अमेरिका-चीन तैयार कर रहे हैं 'आयरन मैन' जैसे सैनिक, असीम होगी इनकी ताकत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन पर न गोलियों का असर होगा, न तोप के गोले ही उनका कुछ बिगाड़ सकेंगे। वो बिजली की रफ्तार से आएंगे और कहर बरपाकर चले जाएंगे। वो हाथों से ही मिसाइल लॉच करेंगे और आसमान में उड़ते युद्धक विमानों को मार गिराएंगे। वो जीते-जागते मौत होंगे।
अगले पचास-सौ वर्षों में युद्ध की तस्वीर कैसी होगी, इसकी कल्पना आप भले ही न कर पाएं, लेकिन अमेरिका-चीन ने बखूबी कर ली है। इनके मंसूबे जानकर पैरों तले जमीन खिसकना लाजमी है। ये दोनों मुल्क साइंस फिक्शन को हकीकत का जामा पहनाने में दिन-रात लगे हैं। भविष्य के ऐसे सैनिक तैयार किए जा रहे हैं जो हर बाधा को लांघ सकेंगे।
मौसम का कहर भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा। घनघोर अंधेरा, जंगल की कंटीली पगडंडियां, नदी, झरने और चट्टानें भी उनका रास्ता नहीं रोक सकेंगी। इंसान तो छोड़िए जंगली जानवर तक भी उनका बाल न बाकां कर सकेंगे। वो जीते-जागते बारूद होंगे और बिजली की रफ्तार से लक्ष्य को भेद देंगे।
ये सारी बातें आपको मजाक लग सकती हैं या हॉलीवुड फिल्मों में दिखाई दे सकती हैं। लेकिन मीडिया रिपोर्टों में जाहिर अमेरिका-चीन के मंसूबों पर गौर किया जाए तो ये मुल्क भविष्य के असली 'आयरन मैन' तैयार कर रहे हैं। जी हां, वही आयरन मैन जो ऊपर लिखी खूबियों से भरा होता है।
दोनों देश हॉलीवुड फिल्मों में दिखाए जाने वाले साइंस फिक्शन से प्रेरित होकर सुपरहीरोज सरीखे सैनिक तैयार करने में जुटे हैं। आखिर कैसे और कहां तैयार हो रहे हैं ये सैनिक, जानने के लिए आगे की स्लाइड देखिए...
'आयरन मैन' की तरह होंगे भविष्य के अमेरिकी सैनिक
अमेरिका चीन एक ऐसी आर्मी तैयार करने में जुट गए हैं जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। अगले कुछ सालों में हॉलीवुड फिल्मों की मानिंद सुपरहीरोज की तरह दिखने वाले सैनिक सेनाओं का हिस्सा होंगे।
साल 2013 में ही अमेरिका ने 'आयरन मैन' सैनिक तैयार करने का अधिकार प्राप्त कर लिया था। खास सैन्य अभियानों में और लड़ाइयों में इनकी मदद ली जाएगी। अमेरिका ने 'आयरन मैन' फिल्म की तर्ज पर सैनिकों के लिए खास एडवांस्ड आर्मर सूट बनाने का जिम्मा युद्ध इंडस्ट्री, विश्व विद्यालयों और प्रयोगशालाओं को दिया है। अमेरिका के लिए तैयार किए जा रहे इस आर्मर को 'टालोस' नाम दिया गया है।
यानी 'टालोस' हकीकत के सुपरमैन का नाम होगा। और इन टालोस की पूरी फौज तैयार होगी।
अंग्रेजी साइट डेलीमेल की खबर के मुताबिक इन बख्तरबंद सूटों को इस तरह बनाया जा रहा है कि इनको पहनकर सैनिक उम्मीद से ज्यादा वजन ढो सकेंगे। चोट लगने पर ये जरूरत के हिसाब से नसों से बहने वाले खून को वहीं जमां देगें जिससे कि घाव भरने में देर नहीं लगेगी। अगर सैनिक की मौत हो जाती है तो अलग से उसके क्रियाकर्म की जरूरत नहीं पड़ेगी, बस बटन दबाते ही आर्मर सूट में ही वो दफन हो जाएगा।
अमेरिका इसी साल सैनिकों का ये एडवांस आर्मर लॉन्च कर सकता है। हालांकि अभी इसके पॉवर सोर्स पर दुविधा है कि ये भारी-भरकम बैटरी से ऑपरेट होगा या हाइड्रोलिक सिस्टम पर आधारित होगा या किसी और सोर्स से चलेगा। फिल्मों के 'आयरन मैन' के पॉवर सोर्स पर काम चल रहा है। लेकिन भविष्य में इसमें वो सारी चीजें जोड़ी जाएंगी जहां तक इंसानी सोच पहुंचती है।
चीन कस चुका है कमर, हाईटेक बख्तरबंद बनाने पर चल रहा है शोध
चीन की बात करें तो कॉन्सेप्ट वीडियो गेम 'कॉल ऑफ ड्यूटी एडवांस्ड वारफेयर' से लिया गया है। इस गेम में दिखने वाला भारी भरकम टर्मिनेटर नुमा रोबोट जब सैनिकों का बख्तरबंद बनेगा तो इसकी सूरत क्या होगी आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते।
वीडियो गेम के रोबोट के अलावा चीन ने हॉलीवुड फिल्मों में गढ़े गए साइंस फिक्शन पर भी अमल किया है। फिल्म 'एज ऑफ टुमारो', और 'एलियन्स' के नायकों की तर्ज पर बख्तरबंद सूट बनाने पर साल 2014 में ही जुहाई में रिसर्च शुरू कर दी गई थी।
मौजूदा वक्त में चीन ने ऐसे 'एक्सोस्केलटन' (एक प्रकार का कृत्रिम और बाहरी कंकालतंत्र जो सपोर्ट एड की तौर पर काम करता है) बना लिए हैं, जिनकी मदद से भारी-भरकम चीजें, हथियार, गोला-बारूद आसानी से सैनिक ढो सकता है और ये हाथ-पैर से लड़ने में भी मदद करता है। ये दुश्मन को ऐसी जोरदार साइड किक मार सकता है कि एक ही वार में धराशाई हो जाए। चीन के इरादे भी अमेरिका की तरह 'टालोस' तैयार करने के हैं।
ताइवानी सैनिकों को मिला नया बख्तरबंद, नहीं होता है गोलियों का असर
ताइवान ने हाल ही में एडवांस हथियारों और बुलेट फ्रूफ बख्तरबंद से लैस सैनिकों की टुकड़ी उतारकर सबको चौंका दिया। इन सैनिकों के बख्तरबंद 'आयरन मैन' की तरह तो नहीं हैं। लेकिन वर्तमान में सुरक्षा के लिहाज से जबरदस्त हैं।
सैनिकों को ऐसे बैलिस्टिक मास्क मुहैया कराए गए हैं जिनसे चेहरे की सुरक्षा सुनिश्चित हो जाती है। इन बैलिस्टिक मास्क पर .44 मैगनम की गोली भी असर नहीं करती।
साल 1980 में अमेरिका ने नशे के खिलाफ छिड़े युद्ध के दौरान इराक और अफगानिस्तान में ऐसे ही मास्क वाली आर्मी उतारी थी। ताइवान ने अपनी इस खौफनाक सेना को सुपरसोल्जर्स बोबा फेट क्लोन्स नाम दिया है।