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G7 summit in Hiroshima: जी 7 के जवाब में चीन ने आयोजित किया है मध्य एशियाई देशों का शिखर सम्मेलन!

Fri, 19 May 2023 06:26 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 19 May 2023 06:26 PM IST
सार

चीन सरकार के सूत्रों ने स्पटीकरण दिया है कि चीन ने जानबूझ कर जी 7 शिखर सम्मेलन के समय इस सम्मेलन का आयोजन नहीं किया। लेकिन उन्होंने दावा किया है कि इन दोनों शिखर सम्मेलनों ने विपरीत संदेश दुनिया को मिल रहे हैं...

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G7 summit in Hiroshima: In response to G7, China has organized a summit of Central Asian countries!
G7 summit in Hiroshima - फोटो : Agency

विस्तार

जिस समय जी 7 और उसके आमंत्रण पर कई विकासशील देशों के नेता पड़ोसी देश जापान के शहर हिरोशिमा में इकट्ठे हुए हैं, चीन ने अपने शियान शहर में पांच मध्य एशियाई देशों के साथ शिखर सम्मेलन का आयोजन किया है। इसमें चीन के अलावा कजाखस्तान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिजिस्तान और ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति भाग ले रहे हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार सुबह सम्मेलन का उद्घाटन किया।

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चीन सरकार के सूत्रों ने स्पटीकरण दिया है कि चीन ने जानबूझ कर जी 7 शिखर सम्मेलन के समय इस सम्मेलन का आयोजन नहीं किया। लेकिन उन्होंने दावा किया है कि इन दोनों शिखर सम्मेलनों ने विपरीत संदेश दुनिया को मिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि जी 7 पुरानी शीत युद्ध की भाषा बोल रहा है, जबकि चीन-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन में चर्चा सहयोग और विकास पर केंद्रित रहेगी।

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अपने स्वागत भाषण में शी जिनपिंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्थितियों में चाहे जितना भी बदलाव आ जाए, चीन और मध्य एशियाई देश एक दूसरे का सम्मान करते रहेंगे, वे दोस्ती बनाए रखेंगे और ऐसे सहयोग को बढ़ावा देंगे जिससे सबको लाभ हो। इस मौके पर शी ने मेहमान राष्ट्रपतियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की है। मेहमान राष्ट्रपतियों का यहां भव्य स्वागत किया गया। पर्यवेक्षकों के मुताबिक चीन ने इसके जरिए जी-7 देशों को यह संदेश भेजने की कोशिश की है कि वह दूसरे देशों के साथ बराबरी के स्तर पर संबंध बनाता है और सभी देशों और उनके हितों को समान महत्त्व देता है।

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इस मौके पर कजाखस्तान, किर्गिजिस्तान और ताजिकिस्तान के साथ चीन ने व्यापार, ऊर्जा और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) से जुड़े कई द्विपक्षीय समझौते भी किए हैं। चीनी मीडिया में इस बात को प्रमुखता से पेश किया गया है कि इन मुस्लिम बहुल देशों ने शिनजियांग प्रांत के मुद्दे पर चीन को पूरा समर्थन दिया है। जबकि पश्चिमी देशों का आरोप है कि चीन इस प्रांत के निवासी वीगर मुसलमानों का दमन कर रहा है।

थिंक टैंक चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज से जुड़े विशेषज्ञ वांग शियाचुआन ने चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स से कहा कि चीन के लिए मध्य एशियाई देशों का अनोखा रणनीतिक महत्त्व है। उन्होंने कहा-‘जिस समय अमेरिका अपने सहयोगियों की चीन के खिलाफ लामबंदी कर रहा है, मध्य एशिया में स्थिरता चीन की जरूरत बन गई है। मध्य एशिया में सुरक्षा की स्थिति का चीन के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में दूरगामी प्रभाव होगा।’

इसी एकेडमी से जुड़े एक दूसरे विशेषज्ञ झाओ हुइरोंग ने कहा है कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से दुनिया में खेमाबंदी तेज हो गई है। इस स्थिति में मध्य एशियाई देशों के साथ चीन के सहयोग से इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। पश्चिमी मीडिया में दोनों शिखर सम्मेलनों के एक साथ आयोजन पर खास ध्यान खींचा गया है। अमेरिकी मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग ने लिखा है-‘ये दोनों बैठकें बहुध्रवीय दुनिया के ठोस रूप लेने का प्रतीक हैं। इस ध्रुवीकरण में विकासशील देशों को महत्त्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी बनने के लिए लुभाया जा रहा है।’

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