84.3 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज है। आईएमएफ से लिया गया कर्ज इसके अतिरिक्त है। कुल विदेशी कर्ज के बीच द्विपक्षीय कर्ज का हिस्सा 38.8 बिलियन डॉलर है। इसमें 25 बिलियन डॉलर चीन से लिया गया कर्ज है। पाकिस्तान पर मौजूद कुल कर्ज में 36.8 बिलियन डॉलर बहुपक्षीय कर्जदाताओं से लिया गया है। 8.8 बिलियन डॉलर ऋण पेरिस क्लब के सदस्य देशों से पाकिस्तान ने लिया है। चीन कर्ज रिस्ट्रक्चरिंग से लगातार इनकार करता रहा है। जानकारों के मुताबिक अभी भी उसके इस पर राजी होने की संभावना बहुत कम है।

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