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बोर्ड ऑफ पीस: क्या स्थायी सदस्यता के लिए देना होगा एक अरब डॉलर? दावे में कितनी सच्चाई; व्हाइट ने किया खुलासा

Sun, 18 Jan 2026 11:20 PM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 18 Jan 2026 11:20 PM IST
सार

अमेरिका ने भारत समेत कई देशों को गाजा शांति बोर्ड में आमंत्रित किया है। यह बोर्ड केवल संघर्षविराम की निगरानी नहीं करेगा, बल्कि पुनर्निर्माण और सुरक्षा भी संभालेगा। इस बीच दावा यह किया जा रहा है कि क्या बोर्ड की स्थाई सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर देना पड़ेगा? आइए जानते है इस दावे में कितनी सच्चाई है?

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Gaza Peace Board Will permanent membership cost a billion dollars The White House reveals the truth
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका ने भारत समेत कई देशों को गाजा में शांति बहाली के लिए बनाए जा रहे नए 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। यह बोर्ड केवल संघर्षविराम की निगरानी नहीं करेगा, बल्कि गाजा के पुनर्निर्माण, हमास का निरस्त्रीकरण, सुरक्षा व्यवस्था और लंबे समय तक स्थिरता सुनिश्चित करने में भी भूमिका निभाएगा। इस खबर के बीच एक और बड़ा दावा सामने आ रहा है। दावा यह है कि 'बोर्ड ऑफ पीस' का स्थायी सदस्यता पाने के लिए एक अरब डॉलर का योगदान देना होगा, लेकिन सामान्य तीन साल की सदस्यता शुल्क-मुक्त है।

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ट्रंप इस बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष होंगे और इसके माध्यम से वैश्विक शांति प्रयासों में अमेरिका की अगुवाई को मजबूत किया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत, हंगरी, जॉर्डन, ग्रीस, साइप्रस, पाकिस्तान समेत कई देशों को उनके नए “बोर्ड ऑफ पीस” में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। यह बोर्ड दुनिया के नेताओं का एक नया समूह है, जिसे गाजा में अगले कदमों को देखना है और वैश्विक मामलों में भी व्यापक भूमिका निभाने की योजना है।
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राष्ट्रपति ट्रंप होंगे बोर्ड के संस्थापक?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बोर्ड को संस्थापक अध्यक्ष होंगे। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट के भ्रामक बताया है। उसने कहा कि बोर्ड में शामिल होने के लिए न्यूनतम फीस निर्धारित नहीं की गई है। व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह बस उन साझेदार देशों को स्थायी सदस्यता देता है जो शांति, सुरक्षा और खुशहाली के लिए गहरी प्रतिबद्धता दिखाते हैं।


एक अरब डॉलर की पूरी सच्चाई
सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड में स्थायी सदस्यता पाने के लिए एक अरब डॉलर का योगदान देना होगा, जबकि तीन साल की सामान्य सदस्यता के लिए कोई शुल्क नहीं है। यह राशि मुख्य रूप से गाजा के पुनर्निर्माण में खर्च होगी। बोर्ड का काम गाजा में अक्तूबर 10 से लागू हुई संघर्षविराम की दूसरी चुनौतीपूर्ण चरण में निगरानी करना होगा। इसमें एक नई फलस्तीनी समिति का गठन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती, हमास का निरस्त्रीकरण और युद्ध से क्षतिग्रस्त क्षेत्र का पुनर्निर्माण शामिल है।


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ट्रंप ने आमंत्रण पत्र में क्या-क्या लिखा?

गौरतलब है कि ट्रंप ने आमंत्रण पत्र में लिखा कि बोर्ड वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए 'नए साहसिक तरीके' अपनाएगा। इसके सदस्य यूएस के राज्य सचिव मारको रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकोफ, उनके जेरेड कुशनर, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और अन्य प्रमुख होंगे। विशेष बात यह है कि यह बोर्ड भविष्य में संयुक्त राष्ट्र के मुकाबले भी प्रभावशाली हो सकता है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने यूएन को कई वित्तीय और राजनीतिक रूप से सीमित किया है। बोर्ड के सदस्य अब गाजा में स्थिरता, शांति और पुनर्निर्माण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे।

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