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जी-7 समिट: क्या होगा तालिबान का भविष्य, आज फैसला करेंगे दुनिया के 'सुपरपावर' देश
Tue, 24 Aug 2021 08:50 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Tue, 24 Aug 2021 08:50 AM IST
सार
तालिबान को लेकर दुनिया दो हिस्सों में बंट गई है। कुछ देश तालिबान को मान्यता देने के लिए आगे आ रहे हैं, तो कुछ ने इस पर बड़ी आपत्ति जताई है। हालांकि, तालिबान का अंतरराष्ट्रीय भविष्य क्या होगा, यह जी-7 देशों की बैठक में बहुत हद तक साफ हो जाएगा।
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तालिबान
- फोटो : twitter
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विस्तार
अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान का भविष्य क्या होगा? उस पर कई प्रतिबंध लगेंगे या दुनिया के सुपरपावर देश उसे मान्यता देंगे, यह सब कुछ आज होने वाली जी-7 देशों की बैठक के रुख पर निर्भर होगा। अमेरिका व उसके सहयोगी देश आज इस बड़ा फैसला कर सकते हैं।
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गौरतलब है जिस तरह से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा जमाया, उससे कई देश नाराज भी हैं। हो सकता है जी-7 की बैठक में तालिबान को दुनिया से अलग-थलग करने पर फैसला लिया जाए। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक जो बाइडन, अफगानिस्तान में 31 अगस्त के बाद भी अमेरिकी व नाटो देशों की सेनाओं को कुछ वक्त के लिए रोकने पर फैसला ले सकते हैं।
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अंतरराष्ट्रीय नियमों को मानने पर बन सकती है सहमति
जी-7 देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और जापान शामिल हैं। संभव है कि सभी देश एक सुर में तालिबान पर कई प्रतिबंध लगा कर उसे मान्यता देने का रुख अपनाएं। एक यूरोपियन राजनयिक का कहना है कि जी-7 देश तालिबान को अंतरराष्ट्रीय नियमों को मानने व महिलाओं को उनके अधिकार देने की शर्त पर मान्यता दे सकते हैं। अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत कारेन पियर्स का कहना है कि मीटिंग में बोरिस जॉनसन कुछ समाधान निकाल सकते हैं। इस बैठक में यूएन सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुतारेस व संयुक्त राष्ट्र के महासचिव जेन स्टॉलटेनबर्ग के शामिल होने की भी संभावना है।
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बता दें कि आज होने वाली जी-7 की वर्चुअल मीटिंग के होस्ट जो बाइडन ही हैं। जी-7 की यह बैठक बुलाने की मांग ब्रिटेन की ओर से की गई है। अमेरिका के व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने अपने बयान में कहा, ‘राष्ट्रपति जो बाइडन 24 अगस्त को जी-7 देशों के नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक कर सकते हैं। ये नेता अफगानिस्तान के मामले में समन्वय बढ़ाने और पश्चिमी देशों का साथ देने वाले अफगानों को बाहर निकालने पर चर्चा करेंगे। साकी ने कहा कि जी-7 के नेता अफगान शरणार्थियों को मानवीय सहायता देने की योजनाओं पर भी विचार-विमर्श करेंगे।
जॉनसन का बयान
इससे पहले ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन ने ट्विटर पर कहा था, ‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय लोगों को सुरक्षित निकालने, मानवीय संकट को रोकने और पिछले 20 वर्षों की मेहनत को सुरक्षित करने के लिए अफगान लोगों का समर्थन करने के लिए मिलकर काम करने की जरूत है।' ब्रिटेन इस साल जी-7 देशों की अध्यक्षता कर रहा है। इस समूह में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका शामिल है।
अफगान पॉलिसी पर कॉमन अप्रोच की बताई जरूरत
व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस बातचीत के दौरान जो बाइडन और बोरिस जॉनसन ने 24 अगस्त को होनी वाली जी-7 की वर्चुअल मीटिंग के बारे में भी बात की। दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान के हालात से निपटने के लिए आपसी सहयोग और कॉमन अप्रोच के बारे में चर्चा की। साथ ही अफगानिस्तान की पॉलिसी पर मिलकर काम करने पर भी जोर दिया। गौरतलब है कि बाइडन प्रशासन अफगानिस्तान से अमेरिकी फौजों को निकालने को लेकर कड़ी आलोचना से गुजर रहा है।