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कोरोना महामारी के बीच बांग्लादेश में गारमेंट उद्योग खुला, लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं
Mon, 11 May 2020 10:52 PM IST
Rohit Ojha
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Rohit Ojha
Updated Mon, 11 May 2020 10:52 PM IST
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बांग्लादेश का झंडा
- फोटो : Social media
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बांग्लादेश में अब रेडिमेड कपड़ों की तमाम फैक्ट्रियों ने काम करना शुरू तो कर दिया है, लेकिन यहां काम करने वाले बेहद सहमे हुए हैं, उनका कहना है कि वह अपनी जिंदगी को जोखिम में डालकर जबरन फैक्ट्री आ रहे हैं और संक्रमण के खतरे के बावजूद काम करने को मजबूर हैं। उन्हें मालिकों ने जबरन काम पर आने को मजबूर किया है, जबकि न तो यहां मास्क पहनना मुमकिन है और न ही सोशल डिस्टेंसिंग को लागू करना।
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बांग्लादेश में दुनिया के तमाम बड़े ब्रांड के रेडिमेड गारमेंट्स बनते हैं और देश के कुल गारमेंट बाजार का 84 फीसदी हिस्सा निर्यात किया जाता है। हालांकि सरकार ने इसे इसी शर्त पर चलाने की इजाजत दी है कि वहां निर्देशों का पालन होगा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है।
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गार्डियन अखबार ने इस बारे में जो पड़ताल की है, उसमें कहा गया है कि इन फैक्ट्री में केवल गेट पर हाथ धोने या सैनिटाइज करने का इंतजाम किया गया है, बाकी न तो मास्क, ग्लव्स या सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का पालन हो रहा है।
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गाजीपुर और आशुलिया इलाके की फैक्ट्रियों का जायजा लेने के बाद ये तथ्य सामने आया है कि इन्हें ठसाठस भरी बस में काम पर लाया जाता है और नौकरी बचाए रखने की मजबूरी की वजह से इन्हें अपना जान जोखिम में डालना पड़ रहा है। तमाम मजदूरों के मुताबिक उनमें से कई बीमार हो रहे हैं, लेकिन उनकी जांच की कोई व्यवस्था नहीं है।
बांग्लादेश में अभी कोरोना के करीब 10 हजार मामले सामने आए हैं, 187 मौतें भी हुई हैं। लेकिन दुनिया के तमाम देशों के मुकाबले संक्रमण और मौत के आंकड़े कम होने की वजह से फैक्ट्री मालिकों की हिम्मत बढ़ी है। सरकार पर लगातार ये दबाव डाला जा रहा था कि गारमेंट उद्योग को चालू कर दिया जाए। नियम कानून तो बहुत हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन कहीं नहीं हो रहा है।
गारमेंट की फैक्ट्रियों ने 15 मार्च के बाद से काम करना बंद कर दिया था, मजदूरों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया था और करीब डेढ़ लाख कर्मचारी सड़कों पर थे। आखिरकार फिलहाल करीब 1000 फैक्ट्रियों में काम शुरु हो चुका है और तमाम कर्मचारी अपनी रोजी रोटी के लिए काम पर लौट आए हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर न तो फैक्ट्री मालिक चिंतित हैं और न ही सरकार ने कोई कारगर उपाय किए हैं।