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जी-7 शिखर सम्मेलन: दुनिया के लिए कोरोना टीकों की प्रतिबद्धता जताने एकत्र हुए नेता

Fri, 11 Jun 2021 10:17 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, कारबिस बे
पीटीआई, कारबिस बे Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 11 Jun 2021 10:17 PM IST
सार

जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले यूरोपीय संघ के देशों के नेता शिखर सम्मेलन कार्यक्रम की शुक्रवार को आधिकारिक शुरुआत से पहले यूरोपीय संघ के शीर्ष अधिकारियों के साथ एकत्रित हुए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल, इतालवी प्रधानमंत्री मारियो द्राघी, यूरोपीय संघ परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल और यूरोपीय संघ आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने चीन के साथ संबंधों के बारे में बात की। वे इस विषय पर बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ चर्चा करने की योजना बना रहे हैं। बाइडन भी इस शिखर सम्मेलन में हैं। 

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G7 summit begins from Friday, main focus on coronavirus vaccine for world, here is all you need to know
जी-7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन - फोटो : पीटीआई

विस्तार

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने शुक्रवार को कारबिस बे में जी7 शिखर सम्मेलन में इस समूह के नेताओं का स्वागत किया। कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद पहली बार ये नेता एक स्थान पर एकत्रित हुए। इन नेताओं की चर्चा में कोरोना वायरस के मुद्दे के प्रमुखता से छाए रखने की उम्मीद थी। साथ ही धनी देशों के इस समूह के नेताओं द्वारा संघर्षरत देशों के लिए टीके की कम से कम एक अरब खुराक साझा करने के लिए प्रतिबद्धता जताए जाने की उम्मीद थी।

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दक्षिण-पश्चिम ब्रिटेन में जी-7 शिखर सम्मेलन की शुरुआत होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने 50 करोड़ खुराक और जॉनसन ने कोविड-19 रोधी टीके की 10 करोड़ खुराक साझा करने की प्रतिबद्धता जताई थी। इस सम्मेलन का मुख्य जोर कोविड-19 से उबरने पर होगा। बाइडन ने कहा, 'हम अपने वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर दुनिया को इस महामारी से बाहर निकालने में मदद करने जा रहे हैं।' जी-7 में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान भी शामिल हैं।
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बाइडन ने कहा, 'अपने वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर हम इस वैश्विक महामारी से दुनिया को छुटकारा दिलाने के लिए काम करेंगे।' नेताओं की यह बैठक कारबिस बे के एक रिजॉर्ट में हो रही है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी नई जान आने की उम्मीद है। बता दें कि शुक्रवार को निगमों पर कम से कम 15 फीसदी न्यूनतम वैश्विक कर को औपचारिक रूप से अपनाया जाएगा। इसके लिए इन देशों के वित्त मंत्रियों के बीच एक सप्ताह पहले ही एक समझौता हुआ था।
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यह बाइडन प्रशासन के लिए एक संभावित जीत है, जिसने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के भुगतान के तरीके के रूप में वैश्विक न्यूनतम कर का प्रस्ताव किया है। हालांकि जी-7 से अनुमोदन प्रक्रिया में यह सिर्फ एक कदम दूर है तथा उम्मीद है कि कई और देशों द्वारा इस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। वहीं, ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के लिए यह दो वर्षों में पहला जी-7 शिखर सम्मेलन ब्रेग्जिट के बाद के 'वैश्विक ब्रिटेन' के उनके दृष्टिकोण को सामने रखने का एक मौका है।

यह ब्रिटेन-अमेरिका संबंध को रेखांकित करने का एक अवसर भी है। यह ऐसा गठबंधन है जिसे अक्सर 'विशेष संबंध' कहा जाता है लेकिन जॉनसन ने कहा कि वह इसे 'अविनाशी संबंध' कहना पसंद करते हैं। जलवायु परिवर्तन भी एजेंडे में एक शीर्ष मुद्दा है। इसे लेकर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने कॉर्नवाल में एकत्र होकर नेताओं से कार्रवाई करने का आग्रह किया। शिखर सम्मेलन शुक्रवार को शुरू हुआ और इस दौरान नेताओं ने एक जूसरे का औपचारिक अभिवादन किया।

दुनिया भर में टीकों की आपूर्ति में असमानता के मद्देनजर जी7 नेताओं पर वैश्विक टीका साझा कार्यक्रम की रूपरेखा बताने का दबाव बढ़ता जा रहा है। बाइडन ने 50 करोड़ खुराकें दान देने का संकल्प लिया है और व्यापक व तीव्र गति से टीकाकरण करने के लिए संपन्न देशों से समन्वित प्रयास करने को कहा। अमेरिका की प्रतिबद्धता वैश्विक कोवैक्स गठबंधन के माध्यम से 92 निम्न-आय वाले देशों और अफ्रीकी यूनियन को 50 करोड़ फाइजर की खुराकें दान करने की है।

वहीं, इसे लेकर बोरिस जॉनसन के कार्यालय की ओर से बताया गया है कि टीके की पहली पांच करोड़ खुराकें आने वाले सप्ताहों में दी जाएंगी जबकि बाकी की खेप अगले साल देंगे। उन्होंने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि जी-7 शिखर सम्मेलन में मेरे साथी नेता भी इसी तरह के संकल्प लेंगे और हम मिलकर अगले वर्ष के अंत तक पूरे विश्व का टीकाकरण कर सकेंगे।' उन्होंने उम्मीद जताई कि जी-7 देशों के समूह में टीके की एक अरब खुराकें उपलब्ध करवाने का संकल्प लिया जाएगा।


इसके साथ ही जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शिखर सम्मेलन दुनिया को दिखाएगा कि हम सिर्फ अपने बारे में नहीं सोच रहे हैं। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कोरोना वायरस रोधी टीकों को लेकर अमेरिका के संकल्प का स्वागत करते हुए कहा था कि यूरोप को भी ऐसा ही कदम उठाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि बीते दिनों उन्होंने कहा था कि इस साल के अंत तक फ्रांस कोरोना टीके की कम से कम तीन करोड़ खुराकें दान देगा। 

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