शरणार्थी बने परेशानी: अब वैश्विक समस्या का रूप ले रहा है यूरोपियन यूनियन और बेलारुस का विवाद
समस्या इस साल गर्मियों में शुरू हुई, जब पोलैंड, लिथुआनिया और लातविया ने आरोप लगाया कि बेलारुस के राष्ट्रपति अलेक्सांद्र लुकाशेंको पश्चिम एशिया और अफ्रीकी देशों से शरणार्थी बुला कर उन्हें ईयू क्षेत्र में भेज रहे हैँ। ये तीनों देश ईयू के सदस्य हैं...
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शरणार्थियों को यूरोपियन यूनियन (ईयू) के इलाके में जबरन भेजने की बेलारुस की कथित कोशिश अब अंतरराष्ट्रीय समस्या का रूप लेने लगी है। जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने रूस से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। उधर यूरोपियन आयोग की अध्यक्ष उरसुला वॉन डेर लियेन ने अब ऐसी ही अपील अमेरिका से भी की है।
राष्ट्रपति अलेक्सांद्र लुकाशेंको पर आरोप
ईयू और बेलारुस के बीच शरणार्थी विवाद कई महीनों से चल रहा है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में इसमें काफी तेजी आ गई है। समस्या इस साल गर्मियों में शुरू हुई, जब पोलैंड, लिथुआनिया और लातविया ने आरोप लगाया कि बेलारुस के राष्ट्रपति अलेक्सांद्र लुकाशेंको पश्चिम एशिया और अफ्रीकी देशों से शरणार्थी बुला कर उन्हें ईयू क्षेत्र में भेज रहे हैँ। ये तीनों देश ईयू के सदस्य हैं।
खबरों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में हजारों शरणार्थी बेलारुस और पोलैंड की सीमा पर इकट्ठे हो गए हैं। वे वहां कड़ाके की ठंड में समय गुजार रहे हैं और पोलैंड में घुसने की फिराक में हैँ। बुधवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष वॉन डेर लियेन ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से बातचीत में कहा- ‘यह पूरे ईयू की समस्या है। यह शरणार्थी संकट नहीं है। बल्कि यह एक तानाशाह सरकार की पड़ोसी लोकतांत्रिक देशों को अस्थिर करने की कोशिश है।’
मैर्केल ने इस मसले पर रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन से फोन पर बात की। लेकिन वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मैर्केल को पुतिन से कोई अनुकूल जवाब नहीं मिला। उधर यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल अपने तमाम कार्यक्रम छोड़ कर बुधवार को पोलैंड की राजधानी वॉरसा पहुंचे। वहां उन्होंने कहा कि बेलारुस से पोलैंड की लगी सीमा पर दीवार बनाने के लिए ईयू धन दे सकता है।
ईयू के प्रतिबंधों से नाराज बेलारुस
पोलैंड ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि शरणार्थियों की भेजने की कोशिश में लुकाशेंको को पुतिन से मदद मिल रही है। तब से पूरे ईयू में इस पहलू पर कयास लगाए जा रहे हैं। ईयू के एक अधिकारी ने वेबसाइट पॉलिटिको से कहा कि इस संकट में रूस के हाथ की शंका के पीछे दो धारणाएं हैं। यह मुमकिन है कि ईयू को अस्थिर करने के लिए पुतिन लुकाशेंको की मदद कर रहे हों। या यह हो सकता है कि प्रत्यक्ष मदद देने के बजाय शरणार्थी संकट खड़ा करने की लुकाशेंको की कोशिश के वो खामोश दर्शक बने हुए हों। अधिकारी ने कहा कि यह साफ है कि पुतिन ने संकट हल करने के लिए लुकाशेंको पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल नहीं किया है।
जर्मनी की चांसलर मैर्केल ने पुतिन से फोन पर हुई बातचीत के दौरान लुकाशेंको के व्यवहार को ‘अमानवीय और पूरी तरह से अस्वीकार्य’ बताया। लेकिन पुतिन ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। पुतिन ने कहा कि वे अधिक से अधिक यह कर सकते हैं कि इस मामले में ईयू और लुकाशेंको के बीच सीधा संपर्क बनवा दें। उधर रूस के दूसरे अधिकारियों ने इस संकट के लिए ईयू को दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा है कि प्रतिबंध लगाकर बेलारुस का गला घोंटने की कोशिश ईयू ने की, जिससे ये ‘मानवीय संकट’ खड़ा हुआ है।